एजेंसी, भोपाल। एम्स से लेकर हबीबगंज और इसी तरह के आबादी व संवेदनशील क्षेत्रों में मेट्रो साइलेंस मोड में दौड़ेगी। यहां मेट्रो को साउंड प्रूफ करने के लिए लाइन से चार मीटर ऊंचाई तक एक्रेलिक बैरियर स्थापित किए जाएंगे। इससे जब मेट्रो 80 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेगी तो आसपास के क्षेत्रों में न मेट्रो की आवाज पहुंचेगी न इससे उत्पन्न होने वाला कंपन महसूस होगा। गौरतलब है कि मेट्रो को साउंड प्रूफ करने के लिए मेट्रो रेल कारपोरेशन ने बकायदा अध्ययन कराया था। इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही अब एक्रेलिक बैरियर स्थापित करना तय किया गया है। अगले माह इसके लिए काम शुरू होगा।
सवा करोड़ रुपए में ट्रांसपेरेंट शीट लगेगी
मेट्रो की आवाज व कंपन आसपास के क्षेत्रों की शांति भंग न करें, इसके लिए करीब सवा करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। एक्रेलिक बैरियर के लिए ट्रांसपेरेंट शीट का उपयोग किया जाएगा। यानि लोगों को मेट्रो नजर आएगी, लेकिन उसकी आवाज और कंपन महसूस नहीं होगा।
इसलिए जरूरी
मेट्रो प्रायोरिटी कॉरिडोर एम्स जैसे अस्पताल से शुरू होते हुए, शहर के शांत क्षेत्रों में शामिल साकेत नगर, अल्कापुरी, अरेरा कॉलोनी से होकर गुजरता है। जमीन से करीब 11 मीटर की ऊंचाई पर मेट्रो का एलिवेटेड कॉरिडोर सीधे घरों से नजर आता है। एक्सपर्ट्स का कहना है जब मेट्रो अपनी पुरी रफ्तार यानि 80 से 90 किमी प्रतिघंटा से चलेगी तो इससे कॉरिडोर में कंपन होगा जो आसपास भी महसूस होगा। इससे ही आसपास के निर्माणों को बचाना जरूरी है।


