एजेंसी, नई दिल्ली। VB G RAM G Employment Scheme : केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू करते हुए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 यानी वीबी-जी रैम-जी को लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ अब ग्रामीण परिवारों को पहले की तुलना में अधिक रोजगार अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह बदलाव केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय स्तर पर आय बढ़ाने और आजीविका के नए अवसर तैयार करने में भी मदद करेगा। नई व्यवस्था के तहत अब पात्र परिवारों को एक वर्ष में 100 दिन के बजाय 125 दिन रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही मजदूरी दरों में भी वृद्धि की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की आय में सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
🔹 VB-G RAM G Act comes into force across the country from today
🔹 National launch of VB-G RAM G to be held in Tirupati, Andhra Pradesh on 2 July
🔹 Union Minister Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj), Chief Minister N. Chandrababu Naidu (@ncbn) and Deputy Chief…
— PIB India (@PIB_India) July 1, 2026
रोजगार अवधि बढ़ने से ग्रामीण परिवारों को मिलेगी अतिरिक्त सहायता
नई योजना के सबसे बड़े बदलावों में रोजगार अवधि बढ़ाना शामिल है। पहले जहां निर्धारित अवधि तक सीमित रोजगार उपलब्ध कराया जाता था, वहीं अब परिवारों को अतिरिक्त 25 दिन काम मिलने की व्यवस्था की गई है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी बेरोजगारी का दबाव कम होगा और लोगों को स्थानीय स्तर पर काम के अधिक अवसर मिलेंगे। ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों के अनुसार रोजगार अवधि बढ़ने का उद्देश्य ऐसे परिवारों को राहत देना भी है जो खेती के अलावा मजदूरी आधारित आय पर निर्भर रहते हैं। इससे गांवों से अस्थायी पलायन में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
मजदूरी दर में बढ़ोतरी, औसत दिहाड़ी हुई 327.4 रुपये
नई व्यवस्था के साथ मजदूरी दरों में भी संशोधन किया गया है। देशभर में औसत दिहाड़ी 298.8 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 327.4 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। इस तरह औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि हुई है। सरकार का कहना है कि मजदूरी बढ़ाने का उद्देश्य बढ़ती लागत और ग्रामीण परिवारों की आय क्षमता को ध्यान में रखना है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में वास्तविक भुगतान स्थानीय मानकों और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार तय हो सकता है।
पुराने जॉब कार्ड से जारी रहेगा काम
नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद तत्काल प्रभाव से सभी लोगों को नए कार्ड लेने की आवश्यकता नहीं होगी। जिन लाभार्थियों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वे नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड मिलने तक पुराने जॉब कार्ड के आधार पर काम जारी रख सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे संक्रमण अवधि के दौरान काम प्रभावित नहीं होगा और लोगों को रोजगार पाने में किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा नहीं आएगी। नए कार्ड चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाएंगे।
ग्राम पंचायतों की भूमिका पहले की तरह बनी रहेगी
नई योजना में स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायतों की भूमिका को बरकरार रखा गया है। पहले की तरह ग्राम पंचायतें ही स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्यों का चयन करेंगी और उनकी निगरानी भी करेंगी। योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का विकास, कृषि से जुड़े कार्य, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का निर्माण और महिला सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर योजना संचालन से अधिक प्रभावी परिणाम सामने आ सकते हैं।
राज्यों को दिया गया बड़ा वित्तीय समर्थन
नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। इसका उद्देश्य मजदूरी भुगतान को समय पर सुनिश्चित करना और परियोजनाओं को बिना रुकावट जारी रखना बताया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार अधिकांश राज्यों ने योजना के लिए बजट प्रावधान कर दिए हैं और कई राज्यों ने अपनी स्थानीय कार्यान्वयन व्यवस्था भी जारी कर दी है।
कुछ राज्यों में केंद्र सरकार उठाएगी अधिक खर्च
नई व्यवस्था के तहत खर्च का वहन केंद्र और राज्य सरकारें साझा रूप से करेंगी। सामान्य राज्यों में कुल व्यय का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारें वहन करेंगी। वहीं विशेष श्रेणी वाले राज्यों और कुछ क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में योजना के लिए 90 प्रतिशत तक खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।
खेती के व्यस्त मौसम के लिए भी बनाया गया प्रावधान
नई व्यवस्था में कृषि गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं। कानून के अनुसार बुवाई और कटाई जैसे व्यस्त कृषि मौसम के दौरान राज्य सरकारें आवश्यकता के अनुसार वर्ष में अधिकतम 60 दिन तक योजना के अंतर्गत कार्यों को सीमित कर सकेंगी। सरकार का कहना है कि इससे खेती और ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
तिरुपति से होगा राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ
इस कानून का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ 2 जुलाई को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के मुक्कावरिपल्ली गांव से किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और लोगों को नई व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। सरकार का कहना है कि योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आय और विकास के अवसरों को पहले की तुलना में अधिक व्यापक बनाने का प्रयास किया जाएगा।
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