अक्सर देखने में आता है कि जो पार्टी सत्ता पर काबिज हो जाती है, उसमें सत्ता और सांगठनिक स्तर पर अनेक विसंगतियां पैदा हो जाती हैं। अधिकांशतः देखने में आया है कि अनेक अवसरों पर एक ही पार्टी के नुमाइंदे होने के बावजूद सत्ता और संगठन में बैठे जिम्मेदार लोग आमने-सामने होने लगते हैं। इससे साफ दिखाई देता है कि जहां सत्ता में बैठे लोग इस अहम के शिकार होते हैं कि उनके हाथ में देश का भला अथवा बड़ा करने के अधिकार सुरक्षित है। इसलिए वे हर मायने में श्रेष्ठ हैं। जबकि सांगठनिक स्तर पर कार्य कर रहे पदाधिकारियों को यह भ्रम हो जाता है कि सरकार उन्हीं के इशारे पर काम कर रही है और उनकी इच्छा के अनुरूप ही उसे प्रत्येक कार्यक्रम को संचालित करना होगा। दोनों तरफ एक समान नकारात्मक सोच होने से जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारी के बीच खींचतान शुरू हो जाती है। फल स्वरुप कई बार ऐसे बयान सामने आने लगते हैं जिनसे यह स्पष्ट हो जाता है कि सत्ता और संगठन के बीच एक ही पार्टी के लोग सामंजस्य बिठाकर काम नहीं कर पा रहे हैं । मीडिया इन परिस्थितियों का लाभ उठाने में माहिर होती है और वह अपनी टीआरपी बढ़ाने के फेर में मामलों को नमक मिर्च मिलाकर इतना बड़ा चढ़ा कर प्रस्तुत करने लगती है कि जो खींचतान एक मर्यादा के भीतर दिखाई दे रही होती है वह मीडिया के हस्तक्षेप के चलते सड़कों पर मचने लगती है। नतीजतन सत्ता पक्ष को विपक्षी आरोपों व्यंग्यों और शाब्दिक हमलों का शिकार होना पड़ता है। किंतु भारतीय जनता पार्टी और मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार की बात की जाए तो इस मामले में दोनों ने ही बेहतर सामंजस्य बनाए रखा है और विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। यह अपने आप में बहुत बड़ी बात है कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2003 से लेकर अभी तक अधिकतम समय भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बनी हुई है। यदि कमलनाथ सरकार का छोटा सा कार्यकाल अलग कर दिया जाए तो दो दशक से भी ज्यादा समय भाजपा को सरकार में हो चुका है। इसे अपवाद ही कहा जाएगा कि जब सुश्री उमा भारती का भाजपा से जाना और तत्समय ही शिवराज सिंह चौहान का मुख्यमंत्री बनना तय हुआ, तब कुछ वाद विवाद सामने आए थे। लेकिन जिस तेजी से भारतीय जनता पार्टी ने इस टूट-फूट पर पेंचवर्क शुरू किया वह काबिले तारीफ है। इससे अन्य राजनीतिक दलों को सीख लेने की आवश्यकता है। इसका कारण केवल इतना सा है कि भाजपा, उसके नेता, जनप्रतिनिधि, सब मिलकर जनहित के कार्यक्रमों पर फोकस किये रहे और वहीं विपक्ष शाब्दिक बयान बाजी में उलझा रहा। नतीजा यह निकला की मध्य प्रदेश की सरकारी पिच पर शिवराज सिंह चौहान ने बेहद लंबी पारी खेली और अब डॉक्टर मोहन यादव लगातार नए कीर्तिमान स्थापित करते चले जा रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि केवल सरकारी स्तर पर ही भाजपा बेहतर प्रदर्शन कर पा रही है। संगठन स्तर पर भी उसने अनेक कार्यक्रम बना रखे हैं और उन पर भली-भांति अमल करती दिखाई दे रही है। दूसरी तरफ अपने पहले ही कार्यकाल में डॉ मोहन यादव विकास के कार्यों को अंजाम तो दे ही रहे हैं, विपक्ष पर भी आक्रामक मुद्रा में हावी बने हुए हैं। यह वही डॉक्टर मोहन यादव हैं, जिनके बारे में कल तक विपक्ष तंज कस रहा था कि उन्हें कुछ दिन के लिए ही मुख्यमंत्री बनाया गया है। वह ज्यादा दिन तक सत्ता में नहीं बने रह सकते।बल्कि यह लगता ही नहीं की डॉक्टर मोहन यादव का यह मुख्यमंत्री होने के नाते पहला कार्यकाल ही है। वे एक बेहद मंझे हुए राजनेता और अनुभवी मुख्यमंत्री के रूप में विकास कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। तो इसका कारण भी यही है कि भाजपा ने सत्ता और संगठन के बीच बेहद सामंजस्य बना कर रखा है। यही वजह है कि चाहे मुख्यमंत्री हों, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हों, मंत्री हों, विधायक सांसद हों, सभी अपनी-अपनी पिच पर बेहद विशेषज्ञता के साथ बेहतर प्रदर्शन करने में लगे हुए हैं। उदाहरण के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव लगातार कानून व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं। विकास कार्यों को लेकर नई आधार शिलाएं रखी जा रही हैं। जबकि पुराने कार्य संपन्न होने पर उनके उद्घाटन लोकार्पण किया जा रहे हैं। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने लोकसभा क्षेत्र में पदयात्रा शुरू करके वहां के विकास कार्यों का जायजा लेने की रूपरेखा बन चुके हैं। इसी श्रृंखला में उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ के मध्य प्रदेश आगमन को लेकर पूरा सत्ता और संगठन मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में सक्रिय बना हुआ है। संभवत वहां आयोजित कृषि उद्योग समागम में राज्यपाल मंगू भाई पटेल भी शिरकत करने वाले हैं। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी विंध्य और महाकौशल में मोर्चा संभाल रखा है। उन्होंने अभी हाल ही में रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लोकार्पण अवसर पर अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा महाकौशल और बुंदेलखंड के साथ-साथ चंबल रीजन में सक्रिय बने हुए हैं। चंद नेताओं,जन प्रतिनिधियों की कार्य योजना को लेकर बानगी भर उल्लिखित की गई है। अंदर खाने देखा जाए तो भाजपा में सत्ता और सांगठनिक स्तर पर बेहद सक्रियता का बोलबाला है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेता आपसी घमासान में संलग्न हैं और शाब्दिक बयान बाजी से आगे बढ़कर कुछ बेहतर नहीं कर पा रहे हैं। इसका लाभ भविष्य में भाजपा को मिलना तय है।


