Sehore Tribal Protest

सीहोर में आदिवासियों का बड़ा आंदोलन स्थगित : सीएम मोहन यादव ने दिए हाई-लेवल जांच के निर्देश, कोनाझिर डिमोलिशन विवाद पर प्रशासन से बनी सहमति

प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश सीहोर

एजेंसी, सीहोर। Sehore Tribal Protest : मध्यप्रदेश के सीहोर जिले अंतर्गत आने वाले बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आदिवासियों के आशियाने तोड़े जाने को लेकर गरमाया सियासी और सामाजिक माहौल फिलहाल शांत हो गया है। ग्राम कोनाझिर में वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की डिमोलिशन कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी समाज ने अपना धरना और प्रस्तावित पदयात्रा स्थगित करने का औपचारिक ऐलान किया है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इस पूरे विवाद को बेहद गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के सीधे आदेश जारी करने के बाद प्रदर्शनकारियों ने यह सकारात्मक कदम उठाया है। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच मध्यस्थता कराने में स्थानीय भाजपा विधायक रमाकांत भार्गव ने अहम भूमिका निभाई, जिनकी मौजूदगी में घंटों चली मैराथन वार्ता के बाद गतिरोध समाप्त हुआ।

कोनाझिर में मकान तोड़े जाने और अधिकारियों के रवैये पर भड़का था गुस्सा

इस पूरे विवाद की शुरुआत बुधनी के कोनाझिर गांव में वन विकास निगम और स्थानीय अमले द्वारा की गई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद हुई थी। आदिवासियों का आरोप था कि नियमों की अनदेखी करते हुए उनके पक्के व कच्चे मकानों को जबरन ढहा दिया गया। इसके अलावा स्थानीय रहवासियों ने वन विकास निगम के मैदानी अधिकारियों पर कार्रवाई के दौरान अभद्र व्यवहार और ज्यादती करने के भी गंभीर आरोप लगाए थे। अपने आशियाने उजड़ने और प्रशासनिक तानाशाही के विरोध में आदिवासी समाज एकजुट हो गया और उन्होंने व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। समाज के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को न्याय देने की मांग उठाई थी।

विधायक रमाकांत भार्गव की मौजूदगी में 2 घंटे चली निर्णायक बैठक

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों से सीधे संवाद की पहल की। आदिवासी समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि शिव राज भैया के नेतृत्व में 16 सदस्यीय एक उच्चस्तरीय डेलिगेशन बातचीत की मेज पर आया। स्थानीय विधायक रमाकांत भार्गव, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और आदिवासी प्रतिनिधियों के बीच करीब 2 घंटे तक बिंदुवार चर्चा हुई। बैठक के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने अधिकारियों के समक्ष अपना दर्द और मांगें रखीं। विधायक भार्गव ने समाज को आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासियों के हितों को लेकर संवेदनशील हैं और उन्होंने निष्पक्ष जांच के सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार के इस भरोसे और प्रशासनिक सहमति के बाद प्रतिनिधिमंडल ने चल रहे आंदोलन को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया।

प्रदर्शनकारियों को बसों से सुरक्षित घर भेजा, जांच रिपोर्ट पर टिकी नजरें

समझौता होने के बाद प्रशासन ने धरना स्थल पर मौजूद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को उनके पैतृक गांवों तक सकुशल पहुंचाने के लिए तुरंत विशेष बसों और वाहनों की व्यवस्था की। आंदोलन खत्म होने के बाद सभी ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से अपने घरों के लिए रवाना हो गए। हालांकि, आदिवासी समाज के नेताओं ने साफ किया है कि आंदोलन सिर्फ स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। समाज को अब राज्य सरकार द्वारा गठित की जाने वाली उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। आदिवासियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, जिसमें निर्दोष ग्रामीणों के मकान तोड़ने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। अब देखना यह होगा कि जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और न्याय के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :

प्रश्न 1: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोनाझिर गांव में आदिवासियों के आंदोलन का मुख्य कारण क्या था?

उत्तर 1: बुधनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोनाझिर में वन विकास निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा आदिवासियों के मकानों को कथित रूप से अवैध बताकर बुलडोजर से ढहा दिया गया था। साथ ही वन अधिकारियों पर महिलाओं व ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे, जिसके विरोध में यह आंदोलन शुरू हुआ था।

प्रश्न 2: आदिवासी समाज ने अपनी पदयात्रा और धरना प्रदर्शन क्यों स्थगित किया?

उत्तर 2: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मामले का त्वरित संज्ञान लेते हुए पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच के आदेश देने और स्थानीय प्रशासन से लिखित सहमति बनने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया।

प्रश्न 3: इस विवाद को सुलझाने में किस जनप्रतिनिधि और मध्यस्थ दल की मुख्य भूमिका रही?

उत्तर 3: बुधनी से भाजपा विधायक रमाकांत भार्गव की मौजूदगी में आदिवासी समाज के प्रमुख शिव राज भैया के नेतृत्व वाले 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लगभग दो घंटे तक बैठक कर मांगों पर सहमति बनाई।

प्रश्न 4: आंदोलन स्थगित होने के बाद प्रदर्शनकारियों को वापस भेजने के लिए प्रशासन ने क्या व्यवस्था की?

उत्तर 4: जिला प्रशासन ने धरना स्थल पर मौजूद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को सुरक्षित और ससम्मान उनके गृह गांवों तक पहुंचाने के लिए विशेष बसों और परिवहन वाहनों की व्यवस्था की।

प्रश्न 5: आदिवासी समाज की मुख्य मांगें क्या हैं जिन पर जांच समिति विचार करेगी?

उत्तर 5: समाज की मुख्य मांगें तोड़े गए मकानों का उचित मुआवजा, बेघर परिवारों का पुनर्वास, वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत आवासीय पट्टों की मान्यता और ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले वन अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

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