एजेंसी, दक्षिण 24 परगना। निर्वाचन सदन का अभूतपूर्व निर्णय : पूर्वी भारत के राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील प्रांतीय राज्य पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जनपद के अंतर्गत आने वाले फलता विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ी एक बहुत बड़ी और कानून व्यवस्था से संबंधित प्रशासनिक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग ने उक्त विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर हुई गंभीर अनियमितताओं, अवैध गतिविधियों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के हनन की शिकायतों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए एक बहुत बड़ा और कड़ा दंडात्मक निर्णय लिया है। स्वायत्त संवैधानिक संस्था ने फलता विधानसभा क्षेत्र में विगत अप्रैल महीने की उनतीस तारीख को संपन्न हुए संपूर्ण मतदान को पूरी तरह से अवैध घोषित करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इसके साथ ही, आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता बहाल करने के उद्देश्य से एक सर्वथा नया कार्यक्रम जारी किया है, जिसके अंतर्गत इस विशिष्ट विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाले सभी मतदान केंद्रों पर आगामी इक्कीस मई को नए सिरे से शत-प्रतिशत मतदान संपन्न कराया जाएगा। इस विशेष पुनर्मतदान के पश्चात इस सीट के भाग्य का फैसला करने के लिए चौबीस मई की तिथि निर्धारित की गई है, जिस दिन मतों की गणना का कार्य संपन्न होगा। राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए विस्तृत आधिकारिक विज्ञप्ति में बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि वर्ष दो हजार छब्बीस के अप्रैल मास की उनतीस तारीख को जब फलता विधानसभा क्षेत्र में द्वितीय चरण के तहत वोट डाले जा रहे थे, तब वहां के अनेक मतदान केंद्रों पर व्यापक स्तर पर गंभीर चुनावी अपराध घटित हुए थे और असामाजिक तत्वों द्वारा लोकतांत्रिक शासन प्रणाली एवं निष्पक्ष मतदान की व्यवस्था में सीधे तौर पर अनुचित हस्तक्षेप किया गया था। इस गंभीर जांच रिपोर्ट के दृष्टिगत आयोग ने यह कड़ा कदम उठाते हुए मुख्य एवं सहायक केंद्रों सहित सभी दो सौ पचासी मतदान केंद्रों पर पूरी मतदान प्रक्रिया को दोबारा आयोजित करने का निर्देश दिया है। नए कार्यक्रम के अनुसार इक्कीस मई को प्रातः सात बजे से लेकर सायं छह बजे तक मतदाता पुनः अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।
Repoll On Falta Seat: गड़बड़ियां पाए जाने पर पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट का चुनाव रद्द, अब इस तारीख को होगी वोटिंग https://t.co/Crt1m22iud
— Newsroompost (@NewsroomPostCom) May 2, 2026
मतदान के दिन सामने आई थीं तकनीकी छेड़छाड़ और व्यापक धांधली की शिकायतें
इस पूरे प्रशासनिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालें तो ज्ञात होता है कि पश्चिम बंगाल की सभी दो सौ चौरानवे विधानसभा सीटों पर मुख्य रूप से दो पृथक चरणों में क्रमशः तेईस अप्रैल और उनतीस अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया पूरी की गई थी। उनतीस अप्रैल को जब दूसरे और अंतिम चरण का मतदान चल रहा था, ठीक उसी समय फलता विधानसभा क्षेत्र के अनेक केंद्रों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन अर्थात मतदान यंत्रों के साथ अवैध रूप से छेड़छाड़ किए जाने, उनके बटनों पर टेप चिपकाकर मतदाताओं को भ्रमित करने तथा डराने-धमकाने की अत्यंत संगीन शिकायतें विद्युत गति से सामने आई थीं। इन संवेदनशील सूचनाओं के प्राप्त होते ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच के आदेश जारी कर दिए थे। जांच दल द्वारा सौंपी गई विस्तृत और प्रामाणिक रिपोर्ट की गहन समीक्षा करने के पश्चात ही आयोग ने इस निष्कर्ष पर पहुंचकर फलता क्षेत्र के मतदान को पूरी तरह से शून्य घोषित करने का यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस विशिष्ट आदेश के कारण अब एक अत्यंत अनोखी स्थिति उत्पन्न हो गई है; प्रदेश की शेष सभी सीटों के लिए पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चार मई को ही