एजेंसी, नई दिल्ली। PM Modi On NEET Fast Track Court : देश में चल रहे प्रश्नपत्र लीक के महासंग्राम के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। इन शिक्षा माफियाओं और पेपर लीक के दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाने और कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार देशभर में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का निर्माण करने जा रही है। प्रधानमंत्री का यह सख्त संदेश ऐसे समय में आया है जब राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और तमाम विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर पिछले 34 दिनों से जंतर-मंतर पर भारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पिछले 26 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जिनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका सघन चिकित्सा कक्ष में मेडिकल ट्रीटमेंट चल रहा है।
Nothing is more important than the welfare and future of our youth!
We have decided to set up fast-track courts to ensure swift and stringent punishment for those involved in paper leaks. Have directed the concerned authorities and officials to take all necessary steps in this…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 23, 2026
फास्ट ट्रैक कोर्ट का इतिहास और मुकदमों के निपटारे का शानदार रिकॉर्ड
भारत की न्याय प्रणाली में फास्ट ट्रैक कोर्ट की अवधारणा नई नहीं है, लेकिन पेपर लीक जैसे मामलों के लिए इसका इस्तेमाल पहली बार किया जा रहा है। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में इन त्वरित अदालतों की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी। उस समय 11वें वित्त आयोग ने न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए अपनी विशेष सिफारिश दी थी, जिसके आधार पर पूरे देश में 1734 फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना के लिए एक विशेष फंड मंजूर किया गया था। अब तक इन त्वरित अदालतों का ट्रैक रिकॉर्ड काफी शानदार और प्रभावशाली रहा है। केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों के लिए बनाई गई इन विशेष अदालतों ने वर्ष 2019 से लेकर 2025 के बीच 3.06 लाख से भी अधिक मुकदमों का सफलतापूर्वक निपटारा किया है। इन अदालतों में केस सुलझाने का रेट लगभग 96.28 प्रतिशत रहा है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, नए मुकदमों के लगातार दर्ज होने की वजह से वर्ष 2025 के अंत तक 2.45 लाख से ज्यादा मामले लंबित थे, जबकि वर्ष 2024 के अंत में पेंडिंग मामलों का यह आंकड़ा 2.04 लाख के करीब था।
एनडीए की अहम बैठक में प्रधानमंत्री का सख्त और स्पष्ट रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल सार्वजनिक मंचों पर ही नहीं, बल्कि अपनी पार्टी की इंटरनल मीटिंग्स में भी इस विषय पर कड़ा रुख अपनाया है। बीते 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की एक महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि सरकार ने नीट परीक्षा में हुई धांधली की सूचना मिलते ही बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई की थी। इस पूरे प्रकरण में शामिल 13 मुख्य आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करके तुरंत जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया था। छात्रों का भविष्य अंधकार में ना डूबे और उनका पूरा साल खराब ना हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने दोबारा परीक्षा आयोजित करवाई और तय समय सीमा के भीतर रिजल्ट भी डिक्लेयर कर दिए। प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। इस महाघोटाले के दोषियों को देश के टॉप वकीलों की मदद से ऐसी कड़ी सजा दिलाई जाएगी कि आने वाले समय में कोई भी क्रिमिनल सिंडिकेट युवाओं के करियर के साथ ऐसा खिलवाड़ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा।
जेपी नड्डा का विपक्ष पर तीखा पलटवार और राजनीतिक घमासान
सदन से लेकर सड़क तक मचे इस भारी सियासी घमासान के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी का दौर भी पूरी रफ्तार से चल रहा है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया है कि नीट प्रश्नपत्र लीक का मामला कोई राजनीतिक या दलगत विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश के लाखों छात्रों और उनके सुनहरे भविष्य से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील नेशनल इश्यू है। वहीं दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस और विपक्ष के तीखे हमलों का जोरदार तरीके से काउंटर किया है। बुधवार को नई दिल्ली में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर कड़ा प्रहार करते हुए सवाल पूछा कि राहुल गांधी को उस समय छात्रों का भविष्य क्यों याद नहीं आता, जब कांग्रेस शासित राज्यों में पेपर लीक के बड़े स्कैंडल सामने आते हैं। उन्होंने विपक्ष पर इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण करने और छात्रों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है।
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