एजेंसी, नई दिल्ली। WFI Wrestling News : भारतीय खेल जगत में उम्र छिपाकर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले फर्जी खिलाड़ियों के खिलाफ भारतीय कुश्ती महासंघ ने एक ऐतिहासिक और बेहद सख्त कदम उठाया है। महासंघ ने नियमों का उल्लंघन करने और आयु वर्ग में धोखाधड़ी करने के आरोप में सत्रह वर्ष से कम आयु वाली राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता से पांच सौ से भी अधिक पहलवानों को तुरंत प्रभाव से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस बार महासंघ द्वारा अपनाई गई बेहद आधुनिक और डिजिटल पहचान पत्र आधारित जांच प्रणाली के कारण खिलाड़ियों द्वारा जमा किए गए कागजातों में बड़े स्तर पर कमियां और हेराफेरी पकड़ी गई है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में छह से आठ जून तक आयोजित की गई इस खेल प्रतियोगिता में देश भर से लगभग बारह सौ महिला और पुरुष पहलवानों ने अपना नामांकन करवाया था।
STORY | WFI cracks down on age fraud, disqualifies 500-plus wrestlers at U-17 ranking meet
In a sweeping crackdown on age fraud, more than 500 wrestlers were disqualified from the U-17 National Open Ranking Tournament in Gonda after the Wrestling Federation of India (WFI)… pic.twitter.com/ZFTgLk9li2
— Press Trust of India (@PTI_News) June 12, 2026
डिजिटल पहचान पत्र प्रणाली ने उजागर की खिलाड़ियों की जालसाजी
इस बार महासंघ ने खिलाड़ियों की वास्तविक उम्र का पता लगाने के लिए केवल साधारण कागजी जन्म प्रमाण पत्र पर भरोसा नहीं किया। प्रतियोगिता में भाग लेने आए सभी पहलवानों से उनके मोबाइल नंबर से जुड़े हुए राष्ट्रीय पहचान पत्र को मंगवाया गया और मौके पर ही उनके फोन पर आने वाले गुप्त सुरक्षा कोड (ओटीपी) के जरिए डिजिटल सत्यापन किया गया। इस आधुनिक प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें व्यक्ति द्वारा अपने जीवनकाल में पहचान पत्र के अंदर किए गए हर एक बदलाव का पूरा इतिहास दर्ज रहता है। जब जांच दल ने इस डिजिटल डेटा का मिलान स्थानीय निकायों द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्रों से किया, तो खिलाड़ियों की जन्म तिथि और जन्म स्थान में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिला। इसके बाद कार्रवाई करते हुए लगभग तीन सौ पुरुष फ्रीस्टाइल, एक सौ पच्चीस ग्रीको रोमन और पचास महिला पहलवानों को प्रतियोगिता से सस्पेंड कर दिया गया।
कागजातों में हेरफेर और अस्पतालों से जवाब-तलब
जांच के दौरान ऐसे कई हैरान करने वाले मामले सामने आए जहाँ खिलाड़ियों के जन्म प्रमाण पत्र उनके जन्म के कई वर्षों बाद बनवाए गए थे, जिससे अधिकारियों का शक गहरा गया। उदाहरण के तौर पर एक पहलवान ने अपने कागजी प्रमाण पत्र में अपनी जन्म तिथि वर्ष दो हजार सात और जन्म का स्थान देश की राजधानी दिल्ली का नरेला इलाका दर्ज कराया था, परंतु जब उसके डिजिटल राष्ट्रीय पहचान पत्र के इतिहास को खंगाला गया तो वहाँ उसका जन्म वर्ष दो हजार चार और जन्म का राज्य हरियाणा दर्ज मिला। इस तरह की गंभीर जालसाजी को देखते हुए महासंघ ने संबंधित चिकित्सालयों को भी नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। इस बेहद कड़ी छंटनी प्रक्रिया के बाद केवल साढ़े तीन सौ पुरुष फ्रीस्टाइल, एक सौ पचासी महिला और एक सौ साठ ग्रीको रोमन पहलवानों को ही अखाड़े में उतरने की वैध अनुमति मिल सकी।
वास्तविक और ईमानदार खिलाड़ियों के हक के लिए महासंघ प्रतिबद्ध
भारतीय कुश्ती महासंघ के वर्तमान अध्यक्ष संजय सिंह ने इस कड़े फैसले पर अपनी बात रखते हुए साफ कहा कि वे खेल के मैदान से उम्र की इस बेईमानी को पूरी तरह से जड़ से मिटाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि जब अधिक उम्र का कोई खिलाड़ी अपने से कम उम्र के वर्ग में गलत तरीके से प्रवेश पा लेता है, तो इससे उन प्रतिभावान और सच्चे खिलाड़ियों का हक मारा जाता है जो पूरी ईमानदारी से मेहनत करते हैं। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस आधुनिक सत्यापन प्रणाली की मदद से ही वे कागजातों की इस चोरी को पकड़ने में सफल रहे हैं और आने वाले समय में होने वाली पंद्रह, सत्रह तथा बीस वर्ष से कम आयु वर्ग की सभी प्रतियोगिताओं में इसी कड़े नियम का पालन किया जाएगा।
आगामी विश्व चैंपियनशिप के चयनात्मक मुकाबलों पर भी रहेगा कड़ा पहरा
महासंघ के प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, खेल को पूरी तरह स्वच्छ बनाने की यह मुहिम यहीं रुकने वाली नहीं है। हाल ही में फर्जी दस्तावेज जमा करने के जुर्म में पांच अन्य पहलवानों को भी लंबे समय के लिए खेल से प्रतिबंधित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में होने वाले सभी महत्वपूर्ण मुकाबलों में यही सख्त डिजिटल जांच प्रक्रिया लागू रहेगी। इसमें आगामी चौदह जून को हरियाणा के सोनीपत में आयोजित होने वाली अंडर-सेवेनटीन विश्व चैंपियनशिप के लिए महिला पहलवानों के चयनात्मक मुकाबले (ट्रायल्स) तथा पंद्रह जून को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में होने वाले पुरुष पहलवानों के चयनात्मक मुकाबले भी शामिल हैं, ताकि देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए केवल सच्चे और योग्य खिलाड़ी ही आगे आ सकें।
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