Ram Mandir donation FIR case

अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद : चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर एफआईआर की मांग, वकीलों ने थाने पहुंचकर दी तहरीर

उत्तर प्रदेश देश/प्रदेश

एजेंसी, अयोध्या। Ram Mandir donation FIR case : उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी का मामला अब एक बेहद गंभीर और बड़े कानूनी विवाद में तब्दील हो गया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर स्थानीय वकीलों ने अब सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन के कड़े नेतृत्व में भारी संख्या में वकीलों ने गुरुवार को इस घटना के विरोध में अपनी तीखी नाराजगी और कड़ा विरोध दर्ज कराया। राम मंदिर के धन में हुई कथित चोरी के इस हाई-प्रोफाइल मामले में वकीलों का दल सीधे श्रीराम जन्मभूमि थाने पहुंच गया। उन्होंने वहां जाकर मंदिर ट्रस्ट से जुड़े रसूखदार पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को एक लिखित तहरीर सौंपी।

पूर्व में हुई गिरफ्तारियां और एसआईटी की जांच

गौरतलब है कि राम मंदिर चंदा और चढ़ावा चोरी के इस बहुचर्चित प्रकरण में पुलिस प्रशासन पहले ही बड़ी कार्रवाई कर चुका है। इस मामले में अब तक कुल 8 मुख्य आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और पुलिस उन सभी को गिरफ्तार करके जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी है। मामले की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए सरकार ने इसकी विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया है, जो पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। हालांकि, इन गिरफ्तारियों के बावजूद वकीलों का संगठन और देश के विभिन्न विपक्षी दल इस कार्रवाई से पूरी तरह असंतुष्ट नजर आ रहे हैं और वे लगातार सरकार व प्रशासन पर हमलावर हैं।

बड़े चेहरों को बचाने का लगा गंभीर आरोप

विरोध प्रदर्शन कर रहे वकीलों और विपक्षी नेताओं का सीधा और गंभीर आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने इस पूरे मामले में केवल छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई की है, जबकि चंदा चोरी की इस बड़ी साजिश के पीछे मौजूद मुख्य और बड़े प्रभावशाली चेहरों को जानबूझकर छोड़ दिया गया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने इस विषय पर बुलाई गई अपनी सबसे पहली आपातकालीन बैठक में ही सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्ताव में मांग की गई थी कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका की भी गहनता से जांच हो और उनके विरुद्ध तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

बार एसोसिएशन का 3 दिन का कड़ा अल्टीमेटम

अपनी मांगों को मनवाने और दबाव बनाने के लिए बार एसोसिएशन ने एक बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए इन तीनों नामजद पदाधिकारियों को अयोध्या छोड़ने के लिए महज 3 दिन का एक कड़ा अल्टीमेटम यानी समय सीमा भी दी थी। इस अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने के साथ ही अब अयोध्या की सड़कों पर वकीलों का यह विरोध प्रदर्शन और ज्यादा उग्र व तेज हो गया है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए गुरुवार को बार एसोसिएशन की अगुवाई में सैकड़ों वकीलों ने सबसे पहले स्थानीय कचहरी परिसर में इकट्ठा होकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और अपना विरोध-प्रदर्शन दर्ज कराया।

थाने में तहरीर देकर कानूनी कार्रवाई पर अड़े वकील

कचहरी परिसर में प्रदर्शन समाप्त करने के बाद वकीलों का यह आक्रोशित हुजूम सीधे श्रीराम जन्मभूमि थाने की तरफ कूच कर गया। वहां पहुंचकर उन्होंने पुलिस के आला अधिकारियों से मुलाकात की और तीनों रसूखदार चेहरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए औपचारिक तहरीर सौंप दी। वकीलों का कहना है कि जब तक इस पवित्र मंदिर के चंदे की चोरी में शामिल हर एक बड़े चेहरे को बेनकाब करके जेल नहीं भेजा जाता, तब तक उनका यह कानूनी और सामाजिक संघर्ष लगातार जारी रहेगा। इस कदम के बाद से अयोध्या प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल काफी तेज हो गई है।

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