एजेंसी, नई दिल्ली। Mann Ki Baat 136th Episode : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड के जरिए पूरे देश को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने देशवासियों से स्वदेशी उत्पादों और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को और अधिक सशक्त बनाने का विशेष आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि भारत की समृद्ध पारंपरिक हस्तकलाएं और हथकरघा उद्योग सिर्फ सामान्य उत्पाद मात्र नहीं हैं, बल्कि वे हमारे देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर और करोड़ों परिवारों की जीवनयापन की मुख्य आजीविका का ठोस आधार हैं। आगामी 7 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उल्लेख करते हुए उन्होंने देश के हर नागरिक से यह भावुक अपील की कि वे इस अवसर पर कम से कम 1 खादी, हथकरघा या हस्तशिल्प उत्पाद अवश्य खरीदें, जिससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिल सके।
Discussing various topics during this month’s #MannKiBaat… https://t.co/3JQbPB3eYb
— Narendra Modi (@narendramodi) July 26, 2026
खादी की बिक्री 8000 करोड़ रुपये के पार पहुंचने पर जताया हर्ष
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में खादी की बढ़ती लोकप्रियता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बीते कुछ वर्षों में खादी की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि आज खादी का कारोबार लगभग 8000 करोड़ रुपये के आंकड़े तक पहुंच चुका है, जो स्वदेशी के प्रति लोगों के बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है। देश के अलग-अलग राज्यों में हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए जो सफल प्रयास किए जा रहे हैं, वे वास्तव में सराहनीय हैं। इन पहलों के माध्यम से न केवल स्थानीय कारीगरों को आर्थिक मजबूती मिल रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए भी सम्मानजनक रोजगार के अनेक नए द्वार खुल रहे हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में विक्रम 1 रॉकेट की सफलता और भारतीय छात्रों की उपलब्धि की सराहना
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने निजी क्षेत्र द्वारा विकसित किए गए ‘विक्रम 1’ रॉकेट के सफल प्रक्षेपण को भारत के अंतरिक्ष इतिहास का एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पड़ाव करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्योगों के लिए खोलने के नीतिगत फैसलों का बहुत ही सकारात्मक परिणाम आज पूरा विश्व देख रहा है। इस ऐतिहासिक बदलाव से देश के युवा वैज्ञानिकों और नवोन्मेषी स्टार्टअप्स को अपनी अद्भुत प्रतिभा दिखाने का बेहतरीन अवसर प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के शानदार प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त किया और भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व गणित में स्वर्ण तथा रजत पदक जीतने वाले छात्रों की सराहना की।
कैच द रेन और एक पेड़ मां के नाम अभियान से पर्यावरण संरक्षण की अपील
जल संरक्षण और पर्यावरण के मुद्दे पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान को एक वृहद जनआंदोलन में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्षा जल के संचयन, भूजल स्तर को बढ़ाने और पुराने पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में प्रत्येक नागरिक की सीधी भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपने आसपास स्थित तालाबों, कुओं और बावड़ियों के संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया। इसके अलावा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की प्रगति साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में एक ही दिन के भीतर 35 करोड़ से भी अधिक पौधे लगाए गए, जबकि अहमदाबाद में 1 घंटे के अंदर लाखों पौधों का रोपण कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया।
स्थानीय नवाचार और दुर्लभ वन्यजीवों की वापसी पर व्यक्त की प्रसन्नता
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रेरणादायक उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने बिहार के सीतामढ़ी में प्लास्टिक के कचरे का पुनर्चक्रण करके सुंदर बेंच बनाने की अनूठी पहल की तारीफ की, जिससे स्वच्छता के साथ रोजगार भी पैदा हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने गुजरात के गिर जंगलों में करीब 60 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ‘इंडियन ग्रे हॉर्नबिल’ पक्षी की वापसी को एक बड़ी पर्यावरणीय सफलता बताया। उन्होंने कश्मीर की पारंपरिक ‘वगू’ चटाई, बिजनौर की हर्बल टी, त्रिपुरा के वाद्ययंत्र ‘चौंगप्रेंग’ और अन्य राज्यों की अनूठी हस्तकलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की यह परंपरा, नवाचार, विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण मिलकर देश को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।
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