एजेंसी, भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर जेलों में बंद कैदियों के लिए एक बड़ा और मानवीय निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, 14 अप्रैल को प्रदेश की विभिन्न जेलों से आजीवन कारावास की सजा काट रहे जेलों से रिहा होंगे 87 बंदी । इसके अलावा, सात अन्य ऐसे कैदी जो आजीवन कारावास की श्रेणी में नहीं आते, उनकी सजा में भी विशेष छूट देने का फैसला किया गया है।
अच्छे आचरण का मिला इनाम
सरकार के नियमों के अनुसार, जेल में रहते हुए जिन कैदियों का व्यवहार अनुशासित और सकारात्मक रहता है, उन्हें साल में पांच विशेष अवसरों पर रिहाई या सजा में छूट का लाभ दिया जाता है। इन अवसरों में गणतंत्र दिवस, अंबेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस, गांधी जयंती और राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस शामिल हैं। विभाग का मानना है कि इस तरह के फैसलों से कैदियों के बीच जेल के भीतर अच्छा आचरण बनाए रखने की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और जेल प्रशासन को व्यवस्था संभालने में मदद मिलती है।
पुनर्वास और जेलों में बढ़ती भीड़ से मिलेगी राहत
गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सजा में छूट और समय पूर्व रिहाई का उद्देश्य केवल सजा कम करना नहीं, बल्कि अपराधियों को मुख्यधारा में वापस लाना है। इससे कैदियों को समाज में फिर से बसने और नया जीवन शुरू करने में आसानी होती है। इसके साथ ही, इस प्रक्रिया से प्रदेश की जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या (ओवरक्राउडिंग) के दबाव को कम करने में भी मदद मिलती है।
नियमित अंतराल पर हो रही है रिहाई
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार इस नीति का कड़ाई से पालन कर रही है। इससे पहले इसी साल 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मौके पर भी प्रदेश की जेलों से 94 कैदियों को उनकी सजा पूरी होने से पहले रिहा किया गया था। अब 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के पावन पर्व पर 87 और परिवारों के घर खुशियां लौटेंगी, जब उनके परिजन जेल से आजाद होकर अपने घर पहुंचेंगे। सरकार का यह कदम जेल सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
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