एजेंसी, नई दिल्ली। Ram Mandir Donation Case : देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में से एक अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में सामने आई कथित वित्तीय गड़बड़ियों का मामला अब पूरी तरह से गरमा गया है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आगामी संसद सत्र से ठीक पहले इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय का रुख किया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से दोनों वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरे विवाद पर प्रधानमंत्री की ओर से बनी हुई निरंतर चुप्पी पर बेहद तीखे सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट मानना है कि यह करोड़ों नागरिकों की अगाध आस्था का विषय है, इसलिए सरकार को इस संवेदनशील मामले को ठंडे बस्ते में नहीं डालना चाहिए।
प्रधानमंत्री जी,
श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की – वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है।
ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक… pic.twitter.com/HJ4flHrks1
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 19, 2026
संसद के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने खोला मोर्चा
संसद के आगामी मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक पहले इस पत्र को भेजे जाने के राजनीतिक गलियारों में कई बड़े मायने निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी और संपूर्ण विपक्ष ने इस बार सरकार को घेरने के लिए इसे एक मुख्य राजनीतिक हथियार के रूप में चुना है। विपक्ष का आरोप है कि इतने बड़े धार्मिक संस्थान से जुड़े वित्तीय लेनदेन में अगर किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत आती है, तो उस पर तत्काल प्रभाव से संज्ञान लिया जाना आवश्यक है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के इस संयुक्त कदम से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि आगामी दिनों में संसद की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे को लेकर दोनों सदनों में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए इस आधिकारिक पत्र में दोनों विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की जवाबदेही पर विशेष रूप से जोर दिया है। उनका कहना है कि राम मंदिर निर्माण और वहां आने वाले चढ़ावे से देश-विदेश के करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं और उनका अटूट विश्वास जुड़ा हुआ है। ऐसी स्थिति में ट्रस्ट के धन के उपयोग को लेकर उठ रहे सवाल हर नागरिक को विचलित करते हैं। पत्र में मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की एक पूर्णतः स्वतंत्र और उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही जनता के मन में फैले भ्रम को दूर करने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अब तक के सभी वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री की लंबी चुप्पी पर तीखे सवाल
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संयुक्त पत्र में इस बात पर गहरा आश्चर्य और असंतोष व्यक्त किया है कि इतने गंभीर आरोप सामने आने के बाद भी देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पत्र में लिखा गया है कि प्रधानमंत्री की इस विषय पर लंबी चुप्पी कई तरह के संदेहों को जन्म देती है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, एक पारदर्शी और लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह चुनी हुई सरकार का परम कर्तव्य है कि वह ऐसे संवेदनशील मामलों में तुरंत हस्तक्षेप करे, जिम्मेदारी तय करे और जो भी सच हो, उसे पूरी प्रामाणिकता के साथ देश की जनता के सामने रखे।
चंपत राय के संदर्भ में उठाए गए गंभीर मुद्दे
विपक्षी नेताओं ने अपने इस विस्तृत पत्र में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की भूमिका का भी विशेष रूप से उल्लेख किया है। पत्र में इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई गंभीर सवाल सीधे तौर पर उनके कार्यकाल और निर्णयों से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि उन्हें सत्ता पक्ष और प्रधानमंत्री का एक बेहद करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि इन खास परिस्थितियों और वीआईपी संबंधों को देखते हुए यह और भी अनिवार्य हो जाता है कि जांच पूरी तरह से बाहरी दबाव से मुक्त हो, ताकि कोई भी प्रभाव इस मामले के असली सच को दबा न सके।
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