पवन खेड़ा

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें बढ़ीं : गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पासपोर्ट विवाद में अग्रिम जमानत याचिका की खारिज

असम देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, गुवाहाटी। Pawan Khera HC News : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा को कानूनी मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के विरुद्ध की गई टिप्पणियों के मामले में उनकी अग्रिम जमानत की अर्जी को नामंजूर कर दिया है। यह मामला मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुयान सरमा द्वारा दर्ज कराई गई एक आपराधिक शिकायत से जुड़ा है, जिसमें अब खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

विदेशी पासपोर्ट और संपत्ति के आरोपों से उपजा विवाद

विवाद की शुरुआत तब हुई जब पवन खेड़ा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि रिंकी भुयान सरमा के पास संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और एंटीगुआ जैसे देशों के तीन अलग-अलग पासपोर्ट हैं। इसके साथ ही उन्होंने दुबई में अघोषित संपत्तियां और मुखौटा कंपनियों (शेल कंपनियों) के माध्यम से निवेश करने के आरोप भी जड़े थे। इन बयानों के बाद रिंकी सरमा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में जालसाजी, मानहानि और दस्तावेजों की हेराफेरी जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया था।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत

इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया था। शीर्ष अदालत ने खेड़ा को दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट बेल (अल्पकालिक जमानत) पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया था। हालांकि, अदालत ने उन्हें असम की संबंधित अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दी थी, जिसके तहत उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

उच्च न्यायालय का कड़ा रुख और गिरफ्तारी का संकट

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार को सुनाया गया। अदालत ने अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज करते हुए आरोपों की गंभीरता को प्राथमिकता दी। कांग्रेस नेता ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि ये आरोप फर्जी दस्तावेजों पर आधारित हैं और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए लगाए गए हैं।

चुनावी माहौल में बढ़ी राजनीतिक तपिश

यह कानूनी विवाद ऐसे समय में और गहरा गया है जब असम में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मुख्यमंत्री के परिवार पर लगाए गए इन आरोपों को भाजपा ने एक बड़ा मुद्दा बनाया है। अब हाई कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ गई है, क्योंकि पुलिस किसी भी समय पवन खेड़ा को हिरासत में ले सकती है। पार्टी इस मामले को अब कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर लड़ने की रणनीति बना रही है।

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