ई-सिगरेट

पार्लियामेंट में कौन पी रहा था ई-सिगरेट ? भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर का टीएमसी पर सनसनीखेज आरोप

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। भारत में ई-सिगरेट बैन है, यह बात हर किसी को पता है। लेकिन क्या हो अगर यह प्रतिबंधित वेपिंग डिवाइस देश की सबसे बड़ी कानून बनाने वाली जगह पार्लियामेंट के अंदर इस्तेमाल होते पाए जाएं? यही सनसनीखेज आरोप भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में लगाया, जिसने पूरे हाउस में एक पल के लिए खामोशी और फिर अचानक हंगामा खड़ा कर दिया। अनुराग ठाकुर का दावा था कि “एक तृणमूल कांग्रेस का सांसद कई दिनों से लोकसभा के अंदर ई-सिगरेट पी रहे हैं”। यह बात सुनते ही स्पीकर ओम बिड़ला ने साफ कहा कि हाउस में ई-सिगरेट की इजाजत नहीं है। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि ई-सिगरेट बैन के बावजूद भारत में वेपिंग कैसे और कहां तक फैल चुकी है। क्या संसद भी इस समस्या से अछूती नहीं रही?

क्या संसद के अंदर वाकई ई-सिगरेट चली? भाजपा का बड़ा आरोप
अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में जैसे ही यह आरोप लगाया, हलचल मच गई। उन्होंने कहा कि एक टीएमसी सांसद लगातार कई दिनों से ई-सिगरेट पी रहा है, जबकि पूरे देश में यह बैन है।

स्पीकर ने तुरंत कहा “नहीं, बिल्कुल नहीं।”
इसके बाद ठाकुर ने दावा किया कि एक टीएमसी सांसद लगातार कई दिनों से सीट पर बैठकर वेपिंग कर रहे थे। जैसे ही यह बयान आया, बीजेपी सांसद खड़े हो गए और हंगामा शुरू हो गया। पार्लियामेंट में हल्के-फुल्के विवाद तो अक्सर होते रहते हैं, लेकिन संसद परिसर में वेपिंग का आरोप पहली बार सुनने में आया, जिस वजह से इस मुद्दे ने तुरंत सुर्खियाँ पकड़ लीं।

अगर ई-सिगरेट बैन है, तो संसद में यह कैसे पहुंची?
भारत में ई-सिगरेट पूरी तरह से अवैध है। 2019 में बनाए गए कानून के हिसाब से: ई-सिगरेट बनाना गैर-कानूनी, बेचना गैर-कानूनी, रखना गैर-कानूनी, विज्ञापन देना गैर-कानूनी, इंपोर्ट करना गैर-कानूनी, यहां तक कि सिर्फ अपने पास रखना भी कानूनन अपराध है। इस मुद्दे की सच्चाई जानने के लिए स्पीकर ने जांच का आश्वासन दिया है।

क्या संसद में वेपिंग की अनुमति है? नियम क्या कहते हैं?
शोर-शराबे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि “पार्लियामेंट की परंपराएं और नियम सभी को मानने चाहिए। अगर ऐसी कोई घटना मेरे संज्ञान में आती है, तो निश्चित रूप से एक्शन लिया जाएगा।” पार्लियामेंट के नियम बेहद साफ हैं कि स्मोकिंग सख्त मना है। यहां तक कि 2015 में संसद परिसर में मौजूद स्मोकिंग रूम भी बंद कर दिया गया था। ऐसे में ई-सिगरेट जैसे डिवाइस की अनुमति होना तो सवाल ही नहीं उठता।

क्या भारत में ई-सिगरेट बैन वाकई लागू हो रहा है?
हालांकि कानून सख्त है, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है। भारत एक बड़ा देश है, और ऐसे प्रतिबंध कई जगहों पर ढीले पड़ जाते हैं। कई जगह गुपचुप तरीके से वेपिंग डिवाइस बेचे जाते हैं। स्कूल-कॉलेज के पास भी बिक्री की शिकायतें मिलती हैं। 2023 में केंद्र ने राज्यों को चिट्ठी लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की। यह बताता है कि भले ही कानून मौजूद है, पर वेपिंग का काला बाज़ार अभी भी चल रहा है।

क्या यह सिर्फ राजनीतिक विवाद है, या संसद में कुछ बड़ा छिपा है?
यह विवाद सिर्फ भाजपा बनाम टीएमसी का मुद्दा भी बन सकता है। लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह देश के लिए बड़ा सवाल बनेगा: जब देश में ई-सिगरेट बैन है, तो संसद के भीतर इसे कौन और कैसे पी रहा था?

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