एजेंसी, वॉशिंगटन। US Russia Bill Tariff : रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध के मध्य अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट ने रूस पर आर्थिक दबाव अत्यधिक बढ़ाने के उद्देश्य से एक बेहद कठोर प्रतिबंध विधेयक को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। सीनेट में भारी बहुमत से पारित किए गए इस विधेयक में उन देशों को निशाने पर लिया गया है जो रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात कर रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून के अंतर्गत रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले दुनिया के 5 प्रमुख खरीदार देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक का भारी सीमा शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल किया गया है। सीनेट ने लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नामक इस ऐतिहासिक विधेयक को 11 के मुकाबले 86 वोटों के भारी अंतर से पारित कर दिया है। सीनेट से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस विधेयक को अंतिम स्वीकृति के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा।
#RussiaSanctionsBill US Senate has passed The bipartisan legislation, 86-11, to penalise countries that continue to buy Russian oil, gas and other exports. Pushed by the late Lindsey Graham the bill seeks to impose 100% tariffs on countries like India and China. It will now go to…
— Shereen Bhan (@ShereenBhan) August 8, 2026
भारत और चीन समेत 5 देशों पर मंडराया भारी शुल्क का खतरा
प्रस्तावित नए कानून के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति को यह विशेष अधिकार प्राप्त होगा कि वह रूस से सबसे ज्यादा मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले 5 प्रमुख देशों से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लागू कर सकें। इस सूची में भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन और सांसदों का आरोप है कि ये देश रूसी ऊर्जा का भारी मात्रा में आयात करके अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को की अर्थव्यवस्था को आर्थिक मजबूती दे रहे हैं, जिससे रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाइयों को जारी रखने का वित्तीय समर्थन मिल रहा है।
व्लादिमीर पुतिन और रूसी वित्तीय संस्थानों पर कसता शिकंजा
इस नए विधेयक में केवल व्यापारिक प्रतिबंध ही शामिल नहीं हैं, बल्कि रूसी नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया गया है। कानून के प्रावधानों के तहत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वहां के बड़े उद्योगपतियों, प्रभावशाली कारोबारियों और प्रमुख वित्तीय संस्थानों को सीधे तौर पर प्रतिबंधित सूची में डाला जाएगा। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य रूस के राजस्व स्रोतों को पूरी तरह सुखा देना और उसकी युद्ध लड़ने की वित्तीय क्षमता को पूरी तरह कमजोर बनाना है।
ईरान पर भी प्रतिबंधों की अवधि 2031 तक बढ़ाने का फैसला
रूस के खिलाफ सख्त कदम उठाने के साथ-साथ इस विधेयक में ईरान के खिलाफ भी कड़े आर्थिक प्रावधानों को आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत वर्ष 1996 के ईरान प्रतिबंध अधिनियम की समय सीमा को आगामी वर्ष 2031 तक के लिए विस्तारित करने की मंजूरी दी गई है। इस नियम के तहत जो भी विदेशी कंपनियां या संस्थान ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करेंगे, उनके खिलाफ अमेरिका द्वारा दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
द्विदलीय समर्थन और दिवंगत सीनेटर का योगदान
इस विधेयक की सबसे खास बात यह रही कि इसे अमेरिका की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन का व्यापक समर्थन मिला। यह विधेयक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल द्वारा तैयार किया गया था। सीनेटर ग्राहम के निधन के बाद भी दोनों दलों के नेताओं ने मिलकर इस बिल को पारित कराने का प्रयास जारी रखा। सदन में चर्चा के दौरान यह बात प्रमुखता से रखी गई कि यह कानून रूसी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे देशों को अमेरिका के साथ व्यापार करने या रूस से सस्ता तेल खरीदने में से किसी एक विकल्प को चुनने पर मजबूर कर देगा।
राष्ट्रपति को असीमित शक्तियां देने पर उठे विरोध के स्वर
हालांकि इस विधेयक को लेकर अमेरिकी संसद के कुछ सदस्यों ने अपनी चिंताएं भी व्यक्त की हैं। कुछ सांसदों का मानना है कि यह कानून राष्ट्रपति को सीमा शुल्क के क्षेत्र में अत्यधिक शक्तियां प्रदान कर देगा, जिनका उपयोग वह अपनी मनचाही व्यापार नीतियों को लागू करने के लिए कर सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें अमेरिकी प्रतिनिधि सभा पर टिकी हैं, जहां 31 अगस्त से सत्र दोबारा शुरू होने वाला है। प्रतिनिधि सभा में पारित होने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि 100 प्रतिशत शुल्क का यह कड़ा प्रावधान किस रूप में प्रभावी होगा।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित नए विधेयक का मुख्य नाम क्या है?
उत्तर: इस विधेयक का नाम ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है, जिसे सीनेट में 86 के मुकाबले 11 के भारी मतों से मंजूरी मिली।
प्रश्न 2: प्रस्तावित 100% आयात शुल्क की जद में कौन से 5 देश आ सकते हैं?
उत्तर: इस सूची में भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं, जो रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और गैस का आयात करते हैं।
प्रश्न 3: अमेरिका का इन 5 देशों पर 100% शुल्क लगाने के पीछे क्या तर्क है?
उत्तर: अमेरिका का आरोप है कि ये देश रूसी ऊर्जा खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, जिससे यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को वित्तीय मदद मिल रही है।
प्रश्न 4: इस विधेयक में रूसी राष्ट्रपति और वित्तीय संस्थानों के लिए क्या प्रावधान हैं?
उत्तर: विधेयक के तहत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, बड़े रूसी कारोबारियों और प्रमुख वित्तीय संस्थानों पर सीधे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है।
प्रश्न 5: इस कानून से ईरान पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका में इसका क्या विरोध है?
उत्तर: इसके तहत 1996 के ईरान प्रतिबंध अधिनियम को 2031 तक बढ़ा दिया गया है, हालांकि कुछ अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति को असीमित शुल्क शक्तियां देने पर चिंता जताई है।
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