पाकिस्तान में घर जैसा महूसस होता है…सैम पित्रोदा के इस बयान पर भड़की बीजेपी, जानें क्या कहा?

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एजेंसी, नई दिल्ली | कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने केंद्र सरकार से पड़ोसी देशों के साथ बातचीत को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। पित्रोदा ने शुक्रवार को कहा कि भारत की विदेश नीति की शुरुआत पाकिस्तान सहित पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने से होनी चाहिए।

पाकिस्तान में घर जैसा महसूस होता हैः पित्रोदा
पित्रोदा ने कहा, ‘मेरे अनुसार, हमारी विदेश नीति को सबसे पहले अपने पड़ोस पर फोकस करना चाहिए। क्या हम वास्तव में अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों में पर्याप्त सुधार कर सकते हैं?… मैं पाकिस्तान गया हूं, और मैं आपको बता दूं कि मुझे वहां घर जैसा महसूस हुआ। मैं बांग्लादेश गया हूं, मैं नेपाल गया हूं, और मुझे वहां घर जैसा महसूस हुआ। मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं किसी विदेशी देश में हूं…।’

बीजेपी ने राष्ट्रीय हितों को कमजोर करने का लगाया आरोप
वहीं पित्रोदा के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है और भारत के राष्ट्रीय हितों को कमजोर करने का आरोप लगाया। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, ‘राहुल गांधी के चहेते और कांग्रेस के विदेश प्रमुख सैम पित्रोदा का कहना है कि उन्हें पाकिस्तान में ‘घर जैसा महसूस’ हुआ। कोई आश्चर्य नहीं कि यूपीए ने 26/11 के बाद भी पाकिस्तान के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। पाकिस्तान का चहेता, कांग्रेस का चुना हुआ!’ बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, मैं आप सबसे पूछना चाहता हूं कि क्या कोई देशभक्त व्यक्ति ये कह सकता है कि आतंकी मुल्क पाकिस्तान उसके लिए घर जैसा है। पर इस बात को राहुल गांधी के करीबी और जो कांग्रेस पार्टी की पूरी रणनीति निर्धारित करते हैं, वो (सैम पित्रोदा) कहते हैं कि पाकिस्तान उनके लिए घर जैसा है। कुछ दिन पहले ISI एजेंट शाहिद अफरीदी ने राहुल गांधी को अपना आदर्श माना था और उसके कुछ समय बाद ही सैम पित्रोदा पाकिस्तान का महिमामंडन करते हैं। कुछ समय पहले राहुल गांधी ने कहा था कि वो भारतीय स्टेट के खिलाफ लड़ना चाहते हैं। ये भारत की संप्रभुता और अखंडता को, भारत के वीर सैनिकों की वीरता को ये अपमानित करते हैं।

चीन पर पित्रोदा के कमेंट्स से हुआ था विवाद
इससे पहले फरवरी में, जब चीन के साथ संबंध अभी भी तनावपूर्ण थे, उन्होंने यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि भारत चीन से खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है। आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने तर्क दिया था कि नई दिल्ली को बीजिंग को दुश्मन मानना बंद कर देना चाहिए और इसके बजाय एक सहयोगात्मक नजरिया अपनाना चाहिए।

भारत-चीन संबंध पर क्या बोला था, जानें
पित्रोदा ने तब कहा था, ‘मैं चीन से खतरे को समझ नहीं पा रहा हूं। मुझे लगता है कि इस मुद्दे को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है क्योंकि अमेरिका में दुश्मन को परिभाषित करने की प्रवृत्ति है। मेरा मानना है कि अब समय आ गया है कि सभी देश आपस में सहयोग करें, न कि टकराव करें। हमारा दृष्टिकोण शुरू से ही टकराव वाला रहा है, और यही रवैया दुश्मन पैदा करता है। हमें इस मानसिकता को बदलना होगा और यह मानना बंद करना होगा कि चीन पहले दिन से ही दुश्मन है।’ पित्रोदा की यह टिप्पणी इस सवाल के जवाब में आई कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन पर लगाम लगा सकते हैं। उस समय, भारत ने चीन के साथ सीमा विवाद में मध्यस्थता करने के ट्रंप के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया था।

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