Venezuela Earthquake

वेनेजुएला में दो भीषण भूकंपों से मची भारी तबाही : 164 से अधिक नागरिकों की मौत, राहत के लिए भारत सहित दुनिया के कई बड़े देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ

अंतर्राष्ट्रीय नई दिल्ली राष्ट्रीय वेनेजुएला

एजेंसी, काराकस। Venezuela Earthquake : दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के प्रमुख देश वेनेजुएला से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली खबर सामने आ रही है, जहाँ बुधवार की शाम को लगातार दो विनाशकारी और भीषण भूकंप के झटकों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस भयानक प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक कम से कम 164 निर्दोष लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 971 से भी अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस भीषण तबाही की आधिकारिक पुष्टि करते हुए देश की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्र के नाम एक विशेष संबोधन दिया और पूरे देश में तुरंत ही राष्ट्रीय आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भूकंप के यह दोनों झटके बुधवार की शाम को ठीक छह बजे के बाद महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर क्रमशः 7.2 और 7.5 मापी गई है। इन झटकों का असर इतना खतरनाक था कि राजधानी काराकस के उत्तर में स्थित ला गुएरा क्षेत्र पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गया है, जिसे सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। फिलहाल मलबे को हटाने और जिंदगी की तलाश करने का काम युद्धस्तर पर जारी है, और अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मृतकों का यह आंकड़ा आने वाले समय में और भी ज्यादा बढ़ सकता है।

सेना के जवान मलबे में तलाश रहे जिंदगी और हवाई अड्डे सहित आवश्यक सेवाएं पूरी तरह ठप

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने बताया कि इस अभूतपूर्व आपदा के कारण देश के कई राज्यों और प्रांतों में दर्जनों बहुमंजिला इमारतें और आवासीय परिसर ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। इस विकट परिस्थिति से निपटने के लिए देश के सुरक्षा बलों, स्थानीय पुलिस और सेना के सैकड़ों जवानों को राहत कार्य में झोंक दिया गया है, जो मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए दिन-रात मशक्कत कर रहे हैं। भूकंप की विभीषिका को देखते हुए काराकस के पास स्थित सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को उड़ान सेवाओं के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पूरे शहर में मेट्रो रेल सेवाओं और गैस की मुख्य पाइपलाइनों की आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। प्रशासन ने देश के सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को अगले कुछ दिनों के लिए पूरी तरह से बंद रखने का आदेश जारी किया है, और अब इन स्कूल भवनों का उपयोग बेघर हुए लोगों के लिए राहत शिविरों और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों के रूप में किया जा रहा है। संकट की इस घड़ी में बिजली की लाइनें टूटने और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से ठप हो जाने के कारण राहत कर्मियों को अपनों की तलाश करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकट किया गहरा दुख और हर संभव सहायता का दिया भरोसा

वेनेजुएला में आई इस भयानक प्राकृतिक आपदा और जानमाल के भारी नुकसान पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच और सोशल मीडिया के माध्यम से वेनेजुएला की सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता प्रकट की है। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि वेनेजुएला में आए इस विनाशकारी भूकंप से हुई तबाही की खबर सुनकर वे अत्यंत दुखी और व्यथित हैं। भारत के समस्त नागरिकों की ओर से वे इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। प्रधानमंत्री ने हादसे में घायल हुए सभी लोगों के बहुत जल्द स्वस्थ होने की कामना की और साफ शब्दों में कहा कि इस संकट और बेहद मुश्किल समय में भारत की जनता वेनेजुएला के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है, तथा भारत सरकार इस आपदा से उबरने के लिए हर संभव मानवीय और चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

अमेरिका सहित दुनिया के कई बड़े देशों ने बढ़ाई मदद और कतर की टीमें पहुंचीं ग्राउंड पर

इस भयानक वैश्विक त्रासदी के सामने आने के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी वेनेजुएला की मदद के लिए आगे आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि उनका देश इस संकट की घड़ी में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और वहां फंसे लोगों को बचाने के लिए तत्काल आधुनिक खोज एवं बचाव दल, आपातकालीन चिकित्सा संसाधन और जरूरी मानवीय सहायता सामग्री भेज रहा है। अमेरिका के अलावा लैटिन अमेरिका के अन्य प्रमुख देशों जैसे अर्जेंटीना, ब्राजील, चिली, मैक्सिको, इक्वाडोर और बोलीविया ने भी संकटग्रस्त देश को हर तरह की रसद और तकनीकी सहायता देने की बड़ी पेशकश की है। कार्यवाहक राष्ट्रपति ने बताया कि खाड़ी देश कतर से अत्याधुनिक उपकरणों से लैस विशेष बचाव दल पहले ही वेनेजुएला के लिए रवाना हो चुके हैं, जबकि मैक्सिको और अल साल्वाडोर की टीमें भी बहुत जल्द ज़मीनी स्तर पर राहत कार्य शुरू करने वाली हैं।

लैटिन अमेरिका के कई अन्य देशों तक महसूस किए गए झटके पर सुनामी का खतरा टला

अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण संस्था यानी यूएसजीएस द्वारा जारी की गई वैज्ञानिक रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों भूकंप वेनेजुएला के मोरोन शहर से महज 16 किलोमीटर और सैन फेलिप से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर केंद्रित थे। एक के बाद एक आए इन दोनों झटकों का असर इतना व्यापक और तीव्र था कि इसकी धमक पड़ोसी देश कोलंबिया सहित पूरे लैटिन अमेरिका के कई अन्य हिस्सों में भी साफ तौर पर महसूस की गई। यहाँ तक कि ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में भी भूकंप के झटके लगने के बाद कई बड़ी इमारतों को एहतियात के तौर पर तुरंत खाली कराना पड़ा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सुनामी चेतावनी केंद्रों ने राहत की खबर देते हुए साफ किया है कि समुद्र में किसी भी प्रकार की खतरनाक हलचल नहीं हुई है, इसलिए अब सुनामी आने का कोई भी खतरा नहीं है। स्थानीय प्रशासन ने सभी नागरिकों से धैर्य बनाए रखने, अफवाहों पर ध्यान न देने और सरकारी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने का अनुरोध किया है।

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