सिवनी में आर्थिक

मुख्यमंत्री द्वारा सिवनी में आर्थिक और सामाजिक उन्नति की इबारत

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मुख्यमंत्री द्वारा सिवनी में आर्थिक और सामाजिक उन्नति की इबारत

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिवनी जिले में आयोजित राज्य स्तरीय धान महोत्सव प्रदेश के कृषि परिदृश्य में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होने वाला आयोजन बनकर उभरा है। यह भव्य कार्यक्रम न केवल धान और श्रीअन्न (मिलेट्स) के उत्पादकों को सम्मानित करने का माध्यम बना, बल्कि इसने संपूर्ण महाकौशल क्षेत्र के समग्र विकास को एक अभूतपूर्व गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री द्वारा इस गरिमामयी महोत्सव के दौरान सिवनी जिले सहित पूरे क्षेत्र के नागरिकों को विकास और प्रगति की जो सौगातें दी गईं, वे आने वाले समय में क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक उन्नति की नई इबारत लिखेंगी।
​इस राज्य स्तरीय महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुआयामी दृष्टिकोण रहा, जिसमें बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण से लेकर सीधे किसानों और आम नागरिकों के आर्थिक सशक्तिकरण को शामिल किया गया। मुख्यमंत्री ने सिवनी जिले को विकास की राह पर और तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से 494.16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार 629 विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इतनी बड़ी संख्या में और इतनी व्यापक लागत वाले विकास कार्यों की यह अनूठी सौगात सिवनी के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई है। इन विकास परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से स्थानीय स्तर पर यातायात, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाओं में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा। बुनियादी ढांचे का यह सुदृढ़ीकरण न केवल वर्तमान पीढ़ी की सहूलियतों को बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य की प्रगति के लिए एक मजबूत आधारशिला भी तैयार करेगा।

