एजेंसी, जबलपुर। Rahul Gandhi News : भारतीय राजनीति और कानूनी गलियारों से एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आई है, जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि के एक मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में बेहद कड़ा और निर्णायक मोड़ देखने को मिला है। जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ के समक्ष बुधवार को इस बहुचर्चित मामले की गहन सुनवाई पूरी कर ली गई है। राहुल गांधी की ओर से भोपाल की विशेष जनप्रतिनिधि अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) द्वारा जारी किए गए समन और कानूनी कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने अपना अंतिम फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस बीच राहुल गांधी की कानूनी टीम द्वारा अदालत के समक्ष एक महत्वपूर्ण लिखित स्पष्टीकरण आवेदन भी दाखिल किया गया है, जिसने इस पूरे विवाद को एक नया रुख दे दिया है।
कथित विवादित बयान को लेकर उत्पन्न हुई गलतफहमी पर दी सफाई
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान राहुल गांधी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने पीठ को बहुत ही विस्तार से समझाया कि जिस राजनीतिक भाषण और बयान को मुख्य आधार बनाकर यह मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है, उसमें कहीं भी मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान या उनके सुपुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम या संदर्भ शामिल नहीं था। अदालत में पेश किए गए लिखित आवेदन में साफ तौर पर कहा गया है कि इस पूरे मामले में केवल एक बड़ी गलतफहमी उत्पन्न हुई है और राहुल गांधी के उस बयान का आशय किसी भी तरह से शिकायतकर्ता या उनके परिवार से जोड़कर बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए। कांग्रेस नेता की ओर से इस मामले को पूरी तरह से खारिज करने की मांग अदालत से की गई है।
उच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह चौहान से मांगा लिखित जवाब
राहुल गांधी की तरफ से अचानक आए इस लिखित स्पष्टीकरण और आवेदन पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी तुरंत संज्ञान लिया है। न्यायालय ने मामले की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह चौहान को इस आवेदन पर अपनी लिखित प्रतिक्रिया और जवाब प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ किया है कि शिकायतकर्ता का लिखित पक्ष सामने आने के बाद ही इस पूरे प्रकरण में कोई अंतिम और न्यायसंगत निर्णय लिया जाएगा। इस आदेश के बाद अब कानूनी विशेषज्ञों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायतकर्ता इस नए स्पष्टीकरण पर क्या रुख अपनाते हैं।
साल दो हजार अठारह के चुनावी भाषण से जुड़ा है यह पूरा कानूनी विवाद
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के खिलाफ चल रहा यह पूरा विवाद साल दो हजार अठारह में मध्य प्रदेश में हुए झाबुआ विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान दिए गए एक कथित भाषण से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह चौहान का आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता ने पनामा पेपर्स के बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय घोटाले का उल्लेख किया था और उसमें उनका व उनके परिवार का नाम घसीटते हुए ऐसा वक्तव्य दिया था, जिससे समाज में उनके परिवार की राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को बहुत भारी ठेस पहुंची थी। इसी परिवाद के आधार पर भोपाल की एमपी-एमएलए अदालत ने संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया था, जिसे अब उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।
गुरुवार को आने वाले अदालती फैसले पर टिकी देश भर की निगाहें
इस मामले में दोनों पक्षों की तरफ से कानूनी बहस पूरी तरह से संपन्न हो चुकी है और ऐसी प्रबल संभावना जताई जा रही है कि उच्च न्यायालय इस पूरे समन चुनौती मामले पर गुरुवार को अपना अंतिम फैसला सुना सकता है। कूटनीतिक और राजनीतिक रूप से यह दिन इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संयोगवश गुरुवार के ही दिन राहुल गांधी को भोपाल की निचली जनप्रतिनिधि अदालत में भी व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में उच्च न्यायालय का जो भी आदेश सुबह सामने आएगा, उसका सीधा असर निचली अदालत की कार्यवाही पर पड़ना तय है, यही वजह है कि देश भर के राजनेताओं और कानूनविदों की निगाहें इस आने वाले अदालती फैसले पर टिकी हुई हैं।
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