एजेंसी, अमेरिका। अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और तगड़ा झटका लगा है। अदालत ने ट्रंप द्वारा लिए गए एक और निर्णय पर अस्थायी रोक लगा दी है। फेडरल कोर्ट के न्यायाधीश ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी को दी जाने वाली राशि में अभी तुरंत कटौती नहीं कर सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय पर यहूदी-विरोध और अन्य प्रकार के भेदभाव के मामलों को लेकर कोई दंड भी फिलहाल नहीं थोपा जा सकता। इसके साथ ही अमेरिकन डिस्ट्रिक्ट जज रीटा लिन ने श्रमिक संगठनों और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के स्टाफ, विद्यार्थियों व कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूहों द्वारा मांगी गई शुरुआती रोक लगाने की याचिका को मंजूरी प्रदान कर दी है।
मामला क्या है
यूनियनों ने अपने मुकदमे में कहा कि ट्रंप प्रशासन विरोधी विचारों को दबाने की नीयत से कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की फंडिंग में कटौती कर रहा है, जो संविधान और संघीय कानून का उल्लंघन है। ट्रंप ने प्रतिष्ठित कॉलेजों पर उदारवादी सोच और यहूदी-विरोधी भावना को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।
ट्रंप प्रशासन का पक्ष
इस संबंध में व्हाइट हाउस और जस्टिस डिपार्टमेंट को भेजे गए संदेशों का कोई जवाब नहीं मिला है। जानकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने देश की कई यूनिवर्सिटियों की जांच भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि ये संस्थान नस्लीय भेदभाव करते हैं, जो नागरिक अधिकार कानून का उल्लंघन है। प्रशासन का यह भी दावा है कि विविधता, समानता और समावेशन की नीतियां श्वेत और एशियाई मूल के छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार कर रही हैं। इसलिए निर्देश दिया गया है कि विश्वविद्यालय नस्ल आधारित वरीयता बंद करें और सभी विद्यार्थियों को समान अवसर दें।
ट्रंप ने लगाया इतना बड़ा दंड
ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी पर 1.2 अरब डॉलर का विशाल दंड लगाया है। साथ ही परिसर में यहूदी-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए रिसर्च फंड पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अतिरिक्त ट्रंप ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी सहित कई निजी कॉलेजों की फंडिंग पर भी इसी आधार पर रोक लगाई है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट जेम्स बी। मिलिकेन ने कहा कि यह दंड संस्थान को पूरी तरह से बर्बाद कर देगा।