​कृषि और किसान कल्याण की दिशा में प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण इस कार्यक्रम में तब देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ने राज्य के किसानों की आय बढ़ाने और पारंपरिक खेती को पुनर्जीवित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप ‘श्रीअन्न’ (मिलेट्स) की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने राज्य के 3,941 कोदो-कुटकी उत्पादक किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे अंतरित की। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और त्वरित रही, जिससे तकनीक के माध्यम से सुशासन का संकल्प भी चरितार्थ हुआ।
​किसानों को दी गई यह प्रोत्साहन राशि 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की अत्यंत आकर्षक दर से वितरित की गई है। सरकार का यह कदम केवल वित्तीय सहायता मात्र नहीं है, बल्कि यह उन गरीब और जनजातीय क्षेत्रों के किसानों के कठिन परिश्रम का सम्मान है जो सदियों से मोटे अनाजों की खेती को सहेज कर रखे हुए हैं। कोदो-कुटकी जैसे पोषक अनाजों के उत्पादन पर इस प्रकार की सीधी आर्थिक सहायता मिलने से किसानों के भीतर एक नया आत्मविश्वास जागा है। इससे न केवल उनकी तात्कालिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि वे भविष्य में और अधिक उत्साह के साथ श्रीअन्न के उत्पादन की ओर अग्रसर होंगे। यह पहल निश्चित रूप से राज्य में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देगी और पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि मिलेट्स की खेती में कम पानी और कम लागत की आवश्यकता होती है।
​सिवनी में आयोजित इस महोत्सव ने केवल एक सरकारी औपचारिकता का रूप न लेकर एक व्यापक जन-उत्सव का स्वरूप ले लिया। कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने के लिए मंच पर प्रदेश के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेतृत्व की उपस्थिति रही। राजस्व मंत्री एवं सिवनी जिले के प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और सांसद भारती पारधी सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों की संख्या में आए आम नागरिक व किसान भाई-बहन इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। जनप्रतिनिधियों की यह व्यापक उपस्थिति दर्शाती है कि प्रदेश सरकार की विकास नीतियां समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र को एक सूत्र में पिरोकर आगे बढ़ने की सोच पर आधारित हैं।
​इस राज्य स्तरीय महोत्सव का एक और बेहद आकर्षक और ज्ञानवर्धक पहलू रहा वहां लगाई गई थीम आधारित भव्य विकास प्रदर्शनी। विभिन्न सरकारी विभागों के समन्वय से तैयार की गई यह प्रदर्शनी आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कृषि के अनूठे संगम के रूप में उभरकर सामने आई। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य किसानों को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक युग की मांग और तकनीकों से परिचित कराना था। प्रदर्शनी में आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसान यह समझ सके कि कम समय और कम श्रम में किस प्रकार बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
​इसके साथ ही, वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यानी प्राकृतिक खेती और प्राकृतिक बगीचों के मॉडलों को भी इस प्रदर्शनी में प्रमुखता से दिखाया गया। रसायनों से मुक्त और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न उत्पादन के लिए प्राकृतिक खेती के गुर सीखकर कई प्रगतिशील किसान बेहद उत्साहित नजर आए। छोटे और सीमांत किसानों की सहायता के लिए स्थापित होने वाले ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ की कार्यप्रणाली और उससे मिलने वाले लाभों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, ताकि वे महंगे कृषि उपकरण किराए पर लेकर अपनी खेती को सुगम बना सकें।
​यह महोत्सव स्थानीय संस्कृति, पहचान और उत्पादों को एक वैश्विक मंच प्रदान करने का जरिया भी बना। प्रदर्शनी में जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग प्राप्त उत्कृष्ट उत्पादों, विभिन्न प्रकार के मिलेट्स और पीएमएफएमई (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना) के तहत तैयार किए गए प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) कितना महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, आम की विभिन्न अनूठी और उन्नत किस्मों ने बागवानी के प्रति किसानों की रुचि को बढ़ाया।
​प्रदर्शनी ने महिला सशक्तिकरण की भी एक बेहद खूबसूरत और सशक्त तस्वीर पेश की। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट हस्तशिल्प और पारंपरिक मिट्टी कला उत्पादों के स्टॉल इस प्रदर्शनी के केंद्र बिंदु रहे। इन समूहों द्वारा बनाए गए सामानों की गुणवत्ता और उनकी कलात्मकता ने यह साबित कर दिया कि यदि सही अवसर और बाजार उपलब्ध कराया जाए, तो ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। लघु वनोपजों और स्थानीय उद्यमियों द्वारा निर्मित विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित करके ‘वोकल फॉर लोकल’ के नारे को पूरी तरह से धरातल पर उतारने का प्रयास किया गया।
​आधुनिक डिजिटल इंडिया के दौर में खेती-किसानी को तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी यह आयोजन बेहद मददगार रहा। प्रदर्शनी में आम जनता और किसानों को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड की व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया, जिससे जमीनी विवादों में कमी आएगी और कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके साथ ही ‘कृषिका ऐप’ और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से जुड़ी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की बारीक और व्यावहारिक जानकारियां विशेषज्ञों द्वारा सीधे किसानों तक पहुंचाई गईं। इस सूचना क्रांति ने किसानों को सशक्त और जागरूक बनाने का काम किया।
​प्रशासन और आयोजकों ने इस बात का भी विशेष ध्यान रखा कि यह महोत्सव युवाओं और आम जनता के लिए भी स्मरणीय बने। पूरे प्रदर्शनी परिसर में बेहद आकर्षक और रचनात्मक ‘सेल्फी प्वाइंट’ बनाए गए थे, जो आने वाले आगंतुकों, युवाओं और परिवारों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। इन सेल्फी प्वाइंट्स के माध्यम से लोगों ने इस गौरवशाली और विकासोन्मुखी पल की यादों को अपने कैमरों और सोशल मीडिया के माध्यम से दुनिया भर में साझा किया, जिससे सिवनी जिले की सकारात्मक छवि पूरे प्रदेश में और मजबूत हुई।
​संक्षेप में कहा जाए तो, सिवनी में संपन्न हुआ यह राज्य स्तरीय धान महोत्सव केवल एक दिवसीय आयोजन नहीं था, बल्कि यह मध्य प्रदेश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के संकल्प का एक जीवंत प्रकटीकरण था। बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित की गई लगभग पांच सौ करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं और सीधे किसानों के खातों में पहुंचाई गई करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में गांव, गरीब और किसान सबसे ऊपर हैं। यह महोत्सव आने वाले समय में महाकौशल क्षेत्र की आर्थिक खुशहाली, कृषि के आधुनिकीकरण और स्थानीय उद्यमशीलता के विकास के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में याद किया जाएगा।

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