एजेंसी, श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2026 का अपना पहला लॉन्च आज सुबह पीएसएलवी-सी62 रॉकेट के साथ किया, लेकिन यह मिशन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से असफल रहा। रॉकेट ने सतीश धवन स्पेस सेंटर के फर्स्ट लॉन्च पैड से सुबह 10:17 बजे उड़ान भरी, लेकिन थर्ड स्टेज के अंतिम हिस्से में आई तकनीकी अनियमितता के कारण उड़ान पथ में विचलन आ गया। इसरो चेयरमैन वी. नारायणन ने पुष्टि की कि थर्ड स्टेज के अंत में “डिस्टर्बेंस” देखी गई, और अब डेटा का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया गया है। यह पीएसएलवी का 64वां उड़ान मिशन था, जो 2025 की असफलता के बाद एक महत्वपूर्ण कमबैक के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन अब यह पीएसएलवी के लिए लगातार दूसरी बड़ी चुनौती बन गई है, जहां थर्ड स्टेज में समस्या सामने आई।
मिशन का उद्देश्य और पेलोड्स
– मुख्य पेलोड: डीआरडीओ द्वारा विकसित ईओएस-एन1(अन्वेषा)— एक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट, जो सीमा निगरानी, छिपे लक्ष्यों की पहचान, सामरिक निगरानी और पर्यावरण मॉनिटरिंग में क्रांतिकारी साबित होने वाला था।
– अन्य पेलोड्स: कुल 15 सह-यात्री सैटेलाइट्स (कुल 16 पेलोड्स), जिनमें भारतीय स्टार्टअप्स, छात्रों के प्रयोग, विदेशी ग्राहकों (जैसे स्पेन का केआईडी री-एंट्री डेमोंस्ट्रेटर) के सैटेलाइट्स शामिल थे। ये सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (लगभग 505 किमी) में स्थापित होने थे, जबकि एक कैप्सूल री-एंट्री ट्रैजेक्टरी पर था।
– यह एनएसआईएल का 9वां समर्पित कमर्शियल मिशन था, जिसमें पीएसएलवी-डीएल वेरिएंट (दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर्स) का इस्तेमाल किया गया।
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क्या हुआ गड़बड़?
– लॉन्च से पहले सभी पैरामीटर्स सामान्य थे, ऑटोमेटिक सीक्वेंस शुरू हुआ और अंतिम चेक पूरा होने के बाद लिफ्टऑफ सफल रहा।
– पहले तीन स्टेज (सॉलिड और लिक्विड) सामान्य रूप से काम किए, लेकिन पीएस3 के अंत में वाहन में “डिस्टर्बेंस” या “डिविएशन” देखी गई, जिससे उड़ान पथ से भटकाव हुआ।
– इस कारण सैटेलाइट्स को इच्छित ऑर्बिट में इंजेक्ट नहीं किया जा सका — सभी 16 पेलोड्स स्पेस में खो गए माने जा रहे हैं।
– इसरो ने तुरंत फेल्योर एनालिसिस कमेटी गठित करने की बात कही है, और जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट साझा करने का वादा किया है।
यह सेटबैक भारत के स्पेस प्रोग्राम के लिए निराशाजनक है, खासकर जब पीएसएलवी को “वर्कहॉर्स” कहा जाता है। लेकिन इसरो की टीम पहले भी ऐसी चुनौतियों से उबर चुकी है। अब सभी की नजरें विश्लेषण रिपोर्ट और अगले मिशनों पर टिकी हैं।


