एजेंसी, चंडीगढ़। पंजाब की सियासत में बुधवार को उस समय बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व दिग्गज नेता एचएस फूलका भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ गए। 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले फूलका का भाजपा में आना पार्टी के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम से राज्य के सियासी समीकरण बदल सकते हैं। फूलका ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, मंज़िंदर सिंह सिरसा, तरुण चुघ और पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
VIDEO | Senior advocate HS Phoolka joins BJP in the presence of Union Minister Hardeep Singh Puri, Punjab BJP president Sunil Jakhar, Delhi BJP chief Virendra Sachdeva and party leader Tarun Chugh.
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— Press Trust of India (@PTI_News) April 1, 2026
इस मौके पर फूलका का स्वागत करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि उनके आने से पंजाब में पार्टी के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी और न्याय की लड़ाई को बल मिलेगा। वहीं फूलका ने भाजपा में शामिल होने की वजह बताते हुए कहा कि 1984 के दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के संघर्ष में भाजपा ने हमेशा उनका साथ दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि पीएम ने निजी तौर पर सिख मुद्दों में दिलचस्पी दिखाई है और उनके काम को सराहा है। फूलका ने याद किया कि मदन लाल खुराना और सुषमा स्वराज जैसे नेताओं ने भी इस मुद्दे को अपनी लड़ाई की तरह लड़ा था।
अपनी पुरानी पार्टी आम आदमी पार्टी पर हमला बोलते हुए फूलका ने कहा कि साल 2014 में भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल देखकर उन्हें लगा था कि यह पार्टी देश बदल देगी, लेकिन अंदर जाने के बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ‘आप’ के साथ जुड़ना उनकी एक भूल थी। पंजाब की वर्तमान स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य इस वक्त कानून-व्यवस्था, नशाखोरी, जबरन वसूली और कृषि संकट जैसे गंभीर दौर से गुजर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि पंजाब को इन मुश्किलों से सिर्फ भाजपा ही बाहर निकाल सकती है।
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एचएस फूलका के राजनीतिक सफर की बात करें तो उन्होंने 2014 में लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2017 में उन्होंने दाखा विधानसभा सीट से जीत हासिल की और कुछ समय तक पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। लेकिन दंगों के केसों की पैरवी के लिए उन्होंने बाद में पद और राजनीति से दूरी बना ली थी। अब औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थामकर उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि 1984 का कत्लेआम एक बड़ी साजिश के तहत कांग्रेस शासन में हुआ था। अब वे बिना किसी पद के लालच के भाजपा की कानूनी टीम का मार्गदर्शन करेंगे।


