संसद

पेपर लीक पर मोदी सरकार का सख्त वार : संसद में पेश हुआ सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Public Exam Amendment Bill : संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत के साथ केंद्र सरकार ने लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक का मकसद परीक्षा पेपर लीक, नकल, संगठित अनियमितताओं और परीक्षा माफिया पर कड़ा अंकुश लगाना है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक प्रस्तुत किया। सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।

पेपर लीक और नकल पर अब और कड़ी सजा

प्रस्तावित संशोधन के तहत यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक, परीक्षा में धांधली या संगठित अपराध में दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 साल तक की सजा और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान जरूरी हो गए हैं, क्योंकि हाल के वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में बार-बार अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। विधेयक को ऐसे समय में लाया गया है जब छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर चिंता बनी हुई है। सरकार ने साफ किया है कि इस नए संशोधन का उद्देश्य सिर्फ दंड बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें दोषियों को बच निकलने का मौका ही न मिले।

सर्विस प्रोवाइडर और कोचिंग संस्थानों पर भी शिकंजा

विधेयक में केवल सीधे तौर पर जुड़े व्यक्तियों पर ही नहीं, बल्कि उन संस्थाओं पर भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है जो किसी न किसी रूप में परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी होती हैं। अगर किसी परीक्षा से संबंधित सर्विस प्रोवाइडर कंपनी की भूमिका पेपर लीक में सामने आती है, तो उसे 8 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। वहीं, यदि कंपनी के निदेशक, प्रबंधक या अन्य जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान होगा। इसके अलावा, यदि किसी कोचिंग संस्थान की संलिप्तता परीक्षा लीक या अनुचित साधनों के इस्तेमाल में पाई जाती है, तो उसकी संपत्ति जब्त किए जाने तक का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा अपराध केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके पीछे अक्सर एक बड़ा नेटवर्क काम करता है, जिसे तोड़ना जरूरी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने की हाई पावर टास्क फोर्स की घोषणा

विधेयक पेश किए जाने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर परीक्षा सुधारों की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया। उन्होंने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय हाई पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह साफ-सुथरा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जा चुकी है ताकि परीक्षा से जुड़े मामलों का निपटारा तेजी से हो सके। टास्क फोर्स को तकनीक के बेहतर उपयोग, पारदर्शिता, विश्वसनीयता और डेटा सुरक्षा से जुड़े सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि यह समिति भविष्य की परीक्षा प्रणाली के लिए एक नया खाका तैयार कर सकती है।

विपक्ष ने उठाए सवाल, संसद में गरमाया माहौल

जहां सरकार इस विधेयक को परीक्षा सुधार की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर अलग रुख अपनाया है। संसद भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में इंडिया गठबंधन की बैठक हुई, जिसमें विधेयक पर विपक्ष की साझा रणनीति तय करने पर चर्चा की गई। विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को जमीन पर लागू करना होगा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि सरकार छात्रों की मांगों के आगे झुकी है, तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि किन बिंदुओं पर सहमति बनी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने मुकदमे दर्ज न करने की बात कही थी, लेकिन अब भी छात्रों पर कार्रवाई जारी है। इसी तरह सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि गृह मंत्री को सदन में आकर जवाब देना चाहिए और छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच संसद परिसर में छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध तेज रहा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सरकार पर छात्रों के खिलाफ कठोर रवैया अपनाने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसदों ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है और संसद में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। डिंपल यादव ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। वहीं, कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने गृह मंत्री से सवाल किया कि बिहार और दिल्ली में छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई के आदेश किसने दिए। विपक्ष ने यह भी मांग की कि परीक्षा सुधार और छात्रों पर हुई कार्रवाई, दोनों मुद्दों पर संसद में स्पष्ट जवाब दिया जाए।

सदन की कार्यवाही कई बार बाधित

विपक्षी हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार और विपक्ष को समझौते के लिए समय दिया, ताकि चर्चा सुचारु रूप से शुरू हो सके। उन्होंने दोनों पक्षों से शाम 5 बजे तक सहमति बनाने का आग्रह किया। हालांकि, बार-बार के विरोध प्रदर्शनों के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा और राज्यसभा में छात्रों के मुद्दे, परीक्षा सुधार विधेयक और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। इसके साथ ही कई सांसदों ने सदन के भीतर और बाहर अपने-अपने दलों की स्थिति स्पष्ट की। भाजपा सांसदों ने सरकार के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी छात्रों के हित में ठोस सुधार ला रहे हैं।

बहस के लिए कई घंटे का समय तय

संसदीय सूत्रों के मुताबिक, पब्लिक एग्जामिनेशन्स संशोधन विधेयक, 2026 पर सदन में 8 से 10 घंटे की विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या जैसी सांसदों को इस चर्चा में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए तैयार किया गया है। इसके अलावा विभिन्न दलों के सांसद भी अपनी बात रख सकते हैं। चर्चा में टीडीपी, शिवसेना, एनसीपी, अपना दल और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के सांसदों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। सूत्रों के अनुसार, सरकार चाहती है कि इस विधेयक पर व्यापक सहमति बने, जबकि विपक्ष अपनी आपत्तियों और सुझावों के साथ इसे और अधिक सख्त, पारदर्शी और छात्र-हितैषी बनाने की मांग कर रहा है।

फास्ट-ट्रैक अदालतों से तेज होगी सुनवाई

विधेयक के तहत परीक्षा संबंधी मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है। इन अदालतों को आरोपपत्र दाखिल होने के 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे जांच और मुकदमेबाजी में देरी कम होगी और दोषियों को समय पर सजा दिलाई जा सकेगी। कुल मिलाकर, मोदी सरकार का यह विधेयक देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। अब निगाहें संसद की आगे होने वाली चर्चा और सरकार की तरफ से आने वाले संशोधनों पर टिकी हैं। परीक्षा लीक और अनुचित साधनों के खिलाफ यह सख्त रुख आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय कर सकता है।

ये भी पढ़े : स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली में अभेद्य सुरक्षा घेरा : लाल किले से लेकर सीमाओं तक सीआरपीएफ और आरएएफ की 83 कंपनियां तैनात

ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें

Leave a Reply