एजेंसी, भोपाल। Water Conservation : गंगा दशहरा के बेहद पावन और पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के समस्त नागरिकों के नाम एक बेहद विशेष और महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। अपने इस संदेश में मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति के उन महान मूल्यों को याद किया जिसमें नदियों को देवी का साक्षात स्वरूप माना जाता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जल स्रोतों का संरक्षण करना और पानी को बचाना देश के निर्माण का एक बेहद जरूरी हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश राज्य जल सुरक्षा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल करने की दिशा में तेजी से कदम आगे बढ़ा रहा है।
जल संरक्षण में मध्यप्रदेश अग्रणी…
‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत आज जिला धार स्थित देवी सागर तालाब में श्रमदान कर गहरीकरण कार्य का शुभारंभ किया।
जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा सामाजिक अभियान है। आइए, जल बचाने और पारंपरिक जल स्रोतों को… pic.twitter.com/newZZKqk38
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 25, 2026
जल संरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री का बड़ा विजन
मुख्यमंत्री ने अपने विशेष ब्लॉग में गंगा दशहरा के इस पावन पर्व को पानी के प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का एक बड़ा माध्यम बताया है। उन्होंने अपने विचारों को साझा करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश के भीतर जल संरक्षण के इस गंभीर विषय को एक बड़े राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दे दिया है। इसी प्रयास के कारण देश में ‘जल है तो कल है’ के संकल्प को पूरी तरह से जमीन पर उतारा जा सका है। देश में जल शक्ति मंत्रालय का विशेष गठन किए जाने के साथ-साथ नमामि गंगे और अमृत सरोवर जैसी विशाल योजनाओं ने भारत की जल सुरक्षा को एक बिल्कुल नई और सकारात्मक दिशा देने का काम किया है। पूरे देश में अब तक रिकॉर्ड 70 हजार से ज्यादा अमृत सरोवरों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जिसने बारिश के पानी को सहेजने और जमीन के नीचे के पानी यानी भूजल स्तर को सुधारने में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है।
मध्य प्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की बड़ी सफलता
डॉ. मोहन यादव ने राज्य सरकार के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के भीतर सभी प्राकृतिक जल स्रोतों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को बहुत बड़े पैमाने पर और पूरे उत्साह के साथ चलाया जा रहा है। बीते वर्ष 2025 में इस अभियान को मिली बहुत बड़ी कामयाबी के बाद अब साल 2026 में भी इस महत्वपूर्ण अभियान को 19 मार्च से लेकर 30 जून तक पूरी तरह सक्रिय मोड में संचालित किया जा रहा है। इस बड़े अभियान के अंतर्गत राज्य की सभी प्रमुख नदियों, तालाबों, पुराने कुओं और राजा-महाराजाओं के समय की ऐतिहासिक बावड़ियों को नया जीवन देने यानी उनका जीर्णोद्धार करने का काम बहुत तेजी से चल रहा है। राज्य सरकार इस पूरी जनकल्याणकारी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लगभग 2500 करोड़ रुपये का एक बड़ा बजट खर्च कर रही है, जिसमें पूरे प्रदेश के भीतर 10 हजार से भी ज्यादा चेकडैम और स्टॉपडैम की मरम्मत और रखरखाव का काम शामिल किया गया है।
कृषि प्रधान राज्य की प्रगति और सांस्कृतिक धरोहरों का मेल
मुख्यमंत्री के वक्तव्य के अनुसार मध्य प्रदेश मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान राज्य है और यहाँ के गांवों व किसानों की तरक्की सीधे तौर पर पानी की प्रचुर उपलब्धता से जुड़ी हुई है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ‘रिज-टू-वैली’ जैसे आधुनिक मॉडल और नई सिंचाई तकनीकों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचा रही है ताकि किसानों की फसलों पैदावार बढ़े और उनकी आय में भारी इजाफा हो सके। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद प्राचीन बावड़ियां और ऐतिहासिक तालाब हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं। सरकार द्वारा किए जा रहे इन जल स्रोतों के पुनरुद्धार से न केवल ग्रामीण और शहरी इलाकों का जल संकट हमेशा के लिए दूर होगा, बल्कि इन ऐतिहासिक स्थलों के सुंदर होने से राज्य के भीतर पर्यटन के कई नए और बड़े अवसर भी पैदा होंगे।
सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी और पानी चौपाल का आयोजन
अपने इस विशेष ब्लॉग संदेश के आखिरी हिस्से में मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि इस बड़े अभियान को केवल एक सरकारी योजना या प्रशासनिक प्रयास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे समाज का एक सामूहिक संकल्प होना चाहिए। उन्होंने इस मुहिम के अंतर्गत ‘पानी चौपाल’ जैसे महत्वपूर्ण और अनूठे कार्यक्रमों के आयोजन की बात कही, जिसके माध्यम से समाज के हर तबके, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को इस बड़े आंदोलन का सीधा हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। डॉ. यादव ने राज्य की जनता को यह गंभीर संदेश दिया कि यदि हम सभी मिलकर आज अपने जल स्रोतों की रक्षा और उनका संरक्षण करेंगे, तभी हमारी आने वाली भविष्य की पीढ़ियां समृद्ध जल संसाधनों का पूरा लाभ उठा सकेंगी। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से एक बेहद स्वच्छ, खुशहाल और पानी के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान देने की पुरजोर अपील की है।
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