एजेंसी, भोपाल। जलूद सौर ऊर्जा संयंत्र एक राष्ट्रीय गौरव : मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के जलूद में विकास और पर्यावरण संरक्षण के एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 271 करोड़ रुपये के भारी निवेश से नवनिर्मित 60 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गौरवपूर्ण ढंग से उल्लेख किया कि यह परियोजना न केवल मध्यप्रदेश बल्कि संपूर्ण भारत के लिए एक पथ-प्रदर्शक उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल और जनभागीदारी (ग्रीन बॉन्ड) के अद्भुत समन्वय से निर्मित यह देश का प्रथम सौर ऊर्जा संयंत्र है, जो राष्ट्र के नवाचार की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
आज जलूद, खरगोन में ₹271 करोड़ से अधिक की लागत से निर्मित 60 मेगावॉट क्षमता के सोलर पावर प्लांट का लोकार्पण किया।
जलूद सोलर प्लांट एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि है। इंदौर नगर निगम देश का प्रथम नगरीय निकाय है, जिसने केंद्र सरकार की ‘ग्रीन बॉन्ड’ व्यवस्था के माध्यम से फंड जुटाकर इस… pic.twitter.com/GocV1nXRlw
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 29, 2026
जलूद सौर ऊर्जा संयंत्र की विशिष्टताएं और आर्थिक लाभ
इस सौर परियोजना को आधुनिक तकनीकी मानकों के अनुरूप 271 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है, जो निरंतर 60 मेगावाट विद्युत का उत्पादन करने में सक्षम है। इस संयंत्र की सबसे अनूठी विशेषता इसकी वित्त पोषण प्रणाली है। यह देश का पहला ऐसा नगरीय निकाय प्रोजेक्ट है, जिसे ‘ग्रीन बॉन्ड’ के माध्यम से जनता के निवेश से साकार किया गया है। इस योजना में निवेश करने वाले नागरिकों को लगभग 8 प्रतिशत लाभ प्रदान करने का प्रावधान रखा गया है। इंदौर के महापौर ने इस संबंध में जानकारी दी कि इस परियोजना में भारत के 28 राज्यों के नागरिकों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई है, जो इसकी राष्ट्रीय स्वीकार्यता का प्रमाण है।
इंदौर की जलापूर्ति और पर्यावरण संरक्षण का संगम
जलूद संयंत्र से उत्पादित होने वाली ऊर्जा का सीधा लाभ इंदौर के नागरिकों को प्राप्त होगा। इस बिजली का प्राथमिक उपयोग इंदौर नगर निगम द्वारा नर्मदा नदी के जल को पंप करके शहर तक लाने के लिए किया जाएगा। इससे न केवल पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी, बल्कि नगर निगम के विद्युत व्यय में भी भारी बचत होगी। पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी यह संयंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। जल संसाधन मंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे ‘ग्रीन एनर्जी हब’ की स्थापना की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम बताया है।
सांस्कृतिक पुनरुत्थान और किसान कल्याण पर बल
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उज्जैन की सफलता के पश्चात अब वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में भी ‘वैदिक घड़ी’ की स्थापना की गई है, जिसका हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा अवलोकन किया गया। शासन की योजना अब देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में इस प्राचीन काल गणना यंत्र को स्थापित करने की है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने देवी अहिल्या बाई होल्कर के नारी सशक्तिकरण में योगदान को याद किया और किसानों के हित में गेहूं के समर्थन मूल्य पर 400 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की घोषणा कर सरकार की कृषि प्रधान नीतियों को रेखांकित किया।
जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति और जनभागीदारी का संदेश
लोकार्पण समारोह में राज्यसभा सदस्य सुमेर सिंह सोलंकी, क्षेत्रीय विधायक ऊषा ठाकुर और रमेश मेंदोला सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर आया कि मध्यप्रदेश अब नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। जनभागीदारी से बने इस मॉडल ने सिद्ध कर दिया है कि जब सरकार और जनता साथ मिलकर प्रयास करते हैं, तो जलूद जैसे विशाल और लाभकारी प्रोजेक्ट्स का निर्माण संभव हो पाता है। यह सौर ऊर्जा संयंत्र आने वाले समय में देश के अन्य नगर निकायों के लिए एक आदर्श उदाहरण के रूप में कार्य करेगा।
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