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उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार : योगी सरकार में 6 नए चेहरों की एंट्री, जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की बड़ी कवायद

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एजेंसी, लखनऊ। UP Cabinet Expansion : उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से रविवार का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार का दूसरा बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार संपन्न हुआ। राजधानी लखनऊ के जन भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 6 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार में न केवल नए चेहरों को जगह मिली है, बल्कि दो मौजूदा राज्य मंत्रियों के बेहतर कार्य को देखते हुए उन्हें पदोन्नत कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस कदम को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

प्रमुख चेहरों का समावेश और पदोन्नति

मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे पहला नाम भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का रहा, जिन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के कद्दावर नेता माने जाने वाले चौधरी पहले भी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। उनके साथ ही समाजवादी पार्टी से आए बागी नेता और रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज कुमार पांडे को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। मनोज पांडे का शामिल होना विपक्षी खेमे में सेंधमारी और ब्राह्मण समाज के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने राज्य मंत्री अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर को उनके समर्पण के लिए प्रमोशन देते हुए अब राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बना दिया है।

चार नए राज्य मंत्रियों की नियुक्ति

सरकार में चार नए राज्य मंत्रियों को भी शामिल किया गया है, जिनमें सामाजिक संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है:

  • कृष्णा पासवान: फतेहपुर की खागा सीट से चार बार की विधायक और दलित समाज का प्रमुख महिला चेहरा।

  • कैलाश सिंह राजपूत: कन्नौज की तिर्वा विधानसभा से विधायक, जिन्हें मध्य यूपी में राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है।

  • सुरेंद्र दिलेर: अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित वर्ग के प्रभावशाली नेता।

  • हंसराज विश्वकर्मा: वाराणसी से एमएलसी और अति पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं।

सामाजिक इंजीनियरिंग और राजनीतिक समीकरण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फेरबदल के जरिए भाजपा ने ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का एक मजबूत ढांचा तैयार किया है। नए मंत्रियों के चयन में दलित, ओबीसी, जाट और ब्राह्मण वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देकर विपक्ष के गठबंधन की काट खोजने का प्रयास किया गया है। उत्तर प्रदेश में मंत्रियों की अधिकतम सीमा 60 है, और इस विस्तार के बाद योगी मंत्रिमंडल अब अपनी पूर्ण क्षमता के करीब पहुंच गया है।

2027 की चुनावी तैयारी का संकेत

जन भवन में आयोजित इस समारोह के दौरान समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया। जानकारों का कहना है कि यह केवल विभागों का बंटवारा नहीं है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए तैयार किया गया एक ‘रोडमैप’ है। भाजपा इस विस्तार के माध्यम से क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने और हर वर्ग को शासन में भागीदारी का अहसास कराने की कोशिश कर रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन नए मंत्रियों को किन विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है।

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