भारत में रिसर्च को नई दिशा, पीएम मोदी ने लॉन्च किया 1 लाख करोड़ का आरडीआई फंड, जानिए किसे मिलेगा फायदा

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एजेंसी, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन में 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार फंड की शुरुआत की। इस फंड का मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) निवेश को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत को वैश्विक नवाचार का केंद्र बनाया जा सके।

प्रधानमंत्री  मोदी ने किया संबोधन
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “यह 1 लाख करोड़ रुपये आपके लिए हैं। यह आपका सामर्थ्य बढ़ाने और नए अवसरों के द्वार खोलने के लिए है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले दशक में भारत का आरएंडडी व्यय दोगुना हो गया है, पेटेंट पंजीकरण 17 गुना बढ़ा है और भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें 6,000 से अधिक डीपटेक स्टार्टअप्स कार्यरत हैं।

दो-स्तरीय संरचना से होगा फंड का संचालन
पहला स्तर: अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) के अंतर्गत विशेष प्रयोजन फंड (एसपीएफ) स्थापित किया जाएगा, जो 1 लाख करोड़ के कोष का संरक्षक होगा।
दूसरा स्तर: फंड सीधे कंपनियों या स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करेगा, बल्कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ), विकास वित्त संस्थानों (डीएफआई) या एनबीएफसी जैसे फंड मैनेजरों को पूंजी प्रदान करेगा।

6 साल में दी जाएंगी फंड की राशि
निवेश सिफारिशें वित्त, व्यवसाय और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों की समितियों द्वारा की जाएंगी, जो सरकार से दूरी बनाकर काम करेंगी। फंड की कुल राशि 6 साल में वितरित की जाएगी, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित हैं। यह लंबी अवधि के कम या शून्य ब्याज वाले ऋण, इक्विटी निवेश और डीपटेक फंड ऑफ फंड्स में योगदान प्रदान करेगा।

ईएसटीआईसी 2025
भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में 3,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं, जिनमें नोबेल विजेता, वैज्ञानिक, नवाचारी और नीति निर्माता शामिल हैं। पीएम मोदी ने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों पर आधारित कॉफी टेबल बुक का अनावरण किया और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विजन दस्तावेज जारी किया।

कोविड महामारी का भी किया जिक्र
कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि भारत ने स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया, जो डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बदौलत संभव हुआ। उन्होंने भारत को “प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से प्रौद्योगिकी-चालित परिवर्तन के अग्रणी” के रूप में चित्रित किया।

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