अली लारीजानी

अमेरिका और इजराइल के ईरान पर भीषण हमले : शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने ठुकराया बातचीत का प्रस्ताव

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एजेंसी, दुबई/तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए नेतृत्व के साथ संवाद की इच्छा जताने के बावजूद, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने किसी भी तरह की वार्ता से साफ इनकार कर दिया है। लारीजानी ने सोशल मीडिया के माध्यम से चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान, अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा। यह तल्खी ऐसे समय में आई है जब रविवार को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हमले किए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उपजे हालातों के बीच, अमेरिकी और इजराइली वायुसेना ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल केंद्रों और युद्धपोतों को निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में अब तक खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं सहित 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

भीषण बमबारी और जान-माल का नुकसान
अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि इस बड़े सैन्य अभियान के दौरान उसके तीन सैनिक मारे गए हैं और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में अपने सैनिकों की मौत का बदला लेने का संकल्प लिया है। दूसरी ओर, इजराइल के ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने बताया कि लगभग 100 लड़ाकू विमानों ने एक साथ तेहरान में ईरान की वायुसेना की इमारतों और मिसाइल कमान केंद्रों को ध्वस्त कर दिया। अमेरिकी ‘बी-टू स्टेल्थ’ विमानों ने भारी वजनी बमों से मिसाइल अड्डों को निशाना बनाया, जबकि ट्रंप के अनुसार ईरान के नौ युद्धपोत और नौसेना मुख्यालय को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है।

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इजराइल और खाड़ी देशों में जवाबी हमले
ईरान ने इन हमलों का बदला लेने के लिए इजराइल और अरब देशों पर मिसाइलें दागीं। इजराइल के यरुशलम और बेत शेमेश शहर में हुए हमलों में एक प्रार्थना स्थल भी प्रभावित हुआ, जहाँ नौ लोगों की मृत्यु हो गई। इजराइल में अब तक मृतकों का कुल आंकड़ा 11 तक पहुँच गया है और कई लोग लापता हैं। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन ने भी अपने नागरिक क्षेत्रों में ईरानी मिसाइलों के मलबे से हुई मौतों की पुष्टि की है और ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

वैश्विक शक्तियों का रुख और संघर्ष का विस्तार
अब तक तटस्थ रहा यूरोप भी अब इस संघर्ष की चपेट में आता दिख रहा है। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ईरान के “अविवेकपूर्ण” हमलों की निंदा करते हुए अमेरिका का समर्थन करने की घोषणा की है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने अमेरिकी सेना को अपने सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति दे दी है ताकि ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता को खत्म किया जा सके।

लेबनान और इराक में भी तनाव
संघर्ष अब ईरान की सीमाओं से बाहर निकलकर लेबनान और इराक तक फैल गया है। इराक में सक्रिय सशस्त्र समूहों ने बगदाद हवाई अड्डे पर अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया है। वहीं, लेबनान की राजधानी बेरूत पर इजराइल ने लगातार हमले जारी रखे हैं। इजराइली सेना ने लेबनान के लगभग 50 गांवों को खाली करने का आदेश दिया है। हिजबुल्ला ने भी इजराइल पर मिसाइलें दागकर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने का दावा किया है। इस व्यापक सैन्य कार्रवाई और दोनों पक्षों के कड़े रुख से स्पष्ट है कि यह जंग अब एक लंबे और विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है, जिससे पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता खतरे में है।

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