एजेंसी, दिल्ली। लोकसभा में गुरुवार को कांग्रेस और भाजपा के सदस्यों ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सोशल मीडिया के पड़ रहे हानिकारक प्रभावों का मुद्दा उठाते हुए देशभर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग की है। सदन में शून्य काल के दौरान कांग्रेस सांसद के. काव्या और भाजपा सांसद आनंद कुमार ने इस विषय को गंभीरता से उठाया। कांग्रेस सदस्य ने चिंता जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उनमें सामाजिक सहभागिता और पारिवारिक रिश्तों के प्रति समझ कम होती जा रही है।
सांसद काव्या ने कहा कि बच्चों के कोमल मन पर आजकल सोशल मीडिया ऐप हावी हो रहे हैं, जो उन्हें गलत दिशा में ले जा रहे हैं। उन्होंने एक मां होने के नाते केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए देशभर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि कुछ राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, इसलिए केंद्र को भी इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। वहीं भाजपा सांसद आनंद कुमार ने कहा कि डिजिटल युग में अनियंत्रित सोशल मीडिया का प्रभाव बेहद चिंताजनक है। उन्होंने तर्क दिया कि इस उम्र में बच्चे सही और गलत के बीच फर्क नहीं कर पाते, जिससे वे भ्रामक खबरों, डीपफेक वीडियो, साइबर बुलिंग और अश्लील सामग्री के जाल में आसानी से फंस जाते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि आयु सत्यापन की कड़ी व्यवस्था और सोशल मीडिया कंपनियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू किए जाएं।
दूसरी ओर, संसद के बजट सत्र के अंतिम दिन यह जानकारी सामने आई है कि सत्र को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय कुछ समय के लिए स्थगित किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, सरकार 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराना बताया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा में कहा कि देश की महिलाओं से किए गए वादे को पूरा करना सरकार का नैतिक कर्तव्य है।
ये भी पढ़े : लोकसभा चुनाव प्रचार में जुटी सियासी दिग्गज : असम में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, तो बंगाल में ममता और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज
हालांकि, सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जहां इसे सरकार का अधिकार बताया, वहीं नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे तानाशाही करार दिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी राज्यों में लागू आचार संहिता के बीच इस बिल को लाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मांग की है कि इस विषय पर सर्वदलीय बैठक 29 अप्रैल के बाद ही बुलाई जानी चाहिए। फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच इस विशेष सत्र और महिला आरक्षण बिल को लेकर खींचतान जारी है।


