एजेंसी, भोपाल। Twisha Sharma Bhopal : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दहेज प्रताड़ना की शिकार हुईं नोएडा की निवासी और पूर्व मॉडल व अभिनेत्री त्विषा शर्मा का रविवार को बेहद गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। मौत के ठीक 13वें दिन दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के डॉक्टरों की एक विशेष टीम द्वारा शव का दोबारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद पार्थिव देह को भोपाल लाया गया। भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर शाम पांच बजे के बाद पूरे रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जहां त्विषा के भाई मेजर हर्षित ने मुखाग्नि दी। इस दौरान श्मशान घाट पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले और त्विषा की मां समेत परिवार के अन्य सदस्य फूट-फूट कर रो पड़े। मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे आज अपनी मासूम बेटी को विदाई दे रहे हैं, जो बड़े सपनों के साथ ससुराल आई थी। उन्होंने नम आंखों से समाज और कानून के सामने न्याय की गुहार लगाई है। गौरतलब है कि 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में त्विषा का शव उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था, जिसके बाद मायके पक्ष ने दहेज हत्या का आरोप लगाया है, जबकि ससुराल पक्ष इसे नशे की लत से जुड़ा मामला बता रहा है। पुलिस ने इस मामले में मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। फरार चल रहे वकील पति समर्थ सिंह को पुलिस ने शुक्रवार को जबलपुर से गिरफ्तार कर सात दिन के रिमांड पर लिया है।
#WATCH | Madhya Pradesh | The body of Twisha Sharma is being taken from the AIIMS Bhopal mortuary for her last rites
The second autopsy of Twisha Sharma was conducted today by senior doctors of AIIMS Delhi, following the directions of the Madhya Pradesh HC pic.twitter.com/BA5jNxY1iT
— ANI (@ANI) May 24, 2026
उच्चतम न्यायालय के स्वतः संज्ञान के बाद बचाव पक्ष की सफाई
इस पूरे मामले ने उस समय एक बड़ा मोड़ ले लिया जब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हो रहे प्रशासनिक भेदभाव और कमियों को देखते हुए खुद ही इस पर स्वतः संज्ञान ले लिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की विशेष बेंच इस बेहद संवेदनशील मामले पर 25 मई को सुनवाई करने जा रही है। उच्चतम न्यायालय की इस सख्ती के बाद आरोपियों के वकील ज्ञानेंद्र शर्मा ने इंदौर में मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि उनके मुवक्किल शुरुआत से ही पुलिस प्रशासन की जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और वे सही समय आने पर शीर्ष अदालत के सामने अपनी बात रखेंगे। बचाव पक्ष के वकील ने उन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके सबूतों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करने का प्रयास कर रही हैं।
जमानत रद्द करने की मांग और अदालत में कानूनी लड़ाई
त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा और मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने जिला अदालत द्वारा आरोपी सास गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत का कड़ा विरोध किया है। जमानत को पूरी तरह रद्द कराने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिन पर 25 मई यानी सोमवार को ही महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। सुनवाई से ठीक पहले बचाव पक्ष के वकील ने मीडिया के सामने दलील दी कि उनकी मुवक्किल ने अदालत द्वारा तय की गई जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके पक्ष को मामले की जांच सीबीआई से कराने या मृतका के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने पर कभी कोई आपत्ति नहीं थी।
पारिवारिक विवाद और गर्भधारण को लेकर नए दावे
इस पूरे विवाद के बीच बचाव पक्ष के वकील ज्ञानेंद्र शर्मा ने पति-पत्नी के निजी रिश्तों को लेकर एक नया दावा पेश किया है। उन्होंने कहा कि पति समर्थ सिंह और त्विषा शर्मा के बीच वैवाहिक जीवन में सब कुछ पूरी तरह सामान्य था। वकील के अनुसार, शादी के बाद त्विषा गर्भवती हुई थीं, लेकिन वह इस बच्चे को जन्म देने के पक्ष में नहीं थीं, जबकि उनके पति समर्थ और सास गिरिबाला सिंह चाहते थे कि वह बच्चे को दुनिया में लाएं। बचाव पक्ष ने मृतका के परिवार द्वारा लगाए गए 20 लाख रुपये के दहेज की मांग के आरोपों को विरोधाभासों से भरा हुआ बताया है और दावा किया है कि यह आत्महत्या का मामला है, हालांकि आत्महत्या के असली कारणों पर वकील ने आगे कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
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