बरगी डैम

जबलपुर में बरगी जलाशय त्रासदी का दुःखद अंत : चौथे दिन नदी से चाचा-भतीजे के शव बरामद, कुल 13 पर्यटकों की मृत्यु के बाद बचाव अभियान समाप्त

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एजेंसी, जबलपुर। बरगी जलाशय : मध्यप्रदेश के जबलपुर जनपद में स्थित प्रसिद्ध बरगी जलाशय में घटित हुए भीषण क्रूज हादसे में हताहत होने वाले नागरिकों की कुल संख्या बढ़कर अब 13 तक पहुंच गई है। जलाशय की अगाध जलराशि में पिछले चार दिनों से निरंतर क्रियाशील राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के संयुक्त दलों ने रविवार को अंतिम दो लापता शवों को बरामद करने के पश्चात अपना सघन खोज और बचाव अभियान पूरी तरह से समाप्त घोषित कर दिया है। रविवार, 3 मई 2026 को इस भयावह जल त्रासदी के चौथे दिन तड़के सुबह लगभग 6:00 बजे गोताखोरों ने जलाशय की गहराई से एक 8 वर्षीय मासूम बच्चे का निर्जीव शरीर बाहर निकाला, जबकि दोपहर ढलने से ठीक पहले एक अन्य प्रौढ़ युवक का शव भी जल की सतह से बरामद कर लिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, दोनों ही पीड़ितों के शव मुख्य दुर्घटना स्थल के अत्यंत समीप ही जलमग्न अवस्था में पाए गए। चिकित्सकीय परीक्षण और शिनाख्त की विधिक प्रक्रिया के दौरान मृत बच्चे की पहचान मयूरन और युवक की पहचान कामराज के रूप में सुनिश्चित की गई है। ये दोनों ही मृतक मूल रूप से तमिलनाडु प्रांत के त्रिची शहर के निवासी थे और आपस में सगे चाचा-भतीजे का संवेदी रिश्ता रखते थे।

पारिवारिक पर्यटन यात्रा का अत्यंत वीभत्स अंत, जीवित बचे केवल दो मासूम बच्चे

स्थानीय पुलिस प्रशासन और प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त हृदयविदारक विवरण के अनुसार, मृतक कामराज जबलपुर स्थित केंद्रीय आयुध निर्माण फैक्टरी (ऑर्डनेंस फैक्ट्री) में एक कुशल मशीन ऑपरेटर के पद पर शासकीय सेवा में कार्यरत था। विगत कुछ दिनों पूर्व ही उसके ससुराल पक्ष के अनेक करीबी रिश्तेदार ग्रीष्मकालीन अवकाश बिताने और उससे भेंट करने के उद्देश्य से सुदूर तमिलनाडु से जबलपुर आए थे। कामराज अपने संपूर्ण परिवार, जिसमें उसकी जीवनसंगिनी, दो छोटे बच्चे और अन्य निकट संबंधी शामिल थे, को लेकर स्थानीय पर्यटन स्थलों के भ्रमण पर निकला था। दुर्घटना वाले दिन यह पूरा हंसता-खेलता परिवार सर्वप्रथम भेड़ाघाट की विख्यात संगमरमरी चट्टानों को देखने पहुंचा था, जहां सभी सदस्यों ने रोप-वे की हवाई यात्रा का भरपूर आनंद लिया। इसके पश्चात, दोपहर के समय यह पूरा दल नौकाविहार और जलक्रीड़ा के उद्देश्य से बरगी जलाशय पहुंचा, जहां काल बनकर खड़े क्रूज हादसे ने उनकी खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया। इस अत्यंत भयावह और विनाशकारी जल दुर्घटना में नियति के संरक्षण के चलते केवल 10 और 12 वर्ष की आयु के दो मासूम बच्चे ही पूरी तरह सुरक्षित बच सके, जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने संपूर्ण परिवार को जल समाधि लेते देखा।

सैन्य और कार्गो विमानों के माध्यम से पैतृक राज्यों में भेजे जा रहे पार्थिव शरीर

जल पुलिस, एनडीआरएफ और प्रांतीय राहत दलों की कई टुकड़ियों ने अत्याधुनिक सोनार प्रणालियों और विशेषज्ञ गोताखोरों की सहायता से जलाशय के भीतर अत्यंत सघन और चुनौतीपूर्ण सर्च ऑपरेशन चलाया था। इस भीषण जल दुर्घटना में असमय अपनी जान गंवाने वाले सभी अभागे पर्यटकों के शवों को उनके विधिक अंत्येष्टि और अंतिम दर्शन के लिए उनके मूल गृह राज्यों में भेजने की व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर युद्ध स्तर पर की जा रही है। रविवार को जबलपुर के सैन्य हवाई अड्डे से विशेष कार्गो विमानों और नागरिक वायुयानों के माध्यम से सभी शवों को अत्यंत सम्मानपूर्वक उनके पैतृक जनपदों के लिए रवाना किया गया। इस भीषण हादसे के शिकार हुए नागरिकों में मुख्य रूप से दक्षिण भारत के तमिलनाडु और देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के निवासी शामिल थे, जो यहां छुट्टियां बिताने आए थे। इससे पूर्व, शनिवार की संध्या को भी खोजी दलों ने कड़े परिश्रम के पश्चात दो अन्य लापता बच्चों के शवों को जलाशय की गहराई से ढूंढ निकालने में सफलता प्राप्त की थी।

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