एजेंसी, वाशिंगटन, नई दिल्ली। 30 जुलाई 2025 को, ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के साथ पेट्रोलियम व्यापार के कारण 6 भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है. भारतीय कंपनियों के अलावा 13 अन्य कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. अमेरिका का दावा है कि ईरान की सरकार इस व्यापार से मिले राजस्व का इस्तेमाल मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ाने और आतंकवाद को फंडिंग करने के लिए करती है.
क्यों लगे प्रतिबंध?
बुधवार को अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट यानी विदेश मंत्रालय इन कंपनियों पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए कहा कि “ईरानी शासन अपनी अस्थिर गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए मिडिल ईस्ट में संघर्ष को बढ़ावा दे रहा है. आज, संयुक्त राज्य अमेरिका राजस्व के प्रवाह को रोकने के लिए कार्रवाई कर रहा है, जिसका उपयोग शासन विदेशों में आतंकवाद का समर्थन करने के साथ-साथ अपने ही लोगों पर अत्याचार करने के लिए करता है.”
इन 6 भारतीय कंपनियों पर ट्रंप ने कसा शिकंजा
ट्रंप प्रशासन ने जिन 6 भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है उसमें कंचन पॉलिमर, परसिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड, रमणिकलाल एस गोसलिया एंड कंपनी, ज्यूपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड, ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड और अलकेमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल है. ये पेट्रोकेमिकल सेक्टर की कंपनियां हैं, जो ईरान से कच्चा तेल का व्यापार करती है.
कंपनी का नाम सेक्टर / उद्योग
कंचन पॉलिमर पेट्रोकेमिकल
परसिस्टेंट पेट्रोकेम प्राइवेट लिमिटेड पेट्रोकेमिकल
रमणिकलाल एस गोसलिया एंड कंपनी पेट्रोकेमिकल / केमिकल ट्रेडिंग
ज्यूपिटर डाई केम प्राइवेट लिमिटेड केमिकल / डाई इंटरमीडिएट्स
ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स लिमिटेड इंडस्ट्रियल केमिकल्स
अलकेमिकल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड केमिकल सॉल्यूशंस
क्या हैं आरोप?
कंचन पॉलिमर्स – अमेरिकी प्रशासन की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि कंचन पॉलिमर्स ने ईरान से पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट का ट्रेड किया है. भारत की इस कंपनी ने ईरान से 13 लाख अमेरिकी डॉलर का व्यापार किया है.
अलकेमिकल सॉल्यूशंस – इसने जनवरी और दिसंबर 2024 के बीच कई कंपनियों से 84 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के ईरानी पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट का ट्रेड किया है.
रमणिकलाल एस गोसलिया एंड कंपनी – कंपनी ने जनवरी 2024 और जनवरी 2025 के बीच कई कंपनियों से मेथनॉल और टोल्यूनि सहित 22 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात और खरीद की है.
जुपिटर डाई केम – जुपिटर डाई केम ने जनवरी 2024 और जनवरी 2025 के बीच कई कंपनियों से 49 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के टोल्यूनि सहित ईरानी मूल के पेट्रोकेमिकल उत्पादों का आयात और खरीद की है.
ग्लोबल इंडस्ट्रियल केमिकल्स – इसने जुलाई 2024 और जनवरी 2025 के बीच कई कंपनियों से 51 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के मेथनॉल सहित अन्य पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट का आयात और खरीद किया है.
परसिस्टेंट पेट्रोकेम – परसिस्टेंट पेट्रोकेम पर आरोप है कि इसने अक्टूबर 2024 और दिसंबर 2024 के बीच ईरानी कंपनियों से लगभग 14 मिलियन डॉलर मूल्य के शिपमेंट का आयात किया है.
प्रतिबंधित कंपनियां के पास क्या विकल्प?
अमेरिकी सरकार का कहना है कि वह एसडीएन सूची से लोगों को हटाने के लिए तैयार है, बशर्ते यह कानून के अनुसार हो. उनका मकसद सजा देना नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाना है. कंपनियां इस प्रतिबंध को हटाने के लिए याचिका ओएफएसी को भेज सकती है. साथ ही इस ईमेल का इस्तेमाल करके प्रतिबंध हटाने की अपील कर सकती है.


