एजेंसी, भोपाल। Rahul Gandhi Case : कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से जुड़े हाई-प्रोफाइल मानहानि मामले में मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अदालत ने अब इस मामले में अंतिम फैसले के लिए 14 मई की तारीख तय की है। यह मामला केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दायर किया गया है, जिसकी गूंज पिछले कई वर्षों से मध्य प्रदेश की राजनीति में सुनाई दे रही है।
कार्तिकेय चौहान की ओर से समय मांगने पर टली सुनवाई
मंगलवार को एमपी हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में इस मामले पर विचार होना था, लेकिन कार्तिकेय सिंह चौहान के पक्ष की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई। इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए अदालत ने कार्यवाही स्थगित कर दी। इससे पहले की सुनवाइयों में दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी विस्तृत दलीलें पेश की थीं। अब सबकी नजरें 14 मई पर टिकी हैं, जब कोर्ट यह तय करेगा कि राहुल गांधी को इस मामले में राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी।
क्या है पूरा विवाद और ‘पनामा पेपर्स’ का कनेक्शन?
विवाद की जड़ साल 2018 के विधानसभा चुनाव में छिपी है। झाबुआ में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने ‘पनामा पेपर्स’ लीक का जिक्र किया था। उन्होंने कथित तौर पर इस वित्तीय घोटाले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके बेटे कार्तिकेय चौहान का नाम लिया था। पनामा पेपर्स दुनिया के सबसे बड़े डेटा लीक में से एक माना जाता है, जिसमें कई दिग्गजों के गुप्त वित्तीय रिकॉर्ड उजागर हुए थे। हालांकि, अगले ही दिन राहुल गांधी ने अपनी टिप्पणी पर सफाई देते हुए कहा था कि वे ‘कन्फ्यूज’ (भ्रमित) हो गए थे और वास्तव में वे छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उल्लेख करना चाहते थे।
निचली अदालत के समन को हाई कोर्ट में चुनौती
इस बयान के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान ने भोपाल की विशेष अदालत (एमपी/एमएलए कोर्ट) में मानहानि का परिवाद दायर किया था। निचली अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसी समन को रद्द कराने के लिए राहुल गांधी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और अजय गुप्ता ने दलील दी है कि यह परिवाद पूरी तरह निराधार है और लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज
जैसे-जैसे फैसले की घड़ी करीब आ रही है, मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है। एक तरफ जहां भाजपा इसे तथ्यों के साथ खिलवाड़ और छवि धूमिल करने का प्रयास बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे मानवीय भूल और राजनीतिक प्रतिशोध का मामला करार दे रही है। 14 मई को आने वाला फैसला न केवल कानूनी रूप से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि राज्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
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