एजेंसी, इंदौर। Nana Patwari Arrest Indore : मध्यप्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर से इस समय की एक बहुत बड़ी और राजनीतिक हलचल बढ़ा देने वाली खबर सामने आ रही है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के सगे भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की पुख्ता जानकारी मिली है। इंदौर शहर की राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई नशीले पदार्थों के एक सक्रिय नेटवर्क से जुड़े मामले में की है। पुलिस ने बुधवार की देर रात दो कथित मादक पदार्थ तस्करों यानी ड्रग्स पैडलरों को गिरफ्तार किया था, जिनसे की गई बेहद गहन पूछताछ के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के भाई का नाम प्रमुखता से उजागर हुआ। इस इनपुट के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाना पटवारी को अपनी अभिरक्षा में ले लिया है और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।
गिरफ्तार तस्करों के बयानों के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई
पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने पूर्व में कार्रवाई करते हुए 10 ग्राम अत्यंत घातक मादक पदार्थ ‘ब्राउन शुगर’ के साथ 2 संदिग्ध आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। हवालात में बंद इन दोनों आरोपियों से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की और उनके पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू किया, तो दोनों ने कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम उगल दिया। जांच प्रक्रिया से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि पकड़े गए तस्करों ने नाना पटवारी के साथ अपने सीधे संबंधों की बात स्वीकार की है। इसके बाद जब पुलिस ने नाना पटवारी को हिरासत में लेकर प्रारंभिक सवाल-जवाब किए, तो उन्होंने भी गिरफ्तार आरोपियों को पहले से जानने की बात कबूल की है। हालांकि, पुलिस प्रशासन अभी इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहा है कि यह रिश्ता महज एक सामान्य जान-पहचान था या इसके पीछे नशीले पदार्थों की तस्करी का कोई गहरा सिंडिकेट काम कर रहा था।
पुराने विवादों और आत्महत्या के मामले से भी जुड़ रहे हैं तार
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह पहला मौका नहीं है जब कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम किसी संदिग्ध या आपराधिक गतिविधि में सामने आया है। पुलिस रिकॉर्ड और सूत्रों की मानें तो इससे पहले भी मादक पदार्थों से जुड़े एक अन्य गंभीर प्रकरण में उनका नाम उचका था। यही वजह है कि पुलिस की विशेष टीम इस नए मामले के तमाम सुरागों को पुराने मुकदमों और कड़ियों से जोड़कर एक विस्तृत पड़ताल में जुट गई है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2019 में इंदौर को हिलाकर रख देने वाले बहुचर्चित खुशी कुलवाल आत्महत्या कांड में भी नाना पटवारी का नाम मुख्य रूप से सुर्खियों में आया था। इन तमाम पुराने रिकॉर्ड्स को देखते हुए पुलिस पूरी सतर्कता बरत रही है। हालांकि, इस पूरे संवेदनशील घटनाक्रम पर अभी तक इंदौर पुलिस के किसी बड़े अधिकारी ने कोई औपचारिक लिखित बयान या प्रेस नोट जारी नहीं किया है।
परिजनों ने उठाए कार्यप्रणाली पर सवाल और जताई बड़ी चिंता
इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले में उस समय एक नया मोड़ आ गया जब नाना पटवारी के परिजनों और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने पुलिस की थ्योरी को कटघरे में खड़ा कर दिया। परिवार के सदस्यों का कहना है कि गुरुवार की सुबह 10 बजे से ही नाना पटवारी का मोबाइल फोन लगातार बंद आ रहा है और उनकी गाड़ी भी सड़क किनारे लावारिस हालत में बरामद हुई है। परिजनों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वे सुबह से ही घर से किसी काम के लिए निकले थे, लेकिन तब से उनका कुछ अता-पता नहीं है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस विभाग उनकी आधिकारिक गिरफ्तारी या हिरासत में होने की बात स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं कर रहा है, जिससे परिवार के भीतर किसी अनहोनी की आशंका को लेकर गहरा डर बना हुआ है। परिजनों ने रोते-बिलखते हुए पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें केवल एक बार नाना पटवारी से मिलवा दिया जाए ताकि उनकी सुरक्षा को लेकर तसल्ली हो सके।
कांग्रेस नेताओं का थाने में प्रदर्शन और राजनीति में भारी उबाल
इस पूरे मामले के सार्वजनिक होते ही मध्यप्रदेश की सियासत में जबरदस्त उबाल आ गया है और कांग्रेस तथा सत्ताधारी दल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। नाना पटवारी की कोई सही लोकेशन और जानकारी न मिलने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पटवारी परिवार के समर्थकों ने राजेंद्र नगर थाने पहुंचकर एक लिखित आवेदन सौंपा है। इस आधिकारिक आवेदन के माध्यम से कांग्रेसियों ने पुलिस से नाना पटवारी की वर्तमान स्थिति और उनकी सुरक्षा के संबंध में तुरंत स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। इसी बीच, इंदौर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता चिंटू चौकसे ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन की इस पूरी कार्यप्रणाली पर बेहद तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक द्वेष भावना के तहत विपक्ष के नेताओं और उनके परिवारों को बदनाम करने तथा प्रताड़ित करने के लिए पुलिस को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सही नहीं ठहराया जा सकता।
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