एजेंसी, भोपाल। Sardar Sarovar Dam Dispute : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में देश को एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात की घोषणा करते हुए बताया कि राज्यों के बीच आपसी समन्वय से एक बेहद पुराने और जटिल मसले का शांतिपूर्ण हल निकाल लिया गया है। देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित की गई एक उच्च स्तरीय बैठक में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लगभग 3 दशक से लगातार चले आ रहे पुनर्वास एवं पुनर्बसाहट व्यय विवाद का सर्वसम्मति से पूर्ण समाधान कर लिया गया है। इस ऐतिहासिक और बड़े निर्णय से मध्यप्रदेश सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय भार में उल्लेखनीय रूप से भारी कमी आएगी, जिससे राज्य के खजाने को बड़ी राहत मिलेगी।
सरदार सरोवर परियोजना पर हुए ऐतिहासिक समझौते से सहकारी संघवाद होगा सुदृढ़ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
⏩अब प्रदेश को करना होगा केवल 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान
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संवाद और सहमति से निकला दशकों पुराने विवाद का हल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस निर्णय पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, संवाद और आपसी सहमति के जरिए बेहद जटिल विषयों के समाधान का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करता है। उन्होंने देश के विकास में इस महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री शाह के प्रति मध्य प्रदेश की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मामले की पृष्ठभूमि की जानकारी देते हुए बताया कि भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा फरवरी 2026 में दिए गए एक कानूनी अभिमत के अनुसार, सरदार सरोवर परियोजना के पुनर्वास व्यय में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत निर्धारित की गई थी। अगर यह पुराना नियम लागू रहता, तो इसके अनुसार मध्यप्रदेश को लगभग 1500 करोड़ रुपये का एक बड़ा भुगतान गुजरात राज्य को करना पड़ता, जो कि प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन के लिए एक बड़ा बोझ साबित होता।
दिल्ली की बैठक में सर्वसम्मति से कम हुई मध्यप्रदेश की वित्तीय हिस्सेदारी
देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान के शीर्ष प्रतिनिधियों की इस विशेष बैठक में सभी पक्षों ने बेहद सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। इस दौरान गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से एक नया फार्मूला तैयार किया गया, जिसके तहत मध्यप्रदेश की वित्तीय हिस्सेदारी को 31.98 प्रतिशत से सीधे घटाकर महज 16.17 प्रतिशत निर्धारित कर दिया गया। हिस्सेदारी में की गई इस भारी कटौती के परिणामस्वरूप अब मध्यप्रदेश को केवल 231.80 करोड़ रुपये की शेष राशि का भुगतान करना होगा। इस प्रकार से इस नए और संशोधित निर्णय ने मध्यप्रदेश सरकार को कुल 1268 crore रुपये से अधिक की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक वित्तीय राहत प्रदान की है, जो राज्य के अन्य विकास कार्यों में काम आ सकेगी।
चारों सहभागी राज्यों की नई हिस्सेदारी का गणित हुआ तय
इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि परियोजना से जुड़े सभी चारों राज्यों की नई हिस्सेदारी का गणित पूरी तरह से साफ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नए वित्तीय समझौते के तहत गुजरात की हिस्सेदारी को पहले के 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर अब सीधे 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके विपरीत, अन्य सहभागी राज्यों के वित्तीय बोझ को कम करते हुए महाराष्ट्र की हिस्सेदारी को 15.15 प्रतिशत से घटाकर 7.66 प्रतिशत तय किया गया है, और राजस्थान की हिस्सेदारी को भी 2.31 प्रतिशत से घटाकर मात्र 1.17 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इस पूरे नए संशोधन के आधार पर अब गुजरात राज्य को अन्य सहभागी राज्यों से कुल मिलाकर 553.43 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होगी, जिससे पुनर्वास के कार्यों को और गति मिलेगी।
मध्यप्रदेश की उन्नति में नर्मदा और सरदार सरोवर का बड़ा योगदान
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास में इस जल परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नर्मदा एवं सरदार सरोवर परियोजना से मध्यप्रदेश को उत्पादित होने वाली कुल विद्युत का 57 प्रतिशत का एक बहुत बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है। आंकड़ों की बात करें तो अब तक मध्यप्रदेश को इस परियोजना के माध्यम से लगभग 3900 करोड़ यूनिट विद्युत औसतन 85 पैसे प्रति यूनिट की बेहद किफायती दर से उपलब्ध हुई है, जिसने राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में रीढ़ की हड्डी का काम किया है। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना के पानी से प्रदेश की लगभग 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की बेहतरीन सुविधा मिल रही है। इतना ही नहीं, जबलपुर, कटनी, देवास, उज्जैन, इंदौर, धार सहित सूबे के अनेक प्रमुख शहरों और पीथमपुर, देवास एवं विक्रम उद्योगपुरी जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को पीने और विनिर्माण कार्यों के लिए नर्मदा जल की निर्बाध आपूर्ति भी इसी कल्याणकारी परियोजना के माध्यम से सफलतापूर्वक की जा रही है।
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