एजेंसी, भोपाल। Twisha Sharma Case : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए बहुचर्चित पूर्व मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में एक बड़ा और अहम घटनाक्रम देखने को मिला है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद मंगलवार को मुख्य आरोपी पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी शोभना भलावे की अदालत में लगभग एक घंटे तक चली इस लंबी और गहमागहमी भरी सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब मां और बेटे दोनों को आगामी सोलह जून तक जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा। अदालत का यह अहम फैसला तब आया जब केंद्रीय जांच एजेंसी ने आगे की कस्टोडियल पूछताछ की मांग नहीं की और कहा कि फिलहाल उन्हें पुलिस रिमांड की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर वे दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
कठघरे में पूर्व जज के आक्रामक तेवर और सम्मान की मांग
अमूमन अदालत के कटघरे में आरोपी सहमे और डरे हुए नजर आते हैं, लेकिन मंगलवार को अदालत कक्ष का नजारा बिल्कुल इसके विपरीत था। पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह पूरे आत्मविश्वास और आक्रामक तेवरों के साथ कठघरे में खड़ी नजर आईं। सुनवाई की शुरुआत होते ही हाथ में पानी की बोतल पकड़े गिरिबाला ने अपने नाम के सीधे उच्चारण पर कड़ी आपत्ति जता दी। उन्होंने भरे कोर्टरूम में सवाल उठाया कि उनके नाम के आगे ‘श्रीमती’ या ‘मैडम’ जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने मामले को लेकर चल रहे मीडिया ट्रायल पर भी गहरी नाराजगी और गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने अदालत से कहा कि यह मीडिया ट्रायल तुरंत बंद होना चाहिए क्योंकि मीडिया की लगातार दखलअंदाजी से आम लोगों की सोच पर गहरा असर पड़ रहा है और उनके जहां भी जाने से पहले मीडिया वहां पहुंच जाती है, जिससे उनकी जान को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सीन रीक्रिएशन की प्रक्रिया और गोपनीयता पर उठे कड़े सवाल
अदालती कार्रवाई के दौरान पूर्व जज ने एक दिन पहले सोमवार को सीबीआई द्वारा बागमुगालिया स्थित उनके घर पर किए गए सीन रीक्रिएशन के तौर-तरीकों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। गौरतलब है कि जांच टीम ने करीब अस्सी किलो वजन वाले एक डमी या पुतले का इस्तेमाल करके घटना के दिन का पूरा सीन दोहराया था ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके और गवाहों के बयानों की पड़ताल की जा सके। गिरिबाला ने अदालत में आरोप लगाया कि जांच एजेंसी ने जानबूझकर उनकी गाड़ी को घर से तीन मकान पहले ही रोक दिया और उन्हें वहां से पैदल उतारा गया ताकि मीडिया वाले आसानी से उनके वीडियो और फुटेज बना सकें। उनका तर्क था कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए गाड़ी को सीधे घटनास्थल के अंदर ले जाया जा सकता था या फिर हरे रंग के पर्दे का इस्तेमाल किया जा सकता था। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज लीक होने के मामले में उन्होंने अपनी तरफ से स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनकी ओर से मीडिया को कोई भी फुटेज जारी नहीं किया गया है।
वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक और मारपीट के गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष का माहौल उस वक्त और भी ज्यादा गरमा गया जब गिरिबाला सिंह ने त्विषा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील अनुराग श्रीवास्तव पर एक बेहद गंभीर आरोप लगा दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि जबलपुर कोर्ट परिसर में उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ मारपीट की गई थी और उन्होंने समर्थ की जान को खतरा बताते हुए अदालत से कड़ी सुरक्षा देने की गुहार लगाई। इन आरोपों का कड़ा पलटवार करते हुए वकील अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि जबलपुर अदालत परिसर में हर तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, अगर मारपीट की ऐसी कोई भी घटना वहां घटी है, तो अदालत को तुरंत फुटेज निकालकर उसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही वकील ने पलटकर यह तीखा सवाल भी दाग दिया कि समर्थ को पहले अदालत को यह साफ करना चाहिए कि जब वह पुलिस से भाग रहा था या फरारी काट रहा था, तो वह जबलपुर कोर्ट में कहां और किस मकसद से छिपा बैठा था।
जेल में अलग बैरक में रखने के निर्देश और पृष्ठभूमि
दोनों पक्षों की लंबी और तीखी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह का जेल वारंट जारी कर दिया। गिरिबाला सिंह के न्यायिक पृष्ठभूमि और अदालत में जताए गए जान के खतरे को गंभीरता से लेते हुए, मजिस्ट्रेट ने भोपाल सेंट्रल जेल प्रशासन को यह विशेष निर्देश दिया है कि इन दोनों आरोपियों को जेल में अन्य आम कैदियों से बिल्कुल अलग और सुरक्षित बैरक में रखा जाए। सुनवाई खत्म होने के तुरंत बाद भारी पुलिस सुरक्षा घेरे के बीच दोनों को भोपाल जेल रवाना कर दिया गया। आपको बता दें कि तैंतीस वर्षीय पूर्व मॉडल त्विषा शर्मा की मौत बीते बारह मई को उनके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई थी। शुरुआत में इसे आत्महत्या का रूप दिया गया था, लेकिन मृतका के परिवार वालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या करने के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था और अब सीबीआई इस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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