
खुद को संविधान के ऊपर रखने या फिर स्थापित बनाए रखने की विपक्षी जिद ने लोकसभा से लेकर विधानसभाओं तक और फिर सड़कों पर अराजकता का माहौल फैलाने का वातावरण बना रखा है। नतीजा यह है कि खुद को जनसेवक कहने वाले नेताओं का एक वर्ग अपनी करतूतों की वजह से आदमी की नजरों में गिरता जा रहा है। जी हां यहां बात इंडी गठबंधन की हो रही है । जैसा कि सर्व विदित है कि इस बार फिर से एक बिल्कुल झूठे मुद्दे को आधार बनाकर घमंडियां गठबंधन के घटकों द्वारा संसद में अराजकता का माहौल बनाने का असफल प्रयास किया। जनता द्वारा चुने गए जन प्रतिनिधियों के साथ मारपीट धक्का मुक्की और बदजुबानी की गई। जब ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात आई तो संसद से लेकर सड़क तक आंदोलन, जिसे सही मायने में उपद्रव कहा जाना सही रहेगा, खड़ा करने की बात की जा रही है। अफसोस इस बात का है कि जो अपने को देश का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति और वक्ता समझते हैं वहीं इन नाजायज हरकतों का नेतृत्व कर रहे हैं। यह सब देखकर आश्चर्य भले ना होता हो लेकिन अफसोस आवश्यक होता है। आश्चर्य इसलिए नहीं होता की जिन लोगों के इशारे पर यह सब हो रहा है वह पहले भी संसद में अपने सांसद मित्रों को आंख मारने, प्रधानमंत्री के जबरदस्ती गले पड़ने और एक कालखंड में अपनी ही पार्टी के प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत अध्यादेश की प्रति फाड़ने का निंदनीय कृत्यां कर चुके हैं। हां अफसोस इसलिए होता है क्योंकि जब मतदाता जनप्रतिनिधियों को चुनती है तो उनसे उम्मीद करती है कि वह जब विभिन्न संवैधानिक सदनों में पहुंचेंगे तो वहां जनता के हित की बात करेंगे। लेकिन देखने में ही आ रहा है कि तैयारियों अभाव में विपक्ष बहस करने की वजाय हुड़दंग पर उतारू हो जाता है और फिर आरोप यह लगाए जाते हैं की सत्ता पक्ष सहयोगात्मक व्यवहार नहीं कर रहा है। जबकि ऐसा नहीं है। संसद से लेकर विभिन्न विधानसभाओं तक यही देखने को मिल रहा है, कांग्रेस समेत घमंडीया गठबंधन के अधिकांश दल केवल इस बात पर हाय तौबा मचाते देखे जाते हैं कि फलां नेता ने हमारे नेता के बारे में यह कह दिया वह कह दिया। विकास की बात तो उनके द्वारा की ही नहीं जाती। यदि की जाती है तो इसकी आड़ में भी समाज को जात-पांत के नाम पर तोड़ने के ताने-बाने रचे जाते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। किंतु यह सही कारण नहीं है। इसके पीछे की सोच बेहद खतरनाक है। दरअसल राहुल गांधी जैसे अपरिपक्व सोच वाले नेता खुद को देश और संविधान से ऊपर रखकर चलते हैं और सरकार तथा जनता से भी यह उम्मीद करते हैं कि उनके साथ अति विशिष्ट व्यवहार किया जाए। यह इसलिए दावा किया जा रहा है क्योंकि राहुल गांधी वह पाप भी कर चुके हैं, जिसे कोई भी देशवासी मान्यता नहीं दे सकता। हमने अभी हाल में देखा एक गरिमामय में कार्यक्रम में देश की राष्ट्रपति महा महिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू मौजूद थीं। तब भी राहुल गांधी अपनी कुर्सी पर बैठे हुए थे। हद तो यह थी कि उस समय राष्ट्रपति महोदय खड़ी हुई थीं । इसके अलावा भी उनके द्वारा जिस तरह के कृत्य किए जाते रहे हैं उनका वर्णन संक्षिप्त में ऊपर किया जा चुका है ।
कुल मिलाकर विपक्ष से यह उम्मीद नहीं की जा सकती । क्योंकि आज जो भारतीय जनता पार्टी लगातार केंद्र और विभिन्न राज्यों में सरकारें गठित करती चली जा रही है । उसे लंबे समय तक देश ने विपक्ष के रूप में देखा है। लेकिन उसके संघर्ष शील यात्रा और जनहित के मुद्दे उठाए जाने के कारण अब देशवासी भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास करने लग गए हैं। जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को जब-जब मौका मिला तब तब जात-पात के नाम पर समाज को तोड़ा गया। देश पर इमरजेंसी थोपी गई और दलितों आदिवासियों पिछड़ों का शोषण किया गया। तानाशाह पूर्ण शासन करना अब कांग्रेस की रक्त वाहनियों में रच बस गया है । क्योंकि अब वह सत्ता में नहीं है और अपनी मनमानी नहीं कर पा रही है तो फिर उसने सदन से लेकर सड़कों तक दंगे उपद्रव खड़े करने की मंशा पर काम करना शुरू कर दिया है। लेकिन देश की जानता ना तो अनपढ़ है और ना ही अपरिपक्व । सब कुछ ध्यान से देख रही है। जैसे उसने अभी तक बेहद सूझबूझ के साथ मतदाता के रूप में बेहतरीन निर्णय सुनाये हैं वह आगे भी सुनाती रहेगी। फिर भले ही तानाशाह विपक्ष सरकार पर उंगली उठाता रहे या फिर सरकार द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों को लेकर अपना माथा पीटता रहे।


