एजेंसी, नई दिल्ली। नये साल 2026 का आगाज होने वाला है। ऐसे में एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है। इस मौके पर कोई हिंदी में शुभकामना संदेश भेजता है तो कोई अंग्रेजी में। इसके अलावा आज के दौर में संस्कृत में शुभकामनाएं भेजने का चलन भी काफी ज्यादा बढ़ गया है। अगर आप भी अपने प्रियजनों को नए साल की मुबारक संस्कृत में कहना चाहते हैं या फिर इस मौके पर खास मंत्र या श्लोक भेजना चाहते हैं तो बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। यहां आप देखेंगे नव वर्ष की शुभकामनाओं से जुड़े संस्कृत मैसेज।
(हैप्पी न्यू ईयर 2026 शुभकामनाएं संस्कृत में)
1. आशासे यत् नववर्षं भवतु मङ्गलकरम् अद्भुतकरञ्च।
जीवनस्य सकलकामनासिद्धिरस्तु।
भावार्थः मुझे उम्मीद है कि नया साल आपके लिए एक सुखद आश्चर्य लेकर आएगा। आप जीवन में जो कुछ भी चाहते हैं, वह आपको मिले।
2. आशासे त्वज्जीवने नवं वर्षम् अत्युत्तमं शुभप्रदं स्वप्नसाकारकृत् कामधुग्भवतु।
भावार्थः मुझे उम्मीद है कि नया साल आपके जीवन का सबसे अच्छा साल होगा। आपके सभी सपने सच हों और आपकी सभी आशाएँ पूरी हों।
3. अत्यद्भुतं ते भवतु अग्रिमं वर्षम्।
भावार्थः आने वाला साल आपके लिए अच्छा हो! नववर्ष की शुभकामनाएं।
4. नववर्षम्, शुभं भवतु नववर्षम्,
सौख्यमयं निरामयं वितरतु परमं हर्षम्।
शुभं भवतु नववर्षम्, नववर्षम्, नववर्षम्।।
5. स्वास्थ्यं नववर्षस्य दानं भवतु, ऊर्जा शक्ति च प्रदान करु ।
6. सौभाग्यं आगच्छतु नववर्षं, शुभ घटना च अनुभव करु ।
7. एकता भवतु नववर्षे, सर्वे एकं भवतु समाजं ।
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(नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं 2026 संस्कृत में)
1. वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं
2. श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा।
नववर्ष 2026 में भगवान कृष्ण आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें।
3. ॐ राम रामाय नमः।
आपके लिए नव वर्ष मंगलमय हो
नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं
4. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं, भगवान शिव की कृपा आप पर बनी रहे
5. ॐ गण गणपतये नमः
नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं
6. ॐ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्
आपके लिए नव वर्ष 2026 मंगलमय हो
(नव वर्ष 2026 की शुभकामनाएं श्लोक के जरिए ऐसे दें)
1. धर्म-धर्मादर्थः प्रभवति धर्मात्प्रभवते सुखम् । धर्मण लभते सर्वं धर्मप्रसारमिदं जगत् ॥
भावार्थ : धर्म से ही धन, सुख तथा सब कुछ प्राप्त होता है। इस संसार में धर्म ही सार वस्तु है। नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाएं
2. योगस्थः कुरु कर्माणि संगं त्यक्त्वा धनंजय
भावार्थ : तुम योग में स्थिर रहो। तुम केवल अपना कर्तव्य करते रहो एवं सफलता या असफलता जैसे सभी भावों को त्याग दो। मन की इसी समता को योग कहा जाता है। नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाएं
3. न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते |
तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति ||
भावार्थ : इस सम्पूर्ण संसार में ज्ञान की भांति पवित्र करने वाली अन्य कोई वस्तु नहीं है। जिसने योग में पूर्णता प्राप्त कर ली है। वह समय से साथ ही इसे अपने भीतर पा लेता है।


