एजेंसी, भोपाल। ईरान पर हुए अमेरिका और इजराइल के हमले में वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद भारत के शिया समुदाय में शोक और भारी रोष देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के करोंद क्षेत्र स्थित शिया मस्जिद में रविवार को प्रार्थना के पश्चात एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और वैश्विक स्थिति पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
मजलूमों के समर्थक थे सुप्रीम लीडर: इमाम
सभा को संबोधित करते हुए इमाम बाकर हुसैन ने कहा कि पूरी दुनिया ईरान के सुप्रीम लीडर को एक ऐसी शख्सियत के रूप में जानती है, जिन्होंने हमेशा मजलूमों और सताए हुए लोगों का साथ दिया। उन्होंने कहा कि खामेनेई ने अपने पूरे जीवन में अत्याचार का विरोध किया और कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इमाम ने जोर देकर कहा कि इतिहास गवाह है कि किसी विचारधारा को केवल एक व्यक्ति के जाने से समाप्त नहीं किया जा सकता। सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने इजराइल और अमेरिका के विरुद्ध जोरदार नारेबाजी की।
इंसानियत और एकता की अपील
मस्जिद मोहम्मदी के इमाम जुमा सैयद अजहर हुसैन रिजवी ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने सुप्रीम लीडर को एक निडर मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं किया। जहाँ भी जुल्म हुआ, उन्होंने उसके विरुद्ध आवाज उठाई। वक्ताओं ने इस दुखद घड़ी में सभी से एकजुट रहने और धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
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कश्मीर घाटी में तनाव और सोमवार को बंद का एलान
ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत की खबर के बाद जम्मू-कश्मीर में भी भारी उबाल देखा जा रहा है। श्रीनगर सहित घाटी के विभिन्न जिलों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में काले झंडे और खामेनेई के चित्र लेकर अपना विरोध प्रदर्शित किया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए धार्मिक संगठनों के गठबंधन ने सोमवार को पूरी कश्मीर घाटी में पूर्ण बंद का आह्वान किया है।
प्रशासन की सतर्कता और मुख्यमंत्री की अपील
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जनता से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि शोक मना रहे लोगों के साथ संवेदनशीलता से पेश आएं। कश्मीर में लगभग पंद्रह लाख की शिया आबादी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। श्रीनगर, बडगाम और अनंतनाग जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि सोमवार को प्रस्तावित बंद के दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे।
ईरान की सत्ता में सुप्रीम लीडर का महत्व
अयातुल्ला अली खामेनेई वर्ष उन्नीस सौ निवासी से ईरान के सुप्रीम लीडर के पद पर आसीन थे। उन्होंने उन्नीस सौ उन्यासी की इस्लामिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और वे आठ वर्षों तक वहां के राष्ट्रपति भी रहे। ईरान के नियमों के अनुसार, सुप्रीम लीडर का पद केवल एक उच्च धार्मिक नेता को ही मिल सकता है।


