एजेंसी, जकार्ता। PM Modi Brahmos Deal : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 देशों के अपने कूटनीतिक दौरे के पहले पड़ाव के तहत सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे, जहां उनका भव्य और ऐतिहासिक औपचारिक स्वागत किया गया। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच जकार्ता के आलीशान राष्ट्रपति भवन इस्ताना मर्देका में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता आयोजित की गई। इस शिखर बैठक के दौरान दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच रणनीतिक, कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को एक नए युग में ले जाने के लिए कई ऐतिहासिक और बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह राजकीय यात्रा दोनों देशों के बीच पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को आधुनिक वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप एक बेहद मजबूत रक्षा और आर्थिक साझेदारी में बदलने का काम कर रही है।
Delighted that my friend, President Prabowo Subianto, joined the community programme in Jakarta and made the occasion even more memorable. His address clearly reflected his affection for the people of India.@prabowo pic.twitter.com/czNiyvM0nj
— Narendra Modi (@narendramodi) July 7, 2026
पीएम मोदी को मिला सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिन्तांग आदिपूर्ण’
इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान मंगलवार की सुबह भारत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण लेकर आई जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिन्तांग आदिपूर्ण ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से नवाजा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष और गरिमामय समारोह के दौरान खुद राष्ट्रपति सुबियांतो ने पीएम मोदी के गले में यह प्रतिष्ठित पदक पहनाया। आपको बता दें कि ‘बिन्तांग आदिपूर्ण’ सम्मान केवल उन असाधारण और वैश्विक स्तर के व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने इंडोनेशिया की राष्ट्रीय अखंडता, निरंतरता, विकास और समृद्धि के लिए अपनी अतुलनीय और असाधारण सेवाएं दी हैं। यह पुरस्कार मिलना इस बात का सीधा प्रमाण है कि वर्तमान समय में वैश्विक पटल पर भारत और उसके नेतृत्व की साख कितनी मजबूत हो चुकी है।
भारतवासियों और ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित किया पुरस्कार
इस सर्वोच्च सम्मान को प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी गहरी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि आज सुबह जकार्ता में उन्हें बहुत ही आदर और स्नेह के साथ इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया है। पीएम मोदी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि यह भारत के 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान है। इसके साथ ही यह पुरस्कार इंडोनेशिया के लोगों की भारत के प्रति सच्ची भावनाओं का प्रतीक है और दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आत्मीय संबंधों को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने इस आदर सत्कार के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, वहां की सरकार और इंडोनेशिया की पूरी जनता का सहृदय आभार व्यक्त किया और इस्ताना मर्देका में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद दिया।
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलें खरीदेगा इंडोनेशिया, मजबूत होंगे रक्षा संबंध
दोनों राष्ट्रों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई इस द्विपक्षीय वार्ता का सबसे बड़ा और रणनीतिक मोड़ रक्षा क्षेत्र से निकलकर सामने आया है। इंडोनेशिया ने भारतीय सैन्य विनिर्माण और स्वदेशी तकनीक पर बड़ा भरोसा जताते हुए भारत की बेहद घातक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को खरीदने का फैसला किया है। इसके साथ ही इंडोनेशियाई सैन्य बल अब भारत से हवा से हवा में मार करने वाली आधुनिक ‘अस्त्र’ मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर आयात करेंगे। हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय अस्त्र मिसाइल प्रणाली की शानदार और अचूक सफलता को देखने के बाद इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय ने इस हथियार को अपनी सेना में शामिल करने का बड़ा निर्णय लिया। इस मिसाइल डील के साथ ही दोनों देशों के बीच रक्षा आदान-प्रदान, सैन्य ट्रेनिंग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और औद्योगिक सहयोग को एक व्यापक स्तर पर बढ़ाने पर पूर्ण सहमति बन गई है।
सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह का होगा संयुक्त विकास
समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत और इंडोनेशिया ने एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। दोनों देशों ने मलक्का जलडमरऊमध्य के बेहद करीब स्थित सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह का संयुक्त रूप से विकास करने का एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। यह बंदरगाह भौगोलिक दृष्टि से भारत की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार बंदरगाह परियोजना से मात्र 100 मील की दूरी पर स्थित है। सबांग पोर्ट का यह संयुक्त विकास न केवल दोनों देशों के बीच समुद्री व्यापार और अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा, बल्कि इसके जरिए मलक्का जलडमरऊमध्य जैसे अति-संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने में दोनों नौसेनाओं को बहुत बड़ी रणनीतिक बढ़त हासिल होगी।
महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में भारत करेगा भारी निवेश
