एजेंसी, नीमच। नीमच जिले की जावद तहसील में शिकारियों द्वारा तीन वर्षीय नर तेंदुए की कुल्हाड़ी से हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि वन विभाग ने घटना को चार दिनों तक छिपाने का प्रयास किया और मीडिया को भ्रामक जानकारी दी। मामले में अब तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। घटना 4 जनवरी की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार जावद तहसील के जनकपुर निवासी देवीलाल, अंबालाल और सुनील ने जंगली सूअर के शिकार के लिए जंगल क्षेत्र में फंदा लगाया था। दुर्भाग्यवश इस फंदे में एक नर तेंदुआ फंस गया। आरोपियों ने तेंदुए को कुल्हाड़ी से मारकर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
भोजपुर नाले के पास फेंका शव
हत्या के बाद आरोपियों ने तेंदुए के शव को मनासा तहसील की बीट बैसदा क्षेत्र अंतर्गत भोजपुर नाले (ग्राम पंचायत पलासिया) के समीप फेंक दिया। 7 जनवरी को वन मंडल अधिकारी एस.के. अटोदे के निर्देश पर वन विभाग द्वारा प्रेस नोट जारी किया गया, जिसमें दावा किया गया कि 5 जनवरी को बैसदा क्षेत्र में मिले तेंदुए की मौत प्राकृतिक थी और शिकार के कोई साक्ष्य नहीं मिले।
ग्रामीणों की गवाही से खुला राज
वन विभाग का यह दावा उस समय गलत साबित हुआ, जब स्थानीय ग्रामीणों, सरपंच एवं सचिव ने घटना की वास्तविकता उजागर की। मीडिया द्वारा उपवन मंडल अधिकारी प्रदीप कछावा से सवाल पूछे जाने के बाद विभाग को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी और यह मानना पड़ा कि तेंदुए की मौत शिकार के कारण हुई है। इसके बाद वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों देवीलाल, अंबालाल और सुनील को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
जांच की मांग तेज
घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में शुरुआत में सच्चाई क्यों छिपाई गई। अब कथित रूप से मामला दबाने में शामिल रहे वन मंडल अधिकारी एस.के. अटोदे, पोस्टमार्टम करने वाले विशेषज्ञ डॉ. जीवन नाथ, डॉ. भूपेश पाटीदार तथा संबंधित क्षेत्र के लापरवाह कर्मचारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
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