एजेंसी, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जब तक पुलिस इस मामले में अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट यानी चार्जशीट दाखिल नहीं कर देती, तब तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने दोपहर बाद 3:45 बजे यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया।
PTI SHORTS | Allahabad HC grants anticipatory bail to Swami Avimukteshwaranand in POCSO case
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— Press Trust of India (@PTI_News) March 25, 2026
जमानत प्रदान करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। सबसे प्रमुख शर्त यह है कि इस विवाद से जुड़े दोनों पक्ष, यानी शंकराचार्य और शिकायतकर्ता आशुतोष, मीडिया के सामने किसी भी प्रकार की बयानबाजी नहीं करेंगे और न ही कोई साक्षात्कार देंगे। इसके अतिरिक्त, शंकराचार्य के देश से बाहर जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है; यदि उन्हें विदेश यात्रा करनी है, तो इसके लिए हाईकोर्ट से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि जमानत की इन शर्तों का किसी भी तरह से उल्लंघन किया जाता है, तो विपक्षी पक्ष जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकता है।
सुनवाई के दौरान जब शंकराचार्य के अधिवक्ताओं ने बच्चों को साथ लेकर यात्रा करने और बयानबाजी रोकने का मुद्दा उठाया, तो अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश की मर्यादा का पूरी तरह पालन होना चाहिए। इस फैसले के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि कानून को कुछ लोगों ने जाल बना रखा है ताकि किसी को भी फंसाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के न्यायिक निर्णयों से आम जनता की न्याय प्रणाली में आस्था और हिम्मत बढ़ती है।
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दूसरी ओर, शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की प्रतिनिधि रीना एन. सिंह ने इस फैसले पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वे हाईकोर्ट के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि धर्म की रक्षा के लिए उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी और वे शंकराचार्य की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, यदि कोई आरोपी जेल में बंद होता है, तो पुलिस को अनिवार्य रूप से 90 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट पेश करनी होती है। हालांकि, इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, इसलिए पुलिस जांच के लिए अतिरिक्त समय ले सकती है, बशर्ते उसे इसका ठोस कारण बताना होगा। चार्जशीट वह महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है जिसे पुलिस अपनी पूरी तफ्तीश खत्म करने के बाद अदालत में जमा करती है। इसमें आरोपी के विरुद्ध जुटाए गए साक्ष्यों और धाराओं का विवरण होता है, जिसके आधार पर न्यायालय यह तय करता है कि मुकदमा आगे चलेगा या नहीं।


