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सुप्रीम कोर्ट की ममता सरकार को कड़ी फटकार : आई-पैक रेड मामले में पूछा- ‘केंद्र में आपकी सत्ता होती तो क्या करते?’

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एजेंसी, कोलकाता/नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में आई-पैक के कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी के मामले में सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी सरकार को कड़े शब्दों में घेरा है। कोर्ट ने मंगलवार को बंगाल सरकार से सीधा और तीखा सवाल किया कि यदि केंद्र में आपकी सरकार होती और कोई राज्य इस तरह की कार्रवाई करता, तो आपका रुख क्या होता।

जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान यह भी पूछा कि क्या ड्यूटी पर तैनात ईडी अधिकारी अपने अधिकार खो देते हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ईडी के कुछ अधिकारियों ने व्यक्तिगत तौर पर भी याचिकाएं दाखिल की हैं और उनके अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। राज्य सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जांच करना अधिकारियों का मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि केवल एक कानूनी अधिकार है।

इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ईडी अधिकारियों के भी अपने मौलिक अधिकार होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए कि वे अधिकारी हैं, उन्हें नागरिक होने के हक से वंचित नहीं किया जा सकता। उनकी याचिकाओं को अदालत में पूरा महत्व देना होगा।

पूरा मामला और 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस: आई-पैक एक राजनीतिक कंसल्टेंसी कंपनी है जो चुनावी रणनीतियां तैयार करती है। इस कंपनी और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर कोयला चोरी घोटाले से जुड़े लगभग 2,742 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। सीबीआई ने इस मामले में नवंबर 2020 में प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप है कि करीब 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए आई-पैक तक पहुंचाए गए थे। इसी सिलसिले में 8 जनवरी 2026 को ईडी ने कोलकाता में छापेमारी की थी।

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रेड के दौरान मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप: छापेमारी के दिन स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रतीक जैन के आवास पर पहुंच गईं। वहां से बाहर निकलते समय उनके हाथ में एक हरी फाइल देखी गई थी। इसके बाद वह आई-पैक के दफ्तर भी गईं और केंद्रीय गृहमंत्री पर पार्टी के दस्तावेज उठवाने का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दावा है कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ईडी ने गोपनीय चुनावी रणनीति की जानकारी चुराने के उद्देश्य से यह छापेमारी की है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ ही प्राथमिकी दर्ज कर दी है, जिसे लेकर कानूनी और राजनीतिक घमासान जारी है।

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