मतों की गणना की जाएगी, परंतु फलता विधानसभा सीट के मतों की गिनती उस दिन नहीं होगी। चार मई को राज्य की दो सौ तिरानवे सीटों के परिणाम तो घोषित कर दिए जाएंगे, किंतु फलता सीट के भाग्य का अंतिम फैसला पुनर्मतदान के बाद ही संभव हो सकेगा। इससे पूर्व शुक्रवार को भी आयोग ने इसी जनपद के दो अन्य क्षेत्रों, डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम के कुल पंद्रह चिन्हित केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया था, परंतु फलता सीट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, जिस पर शनिवार की सायं अंतिम निर्णय ले लिया गया।
राजनीतिक खींचतान और प्रशासनिक पर्यवेक्षकों की गहन जांच प्रक्रिया
फलता विधानसभा क्षेत्र संपूर्ण चुनावी समर के दौरान लगातार समाचारों की सुर्खियों में बना रहा था। मतदान की तिथि से पूर्व ही दक्षिण 24 परगना जनपद के अंतर्गत प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक नेतृत्व के बीच एक तीखा टकराव देखने को मिल रहा था। विशेष रूप से डायमंड हार्बर पुलिस जिले के वरिष्ठ पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा और फलता क्षेत्र से सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी जहांगीर खान के मध्य एक प्रकार का शीत युद्ध निरंतर जारी था। मतदान के दिन जब ईवीएम यंत्रों से छेड़छाड़ की बातें सार्वजनिक हुईं, तो विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा तुरंत ही केंद्रीय आयोग के समक्ष लिखित आपत्तियां दर्ज कराते हुए दोबारा चुनाव कराने की पुरजोर मांग की गई थी। राष्ट्रीय निकाय ने किसी भी केंद्र पर पुनर्मतदान का आदेश देने से पहले पूरी सत्यता की जांच करने की नीति अपनाई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सीधे दिशानिर्देशन में आयोग द्वारा प्रतिनियुक्त किए गए विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता ने स्वयं फलता, मगराहाट और डायमंड हार्बर सहित दक्षिण 24 परगना के तमाम प्रभावित अंचलों का सघन दौरा किया और स्क्रूटनी अर्थात मतदान से जुड़े दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच की। इस जमीनी छानबीन के पश्चात विशेष पर्यवेक्षक द्वारा केंद्रीय मुख्यालय को एक अत्यंत गोपनीय और विस्तृत रिपोर्ट प्रेषित की गई, जिसे आधार बनाकर ही शनिवार को यह बड़ा फैसला सुनाया गया।
क्षेत्र में निरंतर बढ़ता तनाव, हिंसक झड़पें और कानून व्यवस्था की स्थिति
मतदान की प्रक्रिया समाप्त हो जाने के बाद भी फलता और उसके आस-पास के क्षेत्रों में राजनीतिक तनाव पूरी तरह से चरम पर बना हुआ है। इस अशांति की शुरुआत शुक्रवार को उस समय हुई जब फलता के हाशिमनगर क्षेत्र में एक विशिष्ट राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट किए जाने की घटना सामने आई, जिसने स्थानीय माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया। शनिवार को भी स्थिति उस समय और अधिक बिगड़ गई जब हाशिमनगर के स्थानीय निवासियों और कुछ कार्यकर्ताओं के एक बड़े समूह ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष यह गंभीर आरोप लगाया कि उन्हें जबरन मतदान करने से रोका गया था और जब उन्होंने इस दमनकारी नीति का विरोध करने का प्रयास किया, तो स्थानीय पंचायत प्रधान के नेतृत्व में आए कुछ हिंसक लोगों ने उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प के विरोध में आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने लगातार दो दिनों तक राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह से अवरुद्ध रखा, जिससे यातायात व्यवस्था ठप हो गई। प्रदर्शन कर रहे नागरिकों की मुख्य मांग थी कि क्षेत्र में पूरी तरह से केंद्रीय बलों की निगरानी में दोबारा निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं और डराने-धमकाने वाले नेताओं को तत्काल बंदी बनाया जाए। इस गंभीर कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए अपराधियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके अंतर्गत इसराफुल और सुजाद्दीन शेख सहित तीन मुख्य आरोपियों को पुलिस ने तत्काल प्रभाव से कारागार भेज दिया है।
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