पीएम मोदी ने नामीबिया की संसद को किया संबोधित, भारत के संविधान का किया जिक्र

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एजेंसी, विंडहोक, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया की संसद को संबोधित किया है। इस दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “लोकतंत्र के मंदिर, इस गरिमामय सदन को संबोधित करना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है। मुझे यह सम्मान देने के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैं लोकतंत्र की जननी के प्रतिनिधि के रूप में आपके समक्ष उपस्थित हूं और मैं अपने साथ भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं लेकर आया हूं।”

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “ये भारत का संविधान है जिसके कारण एक गरीब आदिवासी परिवार की बेटी आज दुनिया के इस सबसे बड़ी लोकतंत्र की राष्ट्रपति हैं। ये संविधान की ही ताकत है जिसके कारण मुझ जैसे गरीब परिवार में जन्मे व्यक्ति को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला है। जिसके पास कुछ भी नहीं है, उसके पास संविधान की गारंटी है।”

‘भारत को आपके साथ खड़े होने पर गर्व है’
नामीबिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत के लोग आपके स्वतंत्रता संग्राम में नामीबिया के साथ गर्व से खड़े रहे। हमारी आजादी से पहले भी, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका का मुद्दा उठाया था। नामीबिया में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का नेतृत्व एक भारतीय लेफ्टिनेंट जनरल, दीवान प्रेम चंद ने किया था। भारत को आपके साथ खड़े होने पर गर्व है, सिर्फ शब्दों में ही नहीं, बल्कि कार्यों में भी।”

‘हमारी मित्रता समय की कसौटी पर खरी उतरी है’
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, “मैं अपने लोगों के बीच मैत्री के प्रतीक के रूप में नामीबिया का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार प्राप्त करके अत्यंत गौरवान्वित हूं। नामीबिया के मजबूत और सुंदर पौधों की तरह, हमारी मित्रता समय की कसौटी पर खरी उतरी है। आपके राष्ट्रीय पौधे, वेलविचिया मिराबिलिस की तरह, यह समय और उम्र के साथ और भी मजबूत होती जाती है।”

पीएम मोदी ने इस बात पर जताई खुशी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम ना केवल अपने अतीत के संबंधों को महत्व देते हैं, बल्कि अपने साझा भविष्य की संभावनाओं को साकार करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम नामीबिया के विजन 2030 पर मिलकर काम करने को बहुत महत्व देते हैं और हमारी साझेदारी के केंद्र में हमारे लोग हैं। भारत में छात्रवृत्ति और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों से 1700 से ज्यादा नामीबियाई लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा, “हमें खुशी है कि नामीबिया भारत के UPI को अपनाने वाला पहला देश है। जल्द ही, लोग तेज गति से पैसे भेज पाएंगे।”

पीएम मोदी को नामीबिया के सर्वोच्च पुरस्कार से किया गया सम्मानित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में बुधवार, 9 जुलाई को नामीबिया पहुंचे है। यहां पीएम मोदी का भव्य स्वागत हुआ। यह प्रधानमंत्री मोदी की नामीबिया की पहली और भारत से किसी प्रधानमंत्री की तीसरी यात्रा है। इस दौरान पीएम मोदी को नामीबिया के सर्वोच्च पुरस्कार ‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एन्शिएंट वेल्वित्शिया मिराबिलिस’ से सम्मानित किया गया है।

पुरस्कार के बारे में जानें
ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एन्शिएंट वेल्वित्शिया मिराबिलिस नामीबिया का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह पुरस्कार 1990 में नामीबिया की स्वतंत्रता के तुरंत बाद 1995 में शुरू किया गया था, ताकि विशिष्ट सेवा और नेतृत्व को मान्यता दी जा सके। नामीबिया में पाए जाने वाले एक अनोखे और प्राचीन रेगिस्तानी पौधे, वेल्वित्शिया मिराबिलिस के नाम पर, यह पुरस्कार नामीबियाई लोगों के लचीलेपन, दीर्घायु और स्थायी भावना का प्रतीक है। यह प्रधानमंत्री मोदी का 27वां और इस दौरे का चौथा पुरस्कार है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “ये सम्मान मेरे लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है। मैं राष्ट्रपति जी का नामीबिया की सरकार और नामीबिया के लोगों का हृदय से आभार प्रकट करता हूं। मैं इस सम्मान को 140 करोड़ भारतीयों की ओर से विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं।” उन्होंने कहा, “भारत और नामीबिया अपने स्वतंत्रता संग्राम के समय से एक दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। हमारी मित्रता राजनीति से नहीं बल्कि संघर्ष सहयोग और आपसी विश्वास से जन्मी है। साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और उज्ज्वल भविष्य के साझा सपनों ने इसे सींचा है। भविष्य में भी हम एक दूसरे का हाथ थामे विकास पथ पर साथ-साथ आगे बढ़ते रहेंगे।”

हीरे की तरह चमकेगी हमारी साझेदारी
पीएम मोदी ने कहा, “नामीबिया दुनिया के सबसे बड़े हीरा उत्पादकों में से एक है और भारत में सबसे बड़ा हीरा पॉलिशिंग उद्योग है, वह भी मेरे गृह राज्य गुजरात में। मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में हमारी साझेदारी भी इन हीरों की तरह चमकेगी।”

पीएम मोदी और नामीबिया की राष्ट्रपति के बीच हुई अहम चर्चा
इससे पहले पीएम मोदी ने नामीबिया की राष्ट्रपति नेटुम्बो नेंडी-नदैतवा के साथ वार्ता की थी। वार्ता के दौरान डिजिटल प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई थी। प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-नामीबिया संबंधों की समीक्षा भी की। बैठक के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘डिजिटल प्रौद्योगिकी, रक्षा, सुरक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे क्षेत्रों में सहयोग हमारी चर्चा में प्रमुखता से शामिल रहा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने व्यापार, ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स के क्षेत्र में संबंधों को प्रगाढ़ करने के तरीकों पर भी चर्चा की। ‘प्रोजेक्ट चीता’ में नामीबिया की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।’’

भारत-नामीबिया ने चार समझौतों पर किए हस्ताक्षर
पीएम मोदी और नामीबिया की राष्ट्रपति नेटुम्बो नेंडी-नदैतवा की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग, नामीबिया में उद्यमिता विकास केंद्र की स्थापना, सीडीआरआई (आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन) फ्रेमवर्क और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन फ्रेमवर्क शामिल हैं। पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में ब्राजील से यहां पहुंचे मोदी ने राष्ट्रीय स्मारक ‘हीरोज एकर’ में नामीबिया के संस्थापक सैम नुजोमा को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। नुजोमा ने 1990 में नामीबिया को स्वतंत्रता दिलाई थी और 15 वर्षों तक राष्ट्रपति रहे थे। राष्ट्रपति नेंडी-नदैतवा के निमंत्रण पर यहां आए मोदी ने नामीबिया को अफ्रीका में एक ‘‘महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साझेदार’’ बताया है।

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