एजेंसी, मुंबई। SRK Mannat bungalow expansion : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शाहरुख खान को उनके मुंबई स्थित प्रसिद्ध बंगले ‘मन्नत’ के निर्माण और विस्तार कार्य को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ी राहत मिली है। उच्चतम न्यायालय ने मन्नत बंगले के विस्तार और नवीनीकरण के लिए मिली तटीय विनियमन क्षेत्र यानी सीआरजेड मंजूरी को चुनौती देने वाली एक विशेष याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए न केवल याचिका को निरस्त किया, बल्कि इस विधिक लड़ाई को शुरू करने वाले एक्टिविस्ट की मंशा और उनकी नेकनीयती पर भी बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
The Supreme Court dismissed a petition challenging the renovation of actor Shah Rukh Khan’s Mumbai residence, Mannat. The plea alleged that mandatory environmental clearances were not obtained for adding two floors. Refusing to entertain the petition, the court observed that it… pic.twitter.com/7ptF2qbnyI
— IANS (@ians_india) July 14, 2026
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय विशेष बेंच ने सुनाया फैसला
इस हाई-प्रोफाइल मामले की विस्तृत कानूनी सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय विशेष बेंच के समक्ष संपन्न हुई। अदालत के पटल पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायाधीशों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्हें इस मामले में याचिका दायर करने वाले व्यक्ति की नीयत और वास्तविक जनहित पर बहुत गहरा शक है। शीर्ष अदालत ने यह साफ कर दिया कि कानून के दायरे में रहकर किए जाने वाले किसी भी निर्माण कार्य में इस तरह का अनुचित हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।
मन्नत बंगले में दो नए फ्लोर जोड़ने के लिए मिली थी सीआरजेड क्लीयरेंस
दरअसल, पूरा कानूनी विवाद अभिनेता शाहरुख खान के बांद्रा स्थित समुद्र के सामने बने मन्नत बंगले में 2 नए आवासीय फ्लोर (आवासीय मंजिल) जोड़ने की निर्माण योजना से संबंधित है। इस निर्माण कार्य के लिए सक्षम सरकारी प्राधिकारियों द्वारा आवश्यक कोस्टल रेगुलेशन जोन क्लीयरेंस प्रदान की गई थी। इसके खिलाफ मुंबई के सामाजिक कार्यकर्ता संतोष डौंडकर ने सबसे पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उस समय भी इस दावे में कोई कानूनी दम नहीं पाया था और अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने एनजीटी के उसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अपील दायर की थी।
अगर कोई अपने घर में और मंजिल बनवाना चाहता है तो यह उसकी निजी मर्जी है: सुप्रीम कोर्ट
सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से उपस्थित हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने दलील दी कि इस पूरे मामले को सिर्फ इसलिए अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यह देश के एक बहुत बड़े और नामचीन फिल्म स्टार से जुड़ा हुआ है। इस दलील पर बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत ऐसी किसी भी बाहरी बात या नाम से प्रभावित नहीं होती है। माननीय न्यायाधीशों ने रेखांकित किया कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी जांच में पाया था कि इस निर्माण में लागू कानूनों का काफी हद तक पूरी तरह पालन हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति नियमानुसार अपने घर में और मंजिल बनवाना चाहता है, तो यह उसकी अपनी निजी मर्जी है, इसमें किसी भी पड़ोसी या बाहरी व्यक्ति को हस्तक्षेप करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
आदर्श हाउसिंग घोटाले के खुलासे का संदर्भ भी नहीं आया अदालत के काम
वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने अपनी दलीलों को मजबूत करने के लिए अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता संतोष डौंडकर एक जाने-माने एक्टिविस्ट हैं जिन्होंने पूर्व में देश के चर्चित आदर्श हाउसिंग स्कैम का पर्दाफाश करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एनजीटी ने भी पूर्व में याचिकाकर्ता की नेकनीयती पर कोई उंगली नहीं उठाई थी। हालांकि, देश की सबसे बड़ी अदालत इन तर्कों से बिल्कुल भी सहमत नहीं हुई। बेंच ने पुराने मामलों के संदर्भ को वर्तमान केस से पूरी तरह अलग माना और याचिकाकर्ता की मंशा पर संदेह बरकरार रखते हुए इस अपील को तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया, जिससे शाहरुख खान के बंगले के विस्तार का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है।
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