संजय मल्होत्रा

पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव 5.25% पर स्थिर रहेंगी नीतिगत दरें

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एजेंसी, मुंबई। आरबीआई रेपो रेट अप्रैल 2026 : भारतीय रिजर्व बैंक ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण देश की आर्थिक तरक्की और बढ़ती महंगाई पर गहरी चिंता जताई है। मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है कि फिलहाल रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रखा जाएगा। केंद्रीय बैंक ने ‘इंतजार करो और देखो’ की नीति अपनाते हुए अपने रुख को तटस्थ रखा है। इसके साथ ही बैंक रेट और अन्य दरों में भी कोई फेरबदल नहीं किया गया है। रिजर्व बैंक का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

जीडीपी और विकास दर का अनुमान

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है। चालू वित्त वर्ष के लिए देश की जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अंदाजा लगाया गया है। अलग-अलग तिमाहियों की बात करें तो पहली तिमाही में यह 6.8 प्रतिशत और आखिरी तिमाही तक बढ़कर 7.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, गवर्नर ने आगाह किया है कि ईंधन और अन्य कमर्शियल वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने से आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

महंगाई और आम आदमी पर असर

समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई है कि ईंधन और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की वजह से खुदरा महंगाई दर 4.6 प्रतिशत तक जा सकती है। गवर्नर के अनुसार, हालांकि अभी खाद्य पदार्थों के दाम नियंत्रण में हैं, लेकिन भविष्य में अल नीनो और मौसम के बिगड़ते मिजाज से खेती और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और देश के आयात बिल पर पड़ेगा।

वैश्विक संकट और भारतीय बाजार की स्थिति

पश्चिम एशिया में मचे घमासान से न केवल शेयर बाजारों में गिरावट देखी जा रही है, बल्कि दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। गवर्नर मल्होत्रा ने जोर देकर कहा कि भारत की बुनियादी आर्थिक स्थिति मजबूत है और हम किसी भी बाहरी झटके को झेलने के लिए पहले से अधिक तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि यदि सप्लाई चेन बाधित होती है और परिवहन का खर्च बढ़ता है, तो इससे देश के निर्यात और उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सरकार और आरबीआई स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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