एजेंसी, नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने सांप के जहर से जुड़े चर्चित मामले में यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा साल 2023 में वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत की गई इस कार्यवाही को रद्द करते हुए न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने साफ किया कि यह मामला कानून के मानकों पर टिकने योग्य नहीं है। अदालत ने पाया कि वन्य जीव अधिनियम के तहत जिस व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी, वह कानूनन इसके लिए अधिकृत नहीं था।
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अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि यादव पर लगाए गए कई आरोप गुरुग्राम में पहले से दर्ज एक अन्य मामले पर आधारित थे, जिसमें पुलिस पहले ही अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश कर चुकी है। इसके अलावा, नशीले पदार्थों से संबंधित धाराओं के प्रयोग पर पीठ ने कहा कि जो तरल पदार्थ बरामद हुआ था, वह प्रतिबंधित पदार्थों की सूची में शामिल नहीं है, इसलिए वे धाराएं इस मामले में लागू नहीं होतीं। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा जारी किए गए सभी आदेशों और पुलिस द्वारा दाखिल आरोप पत्र को भी अमान्य घोषित कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि नवंबर 2023 में दर्ज हुए इस मामले में एल्विश यादव को मार्च 2024 में नोएडा पुलिस ने एक महफिल में सांपों के जहर के कथित उपयोग के आरोप में गिरफ्तार किया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पहले इस मामले को गंभीर बताते हुए कार्यवाही रद्द करने से मना कर दिया था, जिसे यादव ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बीते साल अगस्त में ही शीर्ष अदालत ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और अब अंतिम सुनवाई में उन्हें पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है।


