एजेंसी, इंदौर। राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘इंदौर में पानी नहीं, ज़हर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से भाजपा नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी, सरकार ने घमंड परोस दिया।’’ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत को लेकर शुक्रवार को आरोप लगाया कि भाजपा शासित मध्य प्रदेश कुप्राशन का केंद्र बन चुका है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गरीबों की मौत पर हमेशा की तरह खामोश हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि जीवन के अधिकार की ‘‘हत्या’’ के लिए भाजपा का ‘‘डबल इंजन’’ जिम्मेदार है।
उन्होंने सवाल किया कि लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की तो फिर सुनवाई क्यों नहीं हुई? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘‘सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते आपूर्ति बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?’’ उन्होंने कहा, ‘‘ये ‘फोकट’ सवाल नहीं, ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है। और इस अधिकार की हत्या के लिए भाजपा का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह ज़िम्मेदार है।’’ राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘मध्यप्रदेश अब कुप्रशासन का केंद्र बन चुका है – कहीं खांसी की सिरप से मौतें, कहीं सरकारी अस्पताल में बच्चों की जान लेने वाले चूहे, और अब सीवर मिला पानी पीकर मौतें। और जब-जब गरीब मरते हैं, मोदी जी हमेशा की तरह खामोश रहते हैं।’’ इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। बहरहाल, स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप से छह माह के बच्चे समेत 14 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि नहीं की है।
दूषित पानी से हुई मौतों के उलझे आकड़े, स्वास्थ्य विभाग ने साधी चुप्पी, मेयर और स्थानीय लोगों के अलग दावे
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। बहरहाल, स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप से छह माह के बच्चे समेत 14 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि नहीं की है। भार्गव ने ‘न्यूज़ एजेंसी’ को बताया,‘‘स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप से चार लोगों की मौत हुई है। हालांकि, मुझे इस प्रकोप के कारण 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है।’’ भागीरथपुरा से लिए गए पेयजल के नमूनों की शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर इस इलाके में हैजा फैलने के संदेह पर महापौर ने कहा कि इस बारे में स्वास्थ्य विभाग ही जानकारी दे सकता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बृहस्पतिवार को बताया था कि शहर के एक चिकित्सा महाविद्यालय की प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा में पाइपलाइन में लीकेज के कारण पेयजल दूषित हुआ था।
सीएमएचओ ने हालांकि जांच रिपोर्ट का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया था। प्रशासन के अधिकारी भी इस रिपोर्ट के बारे में स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में उस जगह लीकेज मिला है जिसके ऊपर एक शौचालय बना है। अधिकारियों का दावा है कि इस लीकेज के कारण ही पेयजल दूषित हुआ। भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त प्रकोप से गुजरे नौ दिनों में 1,400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार रात तक की स्थिति के हवाले से बताया कि इस क्षेत्र के 272 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया जिनमें से 71 लोगों को छुट्टी दी जा चुकी है। अधिकारी ने बताया कि अस्पतालों में भर्ती 201 मरीजों में शामिल 32 लोग गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में हैं।
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