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ट्रम्प सरकार में मची भारी उथल-पुथल : 24 घंटे के भीतर सेना प्रमुख और अटॉर्नी जनरल की छुट्टी, काश पटेल और तुलसी गबार्ड पर भी गिर सकती है गाज

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एजेंसी, वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका की ट्रम्प सरकार की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को पद से हटाए जाने के बाद अब ट्रम्प प्रशासन में कई अन्य उच्चाधिकारियों की विदाई की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अगला नंबर एफबीआई प्रमुख काश पटेल और नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड का हो सकता है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को तत्काल प्रभाव से रिटायर होने का फरमान सुना दिया है। व्हाइट हाउस के सूत्रों का कहना है कि अभी कई और नामों पर विचार चल रहा है, जिनमें आर्मी सेक्रेटरी डेनियल ड्रिस्कॉल और लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डीरेमर के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। गौरतलब है कि ईरान के साथ युद्ध के बाद ट्रम्प की लोकप्रियता में आई कमी को इन बड़े प्रशासनिक बदलावों की मुख्य वजह माना जा रहा है।

प्रशासनिक फेरबदल की गाज सबसे पहले होमलैंड सिक्योरिटी चीफ क्रिस्टी नोएम पर गिरी। उन्हें हटाए जाने के पीछे हालांकि कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन लंबे समय से उनके कामकाज के तरीके और राजनीतिक बयानबाजी पर सवाल उठ रहे थे। उन पर आरोप थे कि वे देश की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों के बजाय राजनीति पर अधिक ध्यान दे रही थीं। वहीं अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को हटाए जाने के पीछे बहुचर्चित एपस्टीन मामले को ठीक से न संभाल पाने को बड़ी वजह माना जा रहा है। बॉन्डी पर आरोप है कि उन्होंने इस संवेदनशील मामले की फाइलों को जिस तरह सार्वजनिक किया, उससे कोई नया खुलासा होने के बजाय सरकार की ही किरकिरी हुई और राष्ट्रपति को खुद इस पर बिल साइन करना पड़ा।

सैन्य मोर्चे पर भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को उनके कार्यकाल की समाप्ति से एक साल पहले ही जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया है। उनकी जगह जनरल क्रिस्टोफर ला नेव को कार्यवाहक जिम्मेदारी सौंपी गई है। रक्षा विभाग का कहना है कि यह सेना के शीर्ष स्तर पर एक नई टीम बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। दरअसल, रैंडी जॉर्ज की नियुक्ति पिछली सरकार के दौरान हुई थी और वर्तमान प्रशासन अब अपने भरोसेमंद चेहरों को आगे लाना चाह रहा है।

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सबसे ज्यादा चर्चा एफबीआई चीफ काश पटेल को लेकर हो रही है, जिन पर पद के दुरुपयोग और सरकारी धन की बर्बादी के गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने एफबीआई के सरकारी विमानों का इस्तेमाल निजी दौरों और खेल देखने के लिए किया। साथ ही अपनी महिला मित्र को विशेष सुरक्षा देने के लिए सरकारी संसाधनों का गलत इस्तेमाल किया। इसके अतिरिक्त, एफबीआई से उन अधिकारियों को हटाने के फैसले ने भी विवाद खड़ा कर दिया है जो ट्रम्प से जुड़े मामलों की जांच कर रहे थे। कुछ बर्खास्त एजेंटों ने इस मामले को अदालत तक पहुंचा दिया है।

दूसरी ओर, नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड का भविष्य भी अधर में नजर आ रहा है। गबार्ड ने हाल ही में ईरान युद्ध के विरोध में इस्तीफा देने वाले एक अधिकारी का बचाव किया था, जिससे राष्ट्रपति नाराज बताए जा रहे हैं। गबार्ड ने सीनेट में ट्रम्प के उन दावों का भी विरोध किया था जिनमें ईरान की परमाणु क्षमता बढ़ने की बात कही गई थी। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से गबार्ड के बयानों को गलत बताया था और अब वे उन्हें बदलने की संभावनाओं पर अपने मंत्रियों से चर्चा कर रहे हैं। इन घटनाक्रमों से साफ है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर इस वक्त भारी अस्थिरता का माहौल है।

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