एजेंसी, वॉशिंगटन डीसी। ईरान के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ते दिखाई दे रहे हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति रोकने के बाद ट्रम्प ने नाटो सदस्य देशों से इस समुद्री रास्ते को फिर से खुलवाने के लिए सैन्य सहयोग की अपील की थी, जिसे सहयोगी देशों ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। जर्मनी, ब्रिटेन और इटली जैसे प्रमुख देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनेंगे और अपने युद्धपोत इस क्षेत्र में नहीं भेजेंगे। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साफ कहा कि यह यूरोप की लड़ाई नहीं है और केवल बमबारी के जरिए किसी देश को झुकाना सही समाधान नहीं है। वहीं ब्रिटेन ने भी इस बड़े युद्ध में फंसने से इनकार करते हुए कूटनीतिक रास्तों पर जोर दिया है।
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होर्मुज का यह समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस यहीं से गुजरती है। ट्रम्प ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि नाटो देश इस संकट में मदद नहीं करते, तो इस सैन्य गठबंधन का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। दूसरी ओर, यूरोपीय यूनियन के विदेश मंत्रियों ने भी अपने समुद्री मिशन का विस्तार करने से मना कर दिया है। इस बीच, इजराइल ने ईरान के तेहरान, शिराज और तबरीज जैसे शहरों पर हमले तेज कर दिए हैं और अगले तीन हफ्तों की युद्ध रणनीति तैयार कर ली है। ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सेना जमीन पर उतरती है, तो उसे वियतनाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इस बढ़ते तनाव के बीच लेबनान में भी इजराइली जमीनी कार्रवाई जारी है, जिससे वहां मानवीय संकट और गहरा गया है।