वैश्विक आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत और इंडोनेशिया ने महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए हाथ मिलाया है। इस नए समझौते के तहत भारत अब इंडोनेशिया के भीतर बड़े पैमाने पर इस्पात, निकल और दुर्लभ स्थायी चुंबकों के निर्माण और प्रोसेसिंग उद्योग में भारी निवेश करने जा रहा है। आधुनिक तकनीकों और इलेक्ट्रिक वाहनों के दौर में निकल और दुर्लभ खनिज किसी भी देश की औद्योगिक रीढ़ माने जाते हैं। इस निवेश के माध्यम से भारत अपने घरेलू उद्योगों के लिए इन महत्वपूर्ण खनिजों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेगा, वहीं इंडोनेशिया को भारतीय निवेश के जरिए अत्याधुनिक तकनीकी और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने खाद्य सुरक्षा, दवाओं और आधुनिक टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर को लेकर भी कई अहम समझौतों पर दस्तखत किए हैं।
जकार्ता में खुलेगा आईआईएम बेंगलुरु का नया इंटरनेशनल कैंपस
शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंधों को और गहरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि भारत का बेहद प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान यानी भारतीय प्रबंधन संस्थान-बेंगलुरु जल्द ही इंडोनेशिया की धरती पर अपना एक नया अंतरराष्ट्रीय कैंपस स्थापित करने जा रहा है। आईआईएम बेंगलुरु के इस नए कैंपस के खुलने से इंडोनेशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया के छात्रों को विश्व स्तरीय भारतीय प्रबंधन शिक्षा और प्रशिक्षण हासिल करने का मौका मिलेगा। यह कदम दोनों देशों के युवाओं के बीच सीधे जुड़ाव, शैक्षणिक आदान-प्रदान और नॉलेज शेयरिंग को बढ़ावा देने में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है।
इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जुड़ेगा भारत का यूपीआई
डिजिटल गवर्नेंस और फिनटेक सेक्टर में भारत की वैश्विक सफलता का डंका अब इंडोनेशिया में भी बजेगा। द्विपक्षीय वार्ता के बाद साझा प्रेस वार्ता में पीएम मोदी ने एलान किया कि भारत का प्रसिद्ध डिजिटल भुगतान इंटरफेस यानी यूपीआई बहुत जल्द इंडोनेशिया की राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली के साथ जुड़ने जा रहा है। इस डिजिटल एकीकरण के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार करना बेहद आसान हो जाएगा। इसके अलावा भारत से इंडोनेशिया जाने वाले लाखों पर्यटकों और इंडोनेशिया से भारत आने वाले यात्रियों को बिना किसी करेंसी एक्सचेंज की झंझट के सीधे अपने मोबाइल ऐप्स से भुगतान करने की सुविधा मिलेगी। इस कदम से दोनों देशों के बीच व्यापार सुगमता और यात्रा सुगमता को बहुत बड़ा बल मिलने की उम्मीद जताई गई है।
भारत-इंडोनेशिया साझेदारी के एक सुनहरे अध्याय की शुरुआत
द्विपक्षीय वार्ता के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ मिलकर एक साझा मीडिया बयान जारी किया। पीएम मोदी ने कहा कि साल 2018 में भारत और इंडोनेशिया के बीच जो व्यापक रणनीतिक साझेदारी बनी थी, वह आज जकार्ता की इस धरती पर एक नई और ऊंची उड़ान ले रही है। हम दोनों देश अब विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, आधुनिक प्रौद्योगिकी, प्राचीन संस्कृति और उच्च शिक्षा जैसे हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक साथ मिलकर ठोस और बड़े कदम बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि आज के इन ऐतिहासिक फैसलों और समझौतों के बाद से भारत और इंडोनेशिया की ऐतिहासिक साझेदारी का एक बेहद उज्ज्वल और सुनहरा अध्याय शुरू होने जा रहा है, जो पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक है।
वैश्विक चुनौतियों, पश्चिम एशिया के संकट और फलस्तीन पर गंभीर चर्चा
इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने केवल द्विपक्षीय मुद्दों पर ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट और दुनिया के सामने खड़ी विभिन्न गंभीर वैश्विक चुनौतियों पर भी बहुत विस्तार से चर्चा की। दुनिया में चल रहे युद्धों और तनावों पर भारत का रुख साफ करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल और टकराव के इस दौर में भारत का हमेशा से यह दृढ़ मानना रहा है कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध से नहीं हो सकता। शांति के लिए संवाद और कूटनीति की भूमिका आज के समय में पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हो गई है। फलस्तीन के बेहद संवेदनशील मुद्दे पर भारत की पारंपरिक और स्पष्ट नीति को दोहराते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत फलस्तीन के विषय पर हमेशा से द्वि-राष्ट्र समाधान यानी टू-स्टेट सॉल्यूशन का पूरी तरह समर्थन करता है और हम वहां एक दीर्घकालिक और स्थायी शांति की स्थापना के पक्षधर हैं।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी और महासागर विजन को मिलेगी नई ताकत
अपनी इस तीन देशों की यात्रा पर रवाना होने से पहले नई दिल्ली में दिए गए बयान को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का उनका यह दौरा भारत की प्रसिद्ध ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और ‘महासागर’ दृष्टिकोण को जमीन पर और ज्यादा मजबूत करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का ‘महासागर’ दृष्टिकोण वास्तव में सभी क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक एवं समग्र विकास सुनिश्चित करने की एक बेहद पवित्र और रणनीतिक पहल है। इस कूटनीतिक विजन का एकमात्र उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता, आपसी सहयोग और साझा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। यह पूरी यात्रा राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की जनवरी 2025 में गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में की गई भारत की सफल राजकीय यात्रा के बाद हो रही है, जो यह दर्शाती है कि दोनों देश अपने संबंधों को कितनी उच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।
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