एजेंसी, राजौरी। Rajouri Landmine Blast : जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले राजौरी से एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। नियंत्रण रेखा के बिल्कुल करीब देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात भारतीय सेना के जवानों के साथ एक बड़ा हादसा हो गया है। मंगलवार के दिन नियंत्रण रेखा के पास नियमित रूप से किए जाने वाले इलाका प्रभुत्व गश्त यानी एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग के दौरान एक अचानक हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में सेना के एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर यानी जेसीओ सहित चार वीर जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस अचानक हुए धमाके के बाद सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों और सैन्य महकमे में पूरी तरह से सतर्कता बढ़ा दी गई है।
JCO, Three Soldiers Injured in Accidental Blast Near LoC in Rajouri
A Junior Commissioned Officer (JCO) and three Army personnel were injured in an accidental blast during routine patrolling near the Line of Control (LoC) in the Nowshera sector of Rajouri district on Tuesday. pic.twitter.com/otCrB7mgWQ
— CNS Kashmir (@cnskashmir) June 16, 2026
गश्त के दौरान अचानक सक्रिय हुई जमीन के नीचे दबी बारूदी सुरंग
सैन्य सूत्रों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा राजौरी जिले के अंतर्गत आने वाले नौशेरा सेक्टर के अग्रिम और बेहद दुर्गम कलाल इलाके में हुआ। वहां तैनात सेना की एक टुकड़ी सीमा पार से होने वाली किसी भी संभावित हरकत पर नजर रखने के लिए नियमित रूप से गश्त कर रही थी। इसी दौरान गश्त कर रहे जवानों का पैर अनजाने में वहां जमीन के नीचे दबी एक बेहद शक्तिशाली बारूदी सुरंग पर पड़ गया। पैर पड़ते ही वह बारूदी सुरंग अचानक सक्रिय हो गई और एक बहुत ही जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके की चपेट में आने से वहां मौजूद चार जवान बुरी तरह झुलस गए और घायल हो गए।
घायल जवानों को तुरंत सैन्य अस्पताल में कराया गया भर्ती
धमाका इतना जबरदस्त था कि उसकी आवाज दूर तक सुनी गई। हादसे के तुरंत बाद सीमा पर मौजूद अन्य सैन्य टुकड़ियों ने मोर्चा संभाला और बिना कोई समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। चारों घायल जवानों को अत्यंत सावधानी के साथ घटना स्थल से सुरक्षित बाहर निकाला गया और तुरंत ही पास के सैन्य चिकित्सालय में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम घायल जवानों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और उन्हें हर संभव बेहतरीन चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। सुरक्षा कारणों से पूरे प्रभावित इलाके को घेर कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है।
घुसपैठ रोकने के लिए अग्रिम चौकियों के पास बिछाई जाती हैं सुरंगें
सेना के उच्च अधिकारियों ने इस तकनीकी हादसे के पीछे की वजहों को स्पष्ट करते हुए बताया कि नियंत्रण रेखा के पास वाले इन अग्रिम इलाकों में दुश्मन देश की तरफ से होने वाली घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं। इन्हीं सुरक्षा उपायों के तहत सीमा के इन संवेदनशील रास्तों पर बड़े पैमाने पर बारूदी सुरंगें बिछाई जाती हैं। कई बार पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश, बर्फबारी या फिर अचानक होने वाले भूस्खलन के कारण ये सुरंगें मिट्टी के साथ बहकर अपनी मूल जगह से खिसक कर गश्त करने वाले रास्तों पर आ जाती हैं।
ड्रिफ्ट माइन के कारण पहले भी हो चुके हैं कई बड़े हादसे
सैन्य भाषा में अपनी जगह से बहकर दूसरी जगह पहुंच जाने वाली इन खतरनाक बारूदी सुरंगों को ‘ड्रिफ्ट माइन’ कहा जाता है। चूंकि ये सुरंगें मिट्टी के भीतर छिपी रहती हैं, इसलिए गश्त के दौरान इन्हें खुली आंखों से देख पाना लगभग असंभव होता है। राजौरी और पुंछ जैसे पहाड़ी और जंगली सीमाओं वाले क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों के भीतर ऐसे कई तकनीकी हादसे सामने आ चुके हैं जिनमें जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। भारतीय सेना इन क्षेत्रों में लगातार आधुनिक माइन डिटेक्शन उपकरणों की मदद से तलाशी अभियान चलाती रहती है ताकि गश्त वाले रास्तों को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।
सुंदरबनी सेक्टर में देखा गया पाकिस्तानी सीमा से आया संदिग्ध ड्रोन
इस बड़े हादसे के बीच ही राजौरी जिले के एक अन्य संवेदनशील सुंदरबनी सेक्टर से भी सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चुनौती सामने आई। मंगलवार के दिन ही महादेव गैप और कलाल गांव के बीच पड़ने वाले अग्रिम हवाई क्षेत्र में एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन उड़ता हुआ देखा गया। सीमा पर तैनात मुस्तैद जवानों ने जैसे ही इस विदेशी ड्रोन की हरकत को देखा, वैसे ही पूरे इलाके में खतरे का बिगुल बजा दिया गया। सुरक्षा बलों ने बिना कोई देरी किए तुरंत पूरे क्षेत्र की कड़ाई से घेराबंदी कर दी और एक बहुत बड़ा संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया।
सीमा पार बैठे आका ड्रोन के जरिए भेजते हैं हथियार और नशीले पदार्थ
हालांकि, कई घंटों तक चले इस गहन खोजी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को झाड़ियों या खेतों से कोई भी संदिग्ध सामान, हथियार या नशीली वस्तुएं बरामद नहीं हुईं। रक्षा और खुफिया एजेंसियों का यह पुख्ता मानना है कि सीमा पार बैठे आतंकवादी संगठनों के आका और हैंडलर भारतीय क्षेत्र में अशांति फैलाने के लिए लगातार नई तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। वे अक्सर इन ड्रोनों के जरिए रात के अंधेरे में आधुनिक हथियार, गोला-बारूद, जाली भारतीय मुद्रा और भारी मात्रा में ड्रग्स जैसी प्रतिबंधित सामग्रियां गिराने की फिराक में रहते हैं। इन सामानों को बाद में स्थानीय स्तर पर मौजूद आतंकियों के मददगार यानी ओवरग्राउंड वर्कर्स के जरिए सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाया जाता है।
सीमाओं पर तैनात किए गए आधुनिक एंटी ड्रोन सिस्टम
पाकिस्तानी कूटनीति के इस नए और खतरनाक हथकंडे का कड़ा जवाब देने के लिए भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल ने अब नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बेहद आधुनिक और उच्च तकनीकी वाले एंटी ड्रोन सिस्टम तैनात कर दिए हैं। ये आधुनिक प्रणालियां किसी भी विदेशी ड्रोन के भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही उसे हवा में ही जाम करने या मार गिराने की क्षमता रखती हैं। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इन आधुनिक और हाई-टेक उपकरणों के लगने के बाद से सीमा पार से होने वाली ड्रोन की अवैध गतिविधियों में काफी हद तक कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद नौशेरा, मंजाकोट और तेरयाथ जैसे संवेदनशील इलाकों में सेना चौबीसों घंटे पूरी तरह मुस्तैद और अलर्ट मोड पर बनी हुई है ताकि देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।
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